
मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रीठी तहसील में स्थित नंदचाँद शिव मंदिर एक ऐसा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ पहुँचते ही मन स्वतः ही शांत और श्रद्धा से भर उठता है। यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और संस्कृति का जीवंत उदाहरण भी है। चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और मंदिर परिसर की गंभीरता इस स्थान को एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। खासकर सावन और महाशिवरात्रि के समय यहाँ भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। मंदिर की प्राचीनता और इसकी रहस्यमयी संरचना इसे और भी आकर्षक बनाती है।
नंदचाँद शिव मंदिर का वातावरण इतना शांत और प्राकृतिक है कि यहाँ ध्यान और साधना के लिए आदर्श परिस्थितियाँ मिलती हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक केवल धार्मिक अनुभव ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा का भी आनंद लेते हैं। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियाँ उस समय के शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा को दर्शाती हैं।
यह स्थान उन लोगों के लिए भी खास है, जो भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत और आध्यात्मिक जगह की तलाश में रहते हैं। यहाँ का हर कोना एक कहानी कहता है और हर पत्थर में इतिहास की झलक दिखाई देती है। यही कारण है कि नंदचाँद शिव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है।
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स्थापना और इतिहास (Establishment and History)

नंदचाँद शिव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और बहुस्तरीय रहा है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को गहराई से दर्शाता है। ऐतिहासिक प्रमाणों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नंदचाँद क्षेत्र का विकास लगभग 5वीं से 8वीं शताब्दी के बीच प्रारंभ हुआ था। यह वह समय था जब भारत में मंदिर निर्माण और धार्मिक गतिविधियों का व्यापक विस्तार हो रहा था। इस क्षेत्र में उस काल में अनेक मंदिरों का निर्माण किया गया था, जो शैव, वैष्णव और शक्त उपासना के प्रमुख केंद्र थे। इससे स्पष्ट होता है कि नंदचाँद क्षेत्र केवल एक धर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि यह विविध धार्मिक परंपराओं का संगम स्थल था।
गुप्तकाल, जिसे भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है, इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण रहा। गुप्त शासकों और उनके उत्तराधिकारियों ने मंदिर निर्माण और धार्मिक संरचनाओं को विशेष संरक्षण दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कलचुरी वंश के राजाओं ने भी इस क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया। कलचुरी काल में मध्य भारत में स्थापत्य कला और मूर्तिकला का विशेष उत्कर्ष हुआ, जिसका प्रभाव नंदचाँद क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
हालांकि, समय के साथ इस क्षेत्र ने कई आक्रमणों और प्राकृतिक क्षरण का सामना किया। इन परिस्थितियों के कारण यहाँ के अधिकांश प्राचीन मंदिर खंडित हो गए और उनके अवशेष चारों ओर बिखर गए। कई वर्षों तक यह क्षेत्र उपेक्षित रहा और धीरे-धीरे जंगलों में समा गया।
19वीं शताब्दी में ब्रिटिश पुरातत्वविद Alexander Cunningham ने इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। उन्होंने अपने अध्ययन में उल्लेख किया कि यहाँ कम से कम आठ प्राचीन मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि का प्रमाण हैं। उनके इस सर्वेक्षण ने नंदचाँद क्षेत्र को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया और इसे पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल के रूप में पहचान मिली।
वर्तमान में जो नंदचाँद शिव मंदिर दिखाई देता है, वह वास्तव में इन प्राचीन भग्नावशेषों को जोड़कर पुनर्निर्मित किया गया है। यही कारण है कि मंदिर की दीवारों, दरवाजों और शिखर में विभिन्न कालखंडों की वास्तुकला का मिश्रण देखने को मिलता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समय के साथ बदलती हुई कला और इतिहास का जीवंत प्रमाण है, जो आज भी अपने भीतर सदियों की कहानी समेटे हुए है।
