भगवान धन्वंतरि, भगवान विष्णु के दिव्य अवतारों में से एक माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार, जब देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन किया था, तब अमृत कलश के साथ भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इन्हें आयुर्वेद के जनक और चिकित्सा के देवता के रूप में पूजा जाता है।
धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य कहा गया है — जो समस्त जगत के रोगों का नाश करने वाले हैं और स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं जीवन की रक्षा करने वाले हैं। इनका स्वरूप अत्यंत मनोहर है — चार भुजाओं वाले, एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में औषधि, और अन्य दो हाथों में शंख और चक्र धारण किए हुए। वे पीताम्बर वस्त्रधारी होते हैं और उनके गले में पुष्पमाला व आभूषण सुशोभित होते हैं।
भक्तजन भगवान धन्वंतरि का ध्यान करते हुए स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। विशेष रूप से धन्वंतरि मंत्र का जाप करने से रोगों से रक्षा, मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
धन्वंतरि महामंत्र (Dhanvantari Mahamantra):
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, धन्वंतराय अमृत-कलश हस्ताय, सर्व-अमाया विनाशाय, त्रैलोक्य नाथाय धन्वंतरि महा-विष्णवे नमः


