
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की प्राकृतिक सुंदरता, घने सतपुड़ा के जंगल और धार्मिक आस्था से भरा जुन्नारदेव क्षेत्र अनेक प्राचीन शिव स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं पवित्र स्थलों में जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी का विशेष स्थान है। यह मंदिर केवल स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि नागद्वारी और चौरागढ़ की धार्मिक यात्रा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान भगवान शिव के विश्राम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है और इसी कारण इसे “पहली पारी” कहा जाता है। मान्यता है कि चौरागढ़ की कठिन यात्रा प्रारंभ करने से पहले श्रद्धालु यहाँ भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
सतपुड़ा पर्वतमाला की हरियाली से घिरा यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। सुबह के समय पक्षियों की मधुर आवाज़, ठंडी हवा और मंदिर परिसर में गूंजती घंटियों की ध्वनि वातावरण को अत्यंत दिव्य बना देती है। यही कारण है कि यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को प्रकृति और ईश्वर के अत्यंत निकट अनुभव करता है।
सावन मास, महाशिवरात्रि और नागपंचमी के अवसर पर यहाँ विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है। दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र है।
यद्यपि पहली पारी का विस्तृत ऐतिहासिक विवरण लिखित अभिलेखों में बहुत कम मिलता है, फिर भी स्थानीय लोककथाएँ, धार्मिक परंपराएँ और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएँ इसे छिंदवाड़ा जिले के प्रमुख शिव तीर्थों में स्थान दिलाती हैं। यही कारण है कि प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर, ट्रेकिंग के शौकीन तथा धार्मिक पर्यटक सभी इस स्थल की ओर आकर्षित होते हैं।
नागद्वारी यात्रा, छिंदवाड़ा (Nagdwari Yatra, Chhindwara)
स्थापना (Establishment)
जुन्नारदेव विशाला की पहली पारी की स्थापना के संबंध में कोई आधिकारिक शिलालेख या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। किंतु स्थानीय परंपराओं और वर्षों से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान अत्यंत प्राचीन शिव उपासना केंद्र रहा है। ग्रामीणों का विश्वास है कि यहाँ भगवान शिव का प्राकृतिक रूप में पूजन सदियों से होता आ रहा है तथा बाद में श्रद्धालुओं और स्थानीय समाज के सहयोग से वर्तमान मंदिर का विकास किया गया।
‘पहली पारी’ नाम स्वयं इस स्थान की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। चौरागढ़ और नागद्वारी की कठिन यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा की प्रथम पूजा यहीं से आरंभ करते हैं। यही कारण है कि इसे यात्रा का शुभ प्रारंभ माना जाता है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यहाँ केवल प्राकृतिक शिवलिंग और एक छोटा पूजा स्थल हुआ करता था। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी तो मंदिर परिसर का विस्तार किया गया तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न निर्माण कार्य किए गए।
मंदिर का विकास किसी एक राजा या शासक द्वारा नहीं बल्कि जनसहयोग और धार्मिक आस्था के माध्यम से हुआ माना जाता है। आसपास के गाँवों के लोग समय-समय पर मंदिर की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और धार्मिक आयोजनों में योगदान देते रहे हैं। यही सामूहिक सहभागिता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।
आज पहली पारी केवल एक मंदिर नहीं बल्कि क्षेत्र की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। नागद्वारी यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ रुककर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी यात्रा को सफल बनाने की कामना करते हैं। इस प्रकार यह स्थान सतपुड़ा अंचल की धार्मिक परंपराओं को आज भी जीवंत बनाए हुए है।
इतिहास (History)

जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी का इतिहास मुख्य रूप से स्थानीय लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही मौखिक परंपराओं पर आधारित है। वर्तमान समय तक इस मंदिर के निर्माण काल अथवा संस्थापक के संबंध में कोई प्रामाणिक शिलालेख या ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थान कई दशकों से नहीं बल्कि सदियों से भगवान शिव की आराधना का प्रमुख केंद्र रहा है। सतपुड़ा के घने जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में पहले ऋषि-मुनि और साधु-संत तपस्या किया करते थे तथा वे प्राकृतिक शिवलिंग की पूजा करते थे।