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वास्तुकला (Architecture)

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नंदचाँद शिव मंदिर की वास्तुकला इसे अत्यंत विशिष्ट और आकर्षक बनाती है। यह मंदिर प्राचीन भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जो उत्तर भारत के मंदिरों में प्रचलित रही है। इस शैली की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऊँचा शिखर और सुंदर नक्काशी होती है, जो यहाँ स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है।
मंदिर का निर्माण बड़े-बड़े पत्थरों से किया गया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक तकनीक के सटीक रूप से जोड़ा गया है। इन पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी उस समय के शिल्पकारों की कुशलता को दर्शाती है। दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, नृत्य मुद्राओं और पौराणिक कथाओं की झलक मिलती है, जो इसे एक जीवंत कला संग्रहालय जैसा अनुभव कराती हैं।
मंदिर का गर्भगृह सबसे पवित्र स्थान है, जहाँ शिवलिंग स्थापित है। इसके सामने नंदी की प्रतिमा विराजमान है, जो भगवान शिव के वाहन माने जाते हैं। गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ बना हुआ है, जहाँ भक्त श्रद्धा से घूमकर पूजा करते हैं।
मंडप और प्रवेश द्वार की संरचना भी अत्यंत सुंदर है, जहाँ पत्थरों पर जटिल डिज़ाइन उकेरे गए हैं। मंदिर की छत पर बनी कलाकृतियाँ आज भी अपनी सुंदरता को बनाए हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह मंदिर कितनी सावधानी और मेहनत से बनाया गया था।
कुल मिलाकर, नंदचाँद शिव मंदिर की वास्तुकला प्राचीन भारतीय कला और संस्कृति का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
विशेषताएँ (Unique Features)
नंदचाँद शिव मंदिर की सबसे खास बात इसकी प्राचीनता और रहस्यमयी वातावरण है। यह मंदिर घने जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है, जो इसे एक अलग ही पहचान देता है। यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक ध्वनियाँ मन को तुरंत शांति प्रदान करती हैं।
मंदिर की दूसरी प्रमुख विशेषता इसकी अद्भुत शिल्पकला है। यहाँ की मूर्तियाँ और पत्थरों पर की गई नक्काशी इतनी बारीक और सुंदर हैं कि हर दर्शक उन्हें देखकर चकित रह जाता है। इन कलाकृतियों में उस समय की संस्कृति, जीवनशैली और धार्मिक मान्यताओं की झलक मिलती है।
यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, जो इसे और भी पवित्र बनाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। यही कारण है कि यहाँ हर दिन भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
मंदिर का स्थान भी इसकी एक विशेषता है, क्योंकि यह मुख्य शहर से दूर एक शांत इलाके में स्थित है। यहाँ आने पर ऐसा लगता है जैसे आप किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच गए हों, जहाँ केवल शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव होता है।
इसके अलावा, मंदिर परिसर में कई प्राचीन अवशेष और टूटे-फूटे स्तंभ भी देखने को मिलते हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है, जो इतिहास, कला और आध्यात्म का संगम एक साथ देखना चाहते हैं।
गर्भगृह और अन्य देवता (Sanctum and other deities)
- मुख्य देवता – भगवान शिव (मृताङ्गेश्वर शिवलिंग)।
- अन्य स्थापित स्वरूप – परिसर में दुर्गा, विष्णु, गणेश, सप्तमात्रिका और अन्य देवी–देवताओं की खंडित प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं।
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मंदिर में त्योहार और आयोजन (Festivals and events at the temple)
नंदचाँद शिव मंदिर ग्रामीण परंपरा के अनुसार जीवित शिव–पीठ है। यहाँ प्रमुख आयोजन इस प्रकार होते हैं –
- महाशिवरात्रि – इस दिन विशेष पूजा, रात्रि जागरण और भजन–कीर्तन होते हैं।
- सावन माह – पूरे महीने श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा के लिए यहाँ आते हैं।
- सोमवार – हर सोमवार को भक्त विशेष रूप से यहाँ शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं।
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मंदिर के खुलने–बंद होने का समय (Temple opening/closing time)
