
मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर के बीचों-बीच शिवना नदी के तट पर स्थित यह विशाल मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन यह साधारण शिव मंदिर नहीं है—यहाँ स्थित है दुनिया में अपनी तरह का अनोखा “अष्टमुखी शिवलिंग“, जिसके आठ सुंदर और रहस्यमय मुख हैं।
इस अनोखी प्रतिमा को निहारते ही ऐसा लगता है मानो स्वयं महादेव आठ स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दे रहे हों।
कैक्टस गार्डन सैलाना, रतलाम (Cactus Garden Sailana, Ratlam)
मंदिर का परिचय (Introduction to the Temple)
मंदसौर का यह पावन मंदिर अपनी अनोखी मूर्ति, दिव्य ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए विश्व-प्रसिद्ध है।
प्राचीन काल से ही इस क्षेत्र में शिवभक्ति का गहरा प्रभाव रहा है, और भगवान पशुपतिनाथ यहाँ के लोकदेवता माने जाते हैं।
इतिहास — शिवना नदी से प्रकट हुआ चमत्कार (History – A Miracle Revealed by the Shivna River)

आज के मंदिर की शुरुआत एक बड़े चमत्कार से हुई।
कहानी के अनुसार सन 1940 में मंदसौर के एक स्थानीय व्यक्ति — उदाजी धोबी — ने शिवना नदी में एक चमकता हुआ तांबई पत्थर देखा। करीब जाकर देखा तो वह साधारण पत्थर नहीं, बल्कि अष्टमुखी शिवलिंग था।
यह घटना तेजी से फैल गई और लोग प्रतिदिन नदी किनारे जाकर दर्शन करने लगे।
लगभग 21 वर्ष से भी अधिक समय तक यह दिव्य शिवलिंग खुले में ही रखा रहा, फिर 1961 में इस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।
धोलावड़ बाँध, रतलाम — एक रोचक और रोमांचक यात्रानिर्देश
यह शिवलिंग करीब 4600 किलोग्राम वजनी है।
सामने से 7.25 फीट और मुड़े हुए रूप में लगभग 11.25 फीट ऊँचा है।
शिल्प विशेषग्यों के अनुसार इसकी संरचना 5वीं–6वीं सदी के शैव शिल्प से मेल खाती है।
मंदिर में कौन-कौन से देवता हैं (What are the deities in the temple?)
मंदिर का मुख्य आकर्षण:
अष्टमुखी शिवलिंग के आठ मुख (Eight faces of Ashtamukhi Shivalinga)
- शव
- भद्र
- रुद्र
- उग्रो
- भीम
- पशुपति
- महादेव
- ईशान
महालक्ष्मी मंदिर, रतलाम — माँ लक्ष्मी की भव्य आराधना का केंद्र
प्रत्येक मुख भगवान शिव के अलग-अलग रूप और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
विशेषताएँ जो इस मंदिर को अद्वितीय बनाती हैं (Features that make this temple unique)

- भारत का एकमात्र पूर्ण रूप से निर्मित अष्टमुखी शिवलिंग
- शिवना नदी के शांत तट का दिव्य वातावरण
- विशाल और आकर्षक मंदिर परिसर
- मंदिर में स्थित विशाल भारी घंटा
- भजन, मंत्रोच्चार और आरती का अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव
मंदिर की रोज़ाना की पूजा और आरती (Daily puja and aarti at the temple)
मंदिर में दैनिक रूप से कई पूजा और आरती होती हैं:
- सुबह दर्शन प्रारंभ: लगभग 6:00 बजे
- अभिषेक पूजा: सुबह
- राजभोग आरती: 11 बजे के आसपास
- शाम/शृंगार आरती: लगभग 4 बजे
- संध्या आरती: 7–7:30 बजे
(समय मौसम और अवसर के अनुसार बदल सकता है)
कलिका माता मंदिर, रतलाम – माँ शक्ति की आराधना का प्राचीन धाम
त्योहार और विशेष कार्यक्रम (Festivals and Special Events)
महाशिवरात्रि
सबसे प्रमुख पर्व। पूरी रात मंदिर परिसर में भक्ति, मंत्रोच्चार और पूजा का विशेष आयोजन होता है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष मेला
तीन दिनों तक चलने वाला बड़ा धार्मिक आयोजन, जिसमें विशेष पूजा, हवन और भक्तिभाव का वातावरण रहता है।
अन्य पर्व
सावन, श्रावणी सोमवार, नवत्रि, दीपावली आदि पर भी मंदिर विशेष रूप से सजाया जाता है।
मंदिर की समय-सारणी (Temple Timings)
- मंदिर खुलने का समय: सुबह 6:00 बजे
- मंदिर बंद होने का समय: रात 10:00 बजे
- प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है।
खरमौर वन्यजीव अभ्यारण्य, सैलाना
मंदिर का पूरा पता (Full address of the temple)
Shree Pashupatinath Temple,
Pashupatinath Mandir Road,
Mandsaur, Madhya Pradesh – 458001
मंदिर तक कैसे पहुँचें (How to reach the temple)
रेल द्वारा (By Rail)
मंदसौर रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 3–5 किलोमीटर दूर है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
- इंदौर से दूरी: लगभग 200 किमी
- उज्जैन से: 165 किमी
- उदयपुर से: 180 किमी
बस, टैक्सी और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं।
हवाई मार्ग (By Air)
निकटतम एयरपोर्ट — इंदौर / उदयपुर।
वहाँ से सड़क मार्ग से मंदसौर पहुँचा जाता है।
श्री रामेश्वर महादेव साई मंदिर, रतलाम — आस्था, अध्यात्म और शांति का संगम
आसपास घूमने योग्य स्थान (Places to visit nearby)
- तपेश्वर महादेव मंदिर
- शिवना नदी घाट
- मंदसौर के स्थानीय बाजार
- प्राकृतिक और शांत नदी तट
मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit the temple)
- अक्टूबर से फरवरी — मौसम बेहद सुहावना
- सावन और महाशिवरात्रि — उत्सव का अद्भुत माहौल
- शांत दर्शन के लिए सुबह का समय उत्तम है
ध्यान में रखने योग्य बातें (Best time to visit the temple)
- मंदिर में फोटोग्राफी कुछ हिस्सों में नियंत्रित हो सकती है—पूछकर करें।
- त्योहारों पर बहुत भीड़ रहती है—समय से पहले पहुँचे।
- नदी तट पर फिसलन हो सकती है—सावधानी रखें।
- मंदिर परिसर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- आरती और पूजा के समय में बदलाव संभव है—स्थानीय जानकारी लें।
केदारेश्वर महादेव मंदिर, सैलाना ,रतलाम