स्थानीय मान्यता के अनुसार चौरागढ़ और नागद्वारी की कठिन धार्मिक यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा का पहला विश्राम और भगवान शिव का पहला आशीर्वाद इसी स्थान पर प्राप्त करते थे। इसी कारण इस स्थान को “पहली पारी” के नाम से जाना जाने लगा। समय के साथ यह नाम इतना प्रसिद्ध हो गया कि आज यह मंदिर पूरे जुन्नारदेव क्षेत्र में इसी नाम से पहचाना जाता है।
पहले यहाँ केवल एक छोटा-सा पूजा स्थल था, जहाँ आसपास के ग्रामीण नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते थे। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी और स्थानीय समाज के सहयोग से मंदिर का विस्तार किया गया। मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक सुविधाएँ विकसित की गईं ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सावन मास, महाशिवरात्रि तथा नागद्वारी यात्रा के दौरान यहाँ हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है और यही इस मंदिर की सबसे बड़ी ऐतिहासिक विरासत मानी जाती है। यद्यपि लिखित इतिहास सीमित है, लेकिन जनश्रुतियाँ, स्थानीय आस्था और निरंतर चल रही पूजा-पद्धति इस स्थान को छिंदवाड़ा जिले के प्रमुख शिवधामों में विशेष स्थान प्रदान करती हैं।
अर्धनारीश्वर महादेव मंदिर, मोहगांव (छिंदवाड़ा) — भक्ति का अद्भुत केंद्र
वास्तुकला (Architecture)
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी की वास्तुकला आधुनिक निर्माण शैली और पारंपरिक हिंदू मंदिर स्थापत्य का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है। यह मंदिर किसी विशाल प्राचीन राजसी मंदिर की तरह अत्यधिक अलंकृत नहीं है, बल्कि इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित होने के कारण मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि इसकी धार्मिक गरिमा और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता दोनों सुरक्षित रहें।
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं का स्वागत करता है, जहाँ से प्रवेश करते ही शांत और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होने लगता है। मंदिर का गर्भगृह अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है, जिसके चारों ओर श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। गर्भगृह के बाहर विशाल मंडप बनाया गया है जहाँ भक्त बैठकर भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
मंदिर परिसर खुला और स्वच्छ है। यहाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने की व्यवस्था, परिक्रमा मार्ग तथा पूजा-अर्चना के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। परिसर में अनेक स्थानों पर बेलपत्र, पीपल, बरगद तथा अन्य धार्मिक वृक्ष लगाए गए हैं जो वातावरण को और अधिक पवित्र बनाते हैं।
मंदिर के निर्माण में पत्थर, सीमेंट और आधुनिक निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है, लेकिन इसकी धार्मिक पहचान पूरी तरह पारंपरिक भारतीय मंदिरों जैसी ही दिखाई देती है। मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वज दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता है। आसपास की पहाड़ियाँ और हरियाली इस मंदिर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। प्राकृतिक प्रकाश, मंदिर की घंटियों की ध्वनि और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि प्राकृतिक पर्यटन के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
विशेषताएँ (Key Features)
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी की सबसे बड़ी विशेषता इसका धार्मिक महत्व और प्राकृतिक वातावरण है। सतपुड़ा की हरियाली के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक आनंद दोनों का अनुभव कराता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त स्वयं को शहर की भीड़भाड़ से दूर ईश्वर के अत्यंत निकट महसूस करता है।
