
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में चंदवासा गाँव के पास स्थित धर्मराजेश्वर मंदिर एक अनोखा रॉक-कट (चट्टान काटकर बना) मंदिर है। इसे अक्सर “मध्यप्रदेश का छोटा एलोरा” कहा जाता है, क्योंकि यह पूरा मंदिर एक ही विशाल चट्टान को तराशकर बनाया गया है। यहाँ की रहस्यमयी गुफाएँ, दिव्य वातावरण, शिव-विष्णु की संयुक्त उपासना और प्राचीन मूर्तिकला इसे आध्यात्मिक तथा ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत मूल्यवान बनाते हैं।
श्री बालाजी मंदिर, तलाई वाले बालाजी, मंदसौर (Shri Balaji Temple, Talai Wale Balaji, Mandsaur)
इतिहास (History)

धर्मराजेश्वर मंदिर 8वीं–9वीं शताब्दी के काल का माना जाता है।
शुरू में यह स्थान विष्णु उपासना का प्रमुख केंद्र था, बाद में इसे शिव मंदिर के रूप में विकसित किया गया।
गर्भगृह में शिवलिंग और विष्णु की मूर्ति एकसाथ होने के कारण इसे “हरिहर मंदिर” भी कहा जाता है।
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय शासकों — जैसे प्रतिहार, गुर्जर या राष्ट्रकूट साम्राज्य — के दौर में किया गया था।
इसके आसपास की गुफाएँ यह संकेत देती हैं कि यह स्थान पहले बौद्ध व जैन साधना केंद्र रहा होगा।
श्री पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर — एक अद्भुत दिव्य यात्रा
वास्तुकला और विशेषताएँ (Architecture and features)
धर्मराजेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि—
पूरा मंदिर एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है।
मुख्य मंदिर लगभग 14.5 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा है।
मंदिर के चारों ओर लगभग 170 से अधिक गुफाएँ हैं, जिनमें बौद्ध और जैन शिल्प का मिश्रण देखने को मिलता है।
मंदिर का शिखर (शिखरा) नागर शैली में बना है।
कहते हैं कि सुबह की पहली सूर्य-किरण सीधे गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग पर पड़ती है — यह दृश्य अत्यंत दिव्य माना जाता है।
मंदिर के अंदर देवी-देवता (Deities inside the temple)

मुख्य गर्भगृह — भगवान शिव (शिवलिंग)
साथ ही भगवान विष्णु की मूर्ति (हरिहर रूप का संकेत)
आसपास के छोटे मंदिरों में —
- देवी पार्वती
- भगवान गणेश
- भैरव
- जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ (कुछ गुफाओं में)
तेलिया तालाब, मंदसौर (Teliya Talab, Mandsaur)
यह स्थान बहुधार्मिक संस्कृति और भारत की प्राचीन सहिष्णु परंपरा का प्रतीक है।
पूजा-अर्चना, आरतियाँ और भजन (Worship, prayers and hymns)
मंदिर में दैनिक पूजा-अर्चना होती है।
विशेष अवसरों पर यहाँ सुबह-शाम की आरती और भजन अत्यंत मनोहारी होते हैं।
महाशिवरात्रि पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, और हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
स्थानीय मान्यता—
महाशिवरात्रि की रात यहाँ रुककर साधना करने से कल्याण व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
त्यौहार और कार्यक्रम (Festivals and Events)
- महाशिवरात्रि — मुख्य पर्व
- सावन मास — विशेष पूजन
- त्रयोदशी के दिन विशेष अभिषेक
- स्थानीय ग्राम उत्सव और पूजा आयोजन
महालक्ष्मी मंदिर, रतलाम — माँ लक्ष्मी की भव्य आराधना का केंद्र
पास के घूमने योग्य स्थान (Places to visit nearby)
धमनार गुफाएँ (Dhamnar Caves)
मंदिर से लगभग 60–100 मीटर की दूरी पर स्थित।
50+ से अधिक बौद्ध गुफाएँ, स्तूप, विहार और मूर्तिकला मौजूद।
इतिहास और पुरातत्व प्रेमियों के लिए यह स्थान अवश्य देखने योग्य है।
इसके अलावा —
- प्राकृतिक चट्टानी घाटी
- शांत ग्रामीण परिवेश
- प्राचीन जैन/बौद्ध मूर्तियाँ
कैसे पहुँचें? (पूरी यात्रा गाइड) (How to reach? (Complete Travel Guide))
धर्मराजेश्वर मंदिर चंदवासा गाँव, तहसील गरौठ, जिला मंदसौर में स्थित है।
रेल मार्ग
सबसे नज़दीकी स्टेशन: शामगढ़ रेलवे स्टेशन (लगभग 22 किमी)
यह दिल्ली–मुंबई मुख्य मार्ग पर है। स्टेशन से टैक्सी/ऑटो मिल जाता है।
सड़क मार्ग (Road route)
मंदसौर से दूरी: लगभग 106 किमी
शामगढ़ से दूरी: लगभग 25–30 किमी
दिल्ली–मुंबई हाइवे से चंदवासा गाँव पहुँचें, फिर वहाँ से लगभग 4 किमी अंदर मंदिर के पास पहुँचा जाता है।
श्री रामेश्वर महादेव साई मंदिर, रतलाम — आस्था, अध्यात्म और शांति का संगम
हवाई मार्ग (Air shaft)
सबसे नज़दीकी हवाई अड्डे —
- इंदौर
- उज्जैन / भोपाल (दूरी अधिक है)
इन शहरों से सड़क या रेल द्वारा शामगढ़ पहुँचकर आगे यात्रा करें।
मंदिर के खुलने का समय (Temple opening hours)
सुबह: लगभग 6:00 बजे
शाम: सूर्यास्त तक (स्थानीय समय के अनुसार)
मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit the temple)
- अक्टूबर से फरवरी (ठंडा और सुहावना मौसम)
- सावन महीना (पूजा-अर्चना का विशेष माह)
- सुबह जल्दी जाएँ — ताकि पहली सूरज की किरण का अद्भुत दृश्य देख सकें।
ध्यान देने योग्य बातें (Things to note)
- मंदिर एक चट्टान की गुफा में है — इसलिए फिसलन वाले स्थानों पर सावधान रहें।
- पानी और हल्का भोजन साथ रखें, क्योंकि आसपास ज्यादा दुकानें नहीं हैं।
- पर्यावरण और ऐतिहासिक संरचना का सम्मान करें।
- गुफाओं में फोटो खींचते समय सावधानी रखें।
- बुजुर्गों और बच्चों के साथ जाते समय कुछ स्थान थोड़े ढलान वाले हैं—सावधानी ज़रूरी है।
पूरा पता (Full address)
Shree Dharmrajeshwar Temple,
Chandwasa Village,
Garoth Tehsil,
District Mandsaur,
Madhya Pradesh – 458883
देवास माता टेकरी मंदिर – आस्था, इतिहास और अद्भुत चमत्कार का संगम













