शिवाय विष्णु रूपाय शिव रूपाय विष्णवे |
शिवस्य हृदयं विष्णुं विष्णोश्च हृदयं शिवः ||
यथा शिवमयो विष्णुरेवं विष्णुमयः शिवः |
यथाsन्तरम् न पश्यामि तथा में स्वस्तिरायुषि|
यथाsन्तरं न भेदा: स्यु: शिवराघवयोस्तथा||
अर्थ:
- शिवाय विष्णु रूपाय शिव रूपाय विष्णवे: भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों एक-दूसरे के स्वरूप में हैं। शिव का स्वरूप विष्णु में और विष्णु का स्वरूप शिव में देखा जा सकता है।
- शिवस्य हृदयं विष्णुः विष्णोश्च हृदयं शिवः: शिव के हृदय में विष्णु निवास करते हैं, और विष्णु के हृदय में शिव का वास है।
- यथा शिवमयो विष्णुः तथा विष्णुमयः शिवः: जिस प्रकार विष्णु शिवमय हैं, उसी प्रकार शिव विष्णुमय हैं। दोनों एक ही शक्ति के दो रूप हैं।
- यथान्तरं न पश्यामि तथे मे स्वस्तिरायुषि: मैं उनमें कोई भेद नहीं देखता; इसी से मेरी आयु और कल्याण बना रहे।
महत्व:
यह श्लोक भगवान शिव और विष्णु के अद्वैत भाव को प्रकट करता है, जिसमें दोनों का स्वरूप एक ही माना गया है। यह श्लोक भक्त को यह सिखाता है कि सभी देवताओं में एक ही परम तत्व विद्यमान है, जिसे अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है।
यह श्लोक विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो शिव और विष्णु दोनों की पूजा करते हैं, और यह दर्शाता है कि सभी देवता एक ही हैं।
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