यहाँ दर्शन का समय सामान्यतः सुबह सूर्योदय से शाम सूर्यास्त तक रहता है।
- सुबह आरती – लगभग सूर्योदय के समय।
- शाम आरती – सूर्यास्त के समय।
(यात्रा से पहले स्थानीय पुजारी या ग्रामीणों से सही समय की पुष्टि करना उचित होगा।)
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त्यौहार और कार्यक्रम (Festivals and Events)
नंदचाँद शिव मंदिर में पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक त्योहार और कार्यक्रम बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। इनमें सबसे प्रमुख महाशिवरात्रि का पर्व है, जब हजारों श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। इस दिन मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और पूरी रात जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
श्रावण मास भी इस मंदिर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस पूरे महीने में भक्त रोजाना जलाभिषेक करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। सोमवार के दिन यहाँ विशेष भीड़ रहती है, क्योंकि इसे भगवान शिव का दिन माना जाता है।
इसके अलावा नाग पंचमी, सावन सोमवार और अन्य धार्मिक अवसरों पर भी यहाँ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और मंदिर परिसर में एक उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
मंदिर के अंदर देखने योग्य चीजें (Things to See Inside the Temple)
प्राचीन शिवलिंग – यह मंदिर का मुख्य आकर्षण है और इसे स्वयंभू माना जाता है। शिवलिंग की बनावट और उसकी प्राचीनता इसे विशेष बनाती है। भक्त यहाँ जलाभिषेक और पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त करते हैं।
नंदी महाराज की प्रतिमा – गर्भगृह के सामने स्थित यह प्रतिमा अत्यंत आकर्षक है। श्रद्धालु नंदी के कान में अपनी इच्छा कहते हैं और मान्यता है कि वह इच्छा भगवान शिव तक पहुँचती है।
नक्काशीदार स्तंभ – मंदिर के स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी अत्यंत सुंदर और ऐतिहासिक है। इन पर देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं की झलक मिलती है।
प्राचीन मूर्तियाँ – मंदिर परिसर में कई प्राचीन मूर्तियाँ मौजूद हैं, जो उस समय की कला और संस्कृति को दर्शाती हैं।
गर्भगृह की संरचना – मंदिर का गर्भगृह अत्यंत शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है। यहाँ कुछ समय बिताने पर मन को गहरी शांति मिलती है।
मंडप और प्रवेश द्वार – मंदिर का प्रवेश द्वार और मंडप अपनी सुंदर डिज़ाइन और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
मंदिर तक कैसे पहुँचे (How to reach the temple)
- कटनी से – कटनी से रीठी होकर स्थानीय मार्ग से नंदचाँद पहुँचा जा सकता है।
- रीठी से – रीठी से मंदिर की दूरी लगभग 20–22 किमी है।
- रेलवे – नज़दीकी स्टेशन रीठी रेलवे स्टेशन है, जबकि बड़ा जंक्शन कटनी है।
- सड़क मार्ग – कटनी और रीठी से निजी वाहन या टैक्सी से पहुँचना सबसे आसान है।
कब जाएँ (When to go)
- अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहावना रहता है और यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय है।
- सावन और महाशिवरात्रि – आस्था और धार्मिक उत्सव देखने के इच्छुक लोगों के लिए यह समय विशेष है।
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ध्यान देने योग्य बातें (Things to Keep in Mind)
मंदिर की यात्रा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। यह मंदिर जंगल क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यात्रा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बेहतर होगा कि आप दिन के समय ही यहाँ जाएँ और अकेले यात्रा करने से बचें।
मंदिर परिसर में साफ-सफाई बनाए रखना हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार का कचरा इधर-उधर न फैलाएँ और पर्यावरण को सुरक्षित रखें।
धार्मिक स्थल होने के कारण यहाँ शालीनता और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। ऊँची आवाज में बात न करें और मंदिर के नियमों का पालन करें।
पता (Address and Google map)
नंदचाँद शिव मंदिर (मृताङ्गेश्वर महादेव)
गाँव – नंदचाँद, बोरी के पास
तहसील – शहनगर
ज़िला – पन्ना (मध्य प्रदेश)
पिनकोड – 488442
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ट्रैवल गाइड (Travel Guide)