इस मंदिर को “पहली पारी” के नाम से जाना जाना इसकी सबसे अनूठी पहचान है। स्थानीय मान्यता के अनुसार चौरागढ़ और नागद्वारी की यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव का पहला आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसलिए यह स्थान धार्मिक यात्रा का शुभ प्रारंभ माना जाता है।
मंदिर परिसर का शांत वातावरण ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है। सुबह और शाम के समय यहाँ होने वाली आरती तथा मंदिर में गूंजते “हर-हर महादेव” के जयघोष भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। सावन मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष सजावट की जाती है जिससे पूरा परिसर अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है।
यहाँ प्राकृतिक हरियाली, स्वच्छ वातावरण और पहाड़ी दृश्य फोटोग्राफी के शौकीनों को भी आकर्षित करते हैं। कई श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ यहाँ कुछ समय ध्यान और योग भी करते हैं।
मंदिर की एक और विशेषता स्थानीय लोगों की सहभागिता है। मंदिर के अधिकांश धार्मिक आयोजन स्थानीय समाज के सहयोग से संपन्न होते हैं, जिससे यहाँ सामुदायिक एकता और धार्मिक संस्कृति का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है।
आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक परंपराएँ और स्थानीय आस्था—इन सभी विशेषताओं का संगम जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी को छिंदवाड़ा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
मंदिर में स्थित देवी-देवता (Deities in the Temple)
मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान हैं।
परिसर में नंदी महाराज की प्रतिमा स्थित है।
स्थानीय आस्था के अनुसार शिव के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।
मंदिर परिसर में देखने योग्य स्थान (Places to See Inside the Temple)
1. मुख्य शिवलिंग (गर्भगृह)
मंदिर का सबसे पवित्र स्थान गर्भगृह है, जहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है। यही मंदिर का प्रमुख आकर्षण है। श्रद्धालु यहाँ जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। सावन और महाशिवरात्रि के समय यहाँ लंबी श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिलती हैं।
2. नंदी महाराज की प्रतिमा
गर्भगृह के सामने स्थापित नंदी महाराज की प्रतिमा भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं और फिर भगवान शिव के दर्शन करते हैं। यह परंपरा यहाँ आने वाले लगभग प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा निभाई जाती है।
3. विशाल पूजा मंडप
मंदिर परिसर में बना विशाल मंडप धार्मिक आयोजनों, भजन-कीर्तन, कथा और सामूहिक पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यही स्थान श्रद्धालुओं से भरा रहता है।
4. परिक्रमा मार्ग
मंदिर के चारों ओर बना परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं को शांत वातावरण में भगवान शिव की परिक्रमा करने का अवसर देता है। मार्ग के दोनों ओर हरियाली और धार्मिक वृक्ष वातावरण को और अधिक पवित्र बनाते हैं।
5. प्राकृतिक हरियाली एवं सतपुड़ा का दृश्य
मंदिर के आसपास फैली हरियाली इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। यहाँ से सतपुड़ा की पहाड़ियों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। सुबह और शाम का समय फोटोग्राफी तथा प्रकृति का आनंद लेने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
6. विश्राम स्थल
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने और विश्राम करने के लिए खुले स्थान उपलब्ध हैं। दूर-दराज से आने वाले यात्री यहाँ कुछ समय रुककर ध्यान, जप और विश्राम करते हैं।
7. पूजा सामग्री की दुकानें
मंदिर के प्रवेश क्षेत्र में स्थानीय दुकानों पर बेलपत्र, फूल, नारियल, अगरबत्ती, प्रसाद तथा अन्य पूजा सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यहाँ से श्रद्धालु अपनी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री खरीद सकते हैं।
यह स्थान प्राकृतिक फोटोग्राफी और आध्यात्मिक अनुभव दोनों के लिए उपयुक्त है।
आरती और भजन (Aarti and Bhajans)
मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है।
सुबह और शाम नियमित आरती होती है।
सावन मास और महाशिवरात्रि पर विशेष भजन-कीर्तन और जागरण आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर में होने वाले त्यौहार और कार्यक्रम (Festivals and Events)
