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कुण्डलपुर जैन मंदिर, दमोह — सिद्धभूमि बड़े बाबा का अद्भुत तीर्थ (Kundalpur Jain Temple, Damoh — Amazing pilgrimage of Siddhabhoomi Bade Baba)

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मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले के शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ी क्षेत्र में बसा कुण्डलपुर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह जैन आस्था, इतिहास, और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। इसे कुंडलगिरि और बड़े बाबा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थल दिगंबर जैन धर्म के 63 मंदिरों का समूह है, जो तलहटी और पहाड़ी दोनों भागों में फैले हुए हैं।
यहाँ का मुख्य आकर्षण है भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की प्राचीन प्रतिमा जिसे भक्त बड़े बाबा कहकर पुकारते हैं।
यह तीर्थ सिद्धभूमि के रूप में भी विख्यात है, क्योंकि परंपरा के अनुसार यहाँ अंतिम केवलज्ञानी श्रीधर केवलि ने मोक्ष प्राप्त किया था।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं, खासकर तब जब महा-मस्तकाभिषेक या पंचकल्याणक महोत्सव जैसे भव्य आयोजन होते हैं। कुंडलपुर की प्राकृतिक हरियाली, शांत झीलें, पहाड़ी की सीढ़ियाँ और विशाल मंदिरों की शृंखला इसे ऐसा तीर्थ बना देती है, जहाँ पहुँचकर भक्त का मन स्वयं ही आध्यात्मिकता में डूब जाता है।

Shri Jageshwarnath Mahadev Temple, Bandakpur 

इतिहास (History)

कुंडलपुर का धार्मिक महत्व कई शताब्दियों पुराना है। ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र प्राचीन काल से जैन साधुओं की तपोभूमि रहा है।
पुरातत्व और परंपरा बताते हैं कि यहाँ जैन धर्म का प्रमुख मंदिर (बड़े बाबा मंदिर) लगभग 8वीं–9वीं शताब्दी में अस्तित्व में था। समय के साथ मंदिर जीर्ण हो गया, परंतु इसकी महिमा कभी कम नहीं हुई।
मध्यकाल में यहाँ के मंदिरों का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण जैन भट्टारकों के संरक्षण में हुआ। विशेष रूप से भट्टारक सूरेंद्रकीर्ति और बुंदेला नरेश छत्रसाल का योगदान उल्लेखनीय रहा।
आधुनिक काल में, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मार्गदर्शन में 1997 में बड़े बाबा मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण आरंभ हुआ। नवनिर्मित मंदिर का कार्य कई वर्षों तक चलता रहा और 17 जनवरी 2006 को प्राचीन विग्रह को नवनिर्मित गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया गया।
फरवरी 2022 में यहाँ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और महा-मस्तकाभिषेक का ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उस समय मंदिर परिसर रंग-बिरंगी सजावट, शोभायात्राओं, गजरथ फेरी और भक्ति-संगीत से गूँज उठा था।

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मंदिर की वास्तुकला (Temple architecture)

कुंडलपुर का मुख्य बड़े बाबा मंदिर प्राचीन भारतीय नगरा शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण पत्थर और संगमरमर से हुआ है, जिसमें बारीक नक्काशी, ऊँचे शिखर और भव्य मंडप विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
मंदिर के प्रमुख हिस्से हैं:

  • गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) — जहाँ बड़े बाबा की प्रतिमा स्थापित है। यह हिस्सा अत्यंत शांत, गंभीर और भक्ति-भाव से भरपूर वातावरण देता है।
  • गूढ़-मंडप — यहाँ से गर्भगृह का सीधा दर्शन होता है।
  • नृत्य-मंडप — विशाल स्तंभों से सुसज्जित यह मंडप कलात्मकता और शिल्पकला का अद्भुत नमूना है।
  • सहस्रकूट जिनालय — इसमें कई जैन तीर्थंकरों की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
    मंदिर परिसर को इस तरह बनाया गया है कि वह जल-व्यूह से घिरा रहे, जो इसे और भी पवित्र व सुरक्षित बनाता है।
    पहाड़ी पर बने मंदिरों तक पहुँचने के लिए लगभग 400 सीढ़ियाँ हैं, जिनके दोनों ओर प्राचीन प्रतिमाएँ और मंदिर स्थित हैं। जिन श्रद्धालुओं को सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई होती है, उनके लिए डोली की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।