नंदचाँद शिव मंदिर तक पहुँचना काफी आसान है, लेकिन इसके लिए आपको सही मार्ग की जानकारी होना जरूरी है।
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कटनी जंक्शन है, जो देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ से रीठी तक बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर में स्थित है, जो कटनी से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुँचना सुविधाजनक होता है।
कटनी से रीठी तक सड़क मार्ग अच्छी स्थिति में है, और यहाँ निजी वाहन या टैक्सी से यात्रा करना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। रीठी पहुँचने के बाद मंदिर तक पहुँचने के लिए स्थानीय लोगों की सहायता ली जा सकती है।
यात्रा के दौरान पानी और आवश्यक सामान साथ रखें, क्योंकि मंदिर के आसपास सुविधाएँ सीमित हो सकती हैं।
नंदचाँद शिव मंदिर, रीठी, कटनी की तस्वीरें (Images of Nandchand Shiva Temple, Rithi, Katni)
नंदचाँद शिव मंदिर के पास घूमने योग्य स्थान (Places to visit near Nandchand Shiva Temple)
1. सुरम्य पार्क, कटाये घाट
कटनी का यह पार्क परिवार और बच्चों के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहाँ हरियाली, झील का सुंदर नज़ारा और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।
2. नीलकंठेश्वर भक्ति धाम, सलैया पडखुरी, विजय राघवगढ़
यह धाम भगवान शिव को समर्पित है। विशाल शिवलिंग और भव्य मंदिर की वास्तुकला श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
3. जागृति पार्क, माधव नगर, कटनी
मनोरंजन और सैर-सपाटे के लिए प्रसिद्ध यह पार्क स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। बच्चों के लिए खेल-खिलौनों की सुविधा भी उपलब्ध है।
4. बड़ेरा चतुर्युग धाम
यह धार्मिक स्थल अपनी आस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण जाना जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु चारों युगों की झलक और धार्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं।
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5. विजय राघवगढ़ किला
कटनी से कुछ दूरी पर स्थित यह किला प्राचीन काल के गौरव और शौर्य की गाथा सुनाता है। किले की दीवारें, स्थापत्य और इतिहास पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
6. मां वैष्णव देवी धाम, गाँव सुंगरहा
कटनी जिले का यह धाम माता वैष्णो देवी को समर्पित है। यहाँ भक्तगण बड़ी श्रद्धा से आते हैं और माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
7. विष्णु वराह मंदिर, करनपुर
यह मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। इसका धार्मिक महत्व अत्यधिक है और यहाँ की मूर्तिकला प्राचीन भारतीय कला का सुंदर उदाहरण है।
8. रूपनाथ धाम
यहाँ भगवान शिव का प्राचीन मंदिर और प्राकृतिक झरना स्थित है। यह स्थान धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है।
9. कमाकंडला किला, बिलहरी, कटनी
यह किला कटनी का एक ऐतिहासिक आकर्षण है। प्राचीन स्थापत्य और इतिहास के शौकीनों के लिए यह एक रोचक जगह है।
10. मैहर (मां शारदा मंदिर)
कटनी से लगभग 65 किमी दूर स्थित यह शक्तिपीठ मां शारदा देवी को समर्पित है। श्रद्धालु यहाँ बड़ी आस्था से आते हैं।
11. मां जल्पा देवी, कटनी
कटनी की प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक, मां जल्पा देवी का यह धाम भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है।
12. लक्ष्मी नारायण मंदिर, कटनी
यह मंदिर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है। यहाँ की भव्य मूर्तियाँ और धार्मिक वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
13. लक्ष्मी नारायण मंदिर, कटनी
भगवान शिव का यह भव्य धाम धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भक्तों की भीड़ विशेषकर श्रावण मास में रहती है।
14. बड़वानी धाम (कटनी के पास)
यहाँ का धार्मिक वातावरण और मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
नंदचाँद शिव मंदिर एक ऐसा स्थान है, जहाँ इतिहास, कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक अनमोल धरोहर है।
यदि आप शांति, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह स्थान आपके लिए एक आदर्श गंतव्य साबित हो सकता है।