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी में पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। इनमें सबसे प्रमुख पर्व महाशिवरात्रि है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और धार्मिक सजावट से अलंकृत किया जाता है। रात्रि भर भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, चार प्रहर की आराधना और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
सावन मास मंदिर का सबसे व्यस्त समय माना जाता है। विशेषकर सावन के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्तजन जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के दौरान भी यहाँ दर्शन करने आते हैं।
नागपंचमी के अवसर पर भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के लिए स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुँचते हैं।
यदि नागद्वारी यात्रा का समय होता है, तो पहली पारी का महत्व और भी बढ़ जाता है। अनेक श्रद्धालु अपनी यात्रा का शुभारंभ यहीं से करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ते हैं। इस दौरान भंडारे, भजन संध्या, धार्मिक प्रवचन और सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त श्रावण पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या, कार्तिक मास के विशेष सोमवार तथा प्रदोष व्रत जैसे अवसरों पर भी मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है, जिससे मंदिर की धार्मिक परंपराएँ आज भी जीवंत बनी हुई हैं।
मंदिर का समय (Temple Timings)
सुबह लगभग 5:30 बजे से 12:00 बजे तक
शाम लगभग 4:30 बजे से 8:00 बजे तक
त्योहारों के समय मंदिर अधिक देर तक खुला रहता है।
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Attractions)
यदि आप जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी के दर्शन करने आते हैं, तो आसपास स्थित कई प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों की यात्रा भी कर सकते हैं। ये सभी स्थल आपकी यात्रा को और भी यादगार बना देंगे।
1. चौरागढ़ महादेव मंदिर (Chauragarh Mahadev Temple)
चौरागढ़ महादेव सतपुड़ा पर्वतमाला का सबसे प्रसिद्ध शिवधाम है। यह मंदिर अपनी कठिन पैदल चढ़ाई और हजारों त्रिशूलों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि और नागपंचमी के समय लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ट्रैकिंग और धार्मिक यात्रा का अद्भुत अनुभव प्राप्त करने के लिए यह स्थान सर्वोत्तम माना जाता है।
2. नागद्वारी धाम (Nagdwari Dham)
नागद्वारी भगवान शिव और नाग देवता से जुड़ा अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। प्रतिवर्ष नागपंचमी के अवसर पर यहाँ विशाल धार्मिक यात्रा आयोजित होती है।
3. पातालकोट घाटी (Patalkot Valley)
जुन्नारदेव से कुछ दूरी पर स्थित पातालकोट घाटी मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में से एक है। चारों ओर ऊँची पहाड़ियाँ, घने जंगल, दुर्लभ औषधीय वनस्पतियाँ और आदिवासी संस्कृति इस स्थान को विशेष बनाती हैं। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
4. तामिया हिल स्टेशन (Tamia Hill Station)
तामिया सतपुड़ा का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जहाँ से घाटियों और जंगलों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त पर्यटकों को अत्यंत आकर्षित करता है। शांत वातावरण में समय बिताने के लिए यह एक उत्कृष्ट स्थान है।
5. जुन्नारदेव नगर
मंदिर दर्शन के बाद आप जुन्नारदेव नगर में स्थानीय बाजार, भोजनालय और सांस्कृतिक वातावरण का आनंद ले सकते हैं। यहाँ स्थानीय हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
6. सतपुड़ा के प्राकृतिक वन क्षेत्र
मंदिर के आसपास फैले सतपुड़ा के जंगल अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्षा ऋतु में यह पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे यहाँ का दृश्य अत्यंत आकर्षक हो जाता है।
इन सभी स्थानों को मिलाकर एक धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन यात्रा की जा सकती है।
हनुमान मंदिर, सिमरिया, छिंदवाड़ा
ध्यान देने योग्य बातें (Important Guidelines)
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी की यात्रा के दौरान कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रखना आपकी यात्रा को सुरक्षित, सुविधाजनक और सुखद बना सकता है।
- मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय स्वच्छ एवं मर्यादित वस्त्र पहनें।
- भगवान शिव के गर्भगृह में प्रवेश करते समय मंदिर के नियमों का पालन करें।
- पूजा के लिए केवल निर्धारित स्थान पर ही जल, दूध और पूजा सामग्री अर्पित करें।
- परिसर में प्लास्टिक, कूड़ा-कचरा या किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएँ।
- यदि आप सावन, महाशिवरात्रि या नागद्वारी यात्रा के समय दर्शन करने जा रहे हैं, तो भीड़ अधिक होने के कारण सुबह जल्दी पहुँचना बेहतर रहेगा।
- बरसात के मौसम में मंदिर के आसपास का मार्ग फिसलन भरा हो सकता है, इसलिए अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें।
- बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- मंदिर परिसर में ऊँची आवाज़ में बातचीत, मोबाइल पर तेज संगीत या अनुचित व्यवहार से बचें।
- फोटोग्राफी करने से पहले यदि किसी स्थान पर प्रतिबंध हो तो उसका पालन अवश्य करें।
- बंदरों या अन्य वन्य जीवों को भोजन न कराएँ तथा उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- यदि आप समूह में यात्रा कर रहे हैं, तो अपने साथ पीने का पानी, प्राथमिक उपचार सामग्री और आवश्यक दवाइयाँ अवश्य रखें।
- स्थानीय लोगों और मंदिर समिति के निर्देशों का सम्मान करें।
इन बातों का पालन करने से आपकी धार्मिक यात्रा अधिक सुरक्षित और आनंददायक होगी।
मंदिर का पूरा पता (Complete Address)
पहली पारी शिव मंदिर ग्राम – जुन्नारदेव विशाला तहसील – जुन्नारदेव
जिला – छिंदवाड़ा राज्य – मध्य प्रदेश, भारत
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। यदि आप छिंदवाड़ा, नागपुर, बैतूल या पचमढ़ी क्षेत्र की यात्रा पर हैं, तो इस मंदिर तक पहुँचना सुविधाजनक रहता है।
सड़क मार्ग (By Road)
जुन्नारदेव मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, तामिया और नागपुर से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। जुन्नारदेव पहुँचने के बाद स्थानीय ऑटो या निजी वाहन से पहली पारी मंदिर पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग (By Train)
निकटतम रेलवे स्टेशन जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्टेशन नागपुर–छिंदवाड़ा रेलमार्ग पर स्थित है, जहाँ से ऑटो और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।
हवाई मार्ग (By Air)
निकटतम हवाई अड्डा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर है, जो लगभग 140–160 किलोमीटर (मार्ग के अनुसार) की दूरी पर स्थित है। नागपुर से टैक्सी, बस या ट्रेन द्वारा जुन्नारदेव पहुँचा जा सकता है।
यात्रा का सबसे अच्छा समय
जुलाई से मार्च के बीच का समय यहाँ आने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि और नागपंचमी के दौरान मंदिर का धार्मिक वातावरण अत्यंत भव्य होता है। वहीं अक्टूबर से फरवरी के बीच मौसम सुहावना रहता है, जिससे दर्शन के साथ-साथ आसपास के प्राकृतिक स्थलों की यात्रा भी आराम से की जा सकती है।
जुन्नारदेव विशाला की छवियाँ – पहली पारी, छिंदवाड़ा (Images of Junnardeo Vishala – Pehli Payri, Chhindwara)



निष्कर्ष (Conclusion)
जुन्नारदेव विशाला की पहली पारी शिव मंदिर आस्था, प्रकृति और प्राचीन परंपराओं का सुंदर संगम है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव के लिए भी अत्यंत उपयुक्त है। छिंदवाड़ा की यात्रा में इस पवित्र स्थल के दर्शन अवश्य करने चाहिए।
देवगढ़ किला, छिंदवाड़ा (Deogarh Fort / Devgarh Fort, Chhindwara)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी कहाँ स्थित है?
जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
2. पहली पारी नाम क्यों पड़ा?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चौरागढ़ और नागद्वारी की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा की पहली पूजा और विश्राम इसी स्थान पर करते थे। इसी कारण इसे “पहली पारी” कहा जाने लगा।
3. इस मंदिर के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?
मंदिर के मुख्य आराध्य भगवान शिव हैं। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग की प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
4. क्या जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी का कोई प्राचीन इतिहास है?
