पांडुरंगाची आरती भगवान विठ्ठल (विठोबा) को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और श्रद्धापूर्ण मराठी आरती है। भगवान विठ्ठल को भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है, जो पंढरपुर में ईंट पर खड़े होकर अपने भक्तों की प्रतीक्षा करते हैं।
यह आरती वारकरी संप्रदाय की आत्मा मानी जाती है और विशेष रूप से आषाढ़ी व कार्तिकी एकादशी, कीर्तन, भजन और मंदिरों में नित्य गाई जाती है।
इस आरती के माध्यम से भक्त भगवान पांडुरंग के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा और भक्तवत्सलता का स्मरण करता है।
कैलास राणा शिव चंद्रमौळी (Kailasrana Shivchandra Mauli)
पांडुरंगाची आरती (Pandurang Aarti)
श्री विठ्ठल आरती
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा
वामाङ्गी रखुमाईदिसे दिव्य शोभा ।
पुण्डलिकाचे भेटि परब्रह्म आले गा
चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा ॥१॥
जय देव जय देव जय पांडुरंगा ।
रखुमाई वल्लभा राईच्या वल्लभा पावे जिवलगा ॥धृ०॥
तुळसीमाळा गळा कर ठेऊनी कटी
कासे पीताम्बर कस्तुरी लल्लाटी ।
देव सुरवर नित्य येती भेटी
गरुड हनुमन्त पुढे उभे राहती ॥२॥
धन्य वेणूनाद अणुक्षेत्रपाळा
सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळा ।
राई रखुमाबाई राणीया सकळा
ओवाळिती राजा विठोबा सावळा ॥३॥
ओवाळू आरत्या कुरवण्ड्या येती
चन्द्रभागेमाजी सोडुनिया देती ।
दिण्ड्या पताका वैष्णव नाचती
पण्ढरीचा महिमा वर्णावा किती ॥४॥
आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती
चन्द्रभागेमाजी स्नाने जे करिती ।
दर्शन होळामात्रे तया होय मुक्ति
केशवासी नामदेव भावे ओवाळिती ॥५॥
– संत नामदेव
गणेश जी की आरती सुखकर्ता दुखहर्ता (Aarti of Ganesh ji Sukhkarta Dukhharta)
पांडुरंगाची आरती के लाभ (Benefits)
पांडुरंगाची आरती का नियमित पाठ करने से भक्त को अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं—
- मन में शांति और संतोष की अनुभूति होती है
- भक्ति भाव मजबूत होता है और ईश्वर से जुड़ाव बढ़ता है
- जीवन के कष्ट और बाधाएँ धीरे-धीरे कम होती हैं
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल वातावरण बनता है
- अहंकार कम होकर सेवा और विनम्रता का भाव जागृत होता है
- एकादशी व्रत और भक्ति साधना सफल मानी जाती है
- मृत्यु के बाद मोक्ष की कामना को बल मिलता है (जैसा कि आरती में वर्णित है)
पांडुरंगाची आरती करने की विधि (Vidhi)
पांडुरंगाची आरती को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है—
आरती करने की सरल विधि
- प्रातः या संध्या स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- घर के मंदिर में भगवान विठ्ठल या कृष्ण की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
- दीपक जलाएँ, अगरबत्ती और धूप अर्पित करें
- तुलसी दल, फूल या माला भगवान को चढ़ाएँ
- दोनों हाथ जोड़कर श्रद्धा से पांडुरंगाची आरती का पाठ करें
- आरती के अंत में भगवान से क्षमा और कृपा की प्रार्थना करें
- अंत में प्रसाद ग्रहण करें और परिवार में बाँटें
विशेष दिन
- आषाढ़ी एकादशी
- कार्तिकी एकादशी
- शनिवार और एकादशी के दिन आरती करना विशेष फलदायी माना जाता है