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मंदिर में विराजमान देव-देवियाँ (Gods and Goddesses enshrined in the temple)

  • मुख्य देव: भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) — बड़े बाबा
  • पार्श्वनाथ मंदिर — आदिनाथ जी के समीप पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाएँ।
  • जल मंदिर — एक शांत जलाशय के मध्य स्थित अद्भुत मंदिर।
  • समवशरण मंदिर — भगवान महावीर के समवशरण का प्रतीकात्मक रूप।
  • मानस्तंभ — विजय और धर्म का प्रतीक।

विशेषताएँ (Features)

  1. 63 मंदिरों का भव्य समूह
  2. बड़े बाबा की प्राचीन पद्मासन प्रतिमा
  3. सिद्धभूमि — श्रीधर केवलि की मोक्षस्थली
  4. जल मंदिर और पहाड़ी मंदिर शृंखला
  5. आचार्य विद्यासागर जी के मार्गदर्शन में आधुनिक पुनर्निर्माण

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अंदर देखने योग्य स्थल (Places to see inside)

  • बड़े बाबा का मुख्य मंदिर
  • जल मंदिर
  • समवशरण मंदिर
  • पहाड़ी पर बने प्राचीन देवालय
  • मानस्तंभ

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प्रमुख पर्व-उत्सव और कार्यक्रम (Major festivals and events)

  • महावीर जयंती — पूरे भव्य रूप में मनाई जाती है
  • वार्षिक मेला — होली के बाद का विशेष आकर्षण
  • पंचकल्याणक और महा-मस्तकाभिषेक — बड़े आयोजन जिनमें लाखों श्रद्धालु आते हैं

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खुलने-बंद होने का समय (Opening/closing time)

  • प्रातः 6:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक दर्शन
  • प्रातः अभिषेक लगभग 7:30 बजे
    (पर्वों के समय में समय बढ़ सकता है)

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पता और पहुँच (Address and access)

  • पता: कुण्डलपुर तीर्थ, तहसील पटेरा, जिला दमोह, मध्य प्रदेश – 470772
  • दूरी: दमोह से लगभग 35–37 किमी
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: दमोह
  • निकटतम हवाई अड्डा: जबलपुर

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अन्य नाम (Other Names)

  • कुंडलगिरि
  • बड़े बाबा मंदिर
  • सिद्ध क्षेत्र कुण्डलपुर

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मंदिर की फोटो (Images of temple)

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कुण्डलपुर के आसपास घूमने लायक स्थल (Places to visit around kundalpur)

1. दमोह शहर

  • रतनगढ़ माता मंदिर — दमोह का प्रसिद्ध शक्तिपीठ, यहाँ नवरात्रि में विशेष आयोजन होते हैं।
  • नोहटा का किला — बुंदेला काल का किला, इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए खास।
  • शिव मंदिर, नोहटा — प्राचीन शिवलिंग और धार्मिक वातावरण।

2. सिंगौरगढ़ किला (Singorgarh Fort)

  • दूरी: कुण्डलपुर से लगभग 45 किमी
  • यह प्राचीन किला राजा दलपति शाह और रानी दुर्गावती के शासनकाल से जुड़ा है।
  • आसपास की पहाड़ियों और झीलों के दृश्य अद्भुत हैं, इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण।

3. घुघुवा फॉसिल पार्क (Ghughua Fossil Park)

  • दूरी: लगभग 75–80 किमी
  • यहाँ 6.5 करोड़ साल पुराने पौधों के जीवाश्म देखने को मिलते हैं।
  • वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद रोचक जगह।

4. नर्मदा घाट, जबलपुर की ओर

  • यदि आप जबलपुर की ओर जा रहे हैं, तो रास्ते में भेड़ाघाट के धुआँधार जलप्रपात और मार्बल रॉक्स भी देख सकते हैं।
  • यह कुण्डलपुर से लगभग 100–110 किमी है, लेकिन यात्रा में समय हो तो जरूर जाएँ।

5. तेंदूखेड़ा

  • यहाँ कई छोटे-बड़े प्राचीन मंदिर और नर्मदा नदी के किनारे सुंदर दृश्य हैं।
  • शांत और प्राकृतिक वातावरण।

6. पातालकोट (यदि छिंदवाड़ा की ओर जाएँ)

  • हालांकि यह थोड़ी दूर (~200 किमी) है, लेकिन यह प्राकृतिक घाटी और गोंड जनजाति की संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।
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