इस मंदिर के संबंध में कोई प्रमाणित ऐतिहासिक शिलालेख उपलब्ध नहीं है। इसका इतिहास मुख्य रूप से स्थानीय मान्यताओं, लोककथाओं और वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं पर आधारित है।
5. मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
सामान्यतः मंदिर सुबह लगभग 6:00 बजे से दोपहर तक तथा शाम 4:00 बजे से रात लगभग 8:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। विशेष पर्वों पर समय में परिवर्तन हो सकता है।
6. मंदिर में कौन-कौन से प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं?
महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार, नागपंचमी, श्रावण मास, प्रदोष व्रत और अन्य शिव पर्व यहाँ विशेष श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं।
7. क्या सावन में यहाँ अधिक भीड़ रहती है?
हाँ। सावन माह, विशेषकर प्रत्येक सोमवार तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
8. क्या मंदिर में जलाभिषेक किया जा सकता है?
हाँ। श्रद्धालु मंदिर समिति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।
9. क्या मंदिर में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है?
मंदिर के आसपास स्थानीय स्तर पर वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध रहती है। भीड़भाड़ वाले दिनों में निर्धारित पार्किंग स्थल का ही उपयोग करना चाहिए।
10. क्या मंदिर में फोटोग्राफी की जा सकती है?
मंदिर परिसर के खुले क्षेत्रों में सामान्यतः फोटोग्राफी की जा सकती है, लेकिन गर्भगृह या प्रतिबंधित स्थानों पर फोटो लेने से पहले मंदिर प्रशासन की अनुमति अवश्य लें।
11. जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी पहुँचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन सबसे निकट है। वहाँ से ऑटो या टैक्सी द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भी यह स्थान अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
12. मंदिर के आसपास घूमने के लिए कौन-कौन से स्थान हैं?
मंदिर के आसपास चौरागढ़ महादेव, नागद्वारी धाम, पातालकोट घाटी, तामिया हिल स्टेशन और सतपुड़ा के प्राकृतिक वन क्षेत्र प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थल हैं।
13. क्या मंदिर परिवार के साथ घूमने के लिए उपयुक्त है?
हाँ। यह मंदिर परिवार, बुजुर्गों, बच्चों, धार्मिक यात्रियों और प्रकृति प्रेमियों सभी के लिए उपयुक्त स्थान है।
14. क्या मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क लगता है?
नहीं। मंदिर में दर्शन के लिए किसी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। श्रद्धालु अपनी इच्छा से दान या सहयोग कर सकते हैं।
15. जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अक्टूबर से मार्च तक का मौसम यात्रा के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। यदि आप धार्मिक माहौल का अनुभव करना चाहते हैं, तो सावन मास या महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ आ सकते हैं। हालांकि इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है।
16. क्या मंदिर में भंडारे का आयोजन होता है?
विशेष धार्मिक पर्वों, महाशिवरात्रि, सावन और नागद्वारी यात्रा के दौरान स्थानीय समितियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा समय-समय पर भंडारे का आयोजन किया जाता है।
17. क्या यहाँ ध्यान और साधना की जा सकती है?
हाँ। मंदिर का शांत वातावरण ध्यान, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। सुबह का समय इसके लिए सबसे अच्छा रहता है।
18. क्या मंदिर में पूजा सामग्री उपलब्ध होती है?
हाँ। मंदिर के प्रवेश मार्ग पर स्थानीय दुकानों में बेलपत्र, फूल, नारियल, अगरबत्ती, प्रसाद, दूध और अन्य पूजा सामग्री आसानी से मिल जाती है।
19. क्या यह मंदिर नागद्वारी यात्रा से जुड़ा हुआ है?
हाँ। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार पहली पारी का नागद्वारी और चौरागढ़ यात्रा से विशेष संबंध माना जाता है। अनेक श्रद्धालु अपनी यात्रा का शुभारंभ यहीं से करते हैं।
20. जुन्नारदेव विशाला – पहली पारी क्यों प्रसिद्ध है?
यह मंदिर भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था, सतपुड़ा की प्राकृतिक सुंदरता, “पहली पारी” की धार्मिक परंपरा, शांत वातावरण तथा चौरागढ़ और नागद्वारी यात्रा से जुड़े महत्व के कारण छिंदवाड़ा जिले के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है।


