जनकसुता जग जननि जानकी चौपाई श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड से ली गई एक अत्यंत पवित्र चौपाई है। इसमें गोस्वामी तुलसीदास जी माता सीता की वंदना करते हुए उनसे निर्मल बुद्धि, सद्बुद्धि और ईश्वर की कृपा की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस चौपाई का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन में शांति, सकारात्मक विचार और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
जनकसुता जग जननि जानकी चौपाई
जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥
ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ॥
चौपाई का अर्थ
इस चौपाई में गोस्वामी तुलसीदास जी माता सीता को समस्त संसार की जननी और भगवान श्रीराम की परम प्रिय बताते हुए उनके चरण कमलों में प्रणाम करते हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि माता जानकी की कृपा से उन्हें निर्मल, पवित्र और सद्बुद्धि प्राप्त हो, जिससे वे भगवान श्रीराम की महिमा का सही ढंग से वर्णन कर सकें।
जनकसुता जग जननि जानकी चौपाई के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस चौपाई का नियमित एवं श्रद्धापूर्वक पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं—
- माता सीता की कृपा प्राप्त करने की भावना मजबूत होती है।
- मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
- सद्बुद्धि, विवेक और निर्मल विचारों का विकास होता है।
- बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए कई परिवार इस चौपाई का पाठ करवाते हैं।
- भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रति भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है।
- जीवन में धैर्य, विनम्रता और अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
- मानसिक तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में आध्यात्मिक सहारा मिलता है।
ध्यान दें: बच्चों की पढ़ाई में सफलता केवल चौपाई के जप से ही नहीं, बल्कि नियमित अध्ययन, अनुशासन, उचित मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से भी प्राप्त होती है। इस चौपाई का पाठ धार्मिक आस्था के अनुसार सद्बुद्धि और सकारात्मक सोच के लिए किया जाता है।


