
कटनी जिले के बिलहरी गाँव में स्थित कामकंदला किला मध्य भारत के उन विरले पुरातात्विक स्थलों में से है, जहाँ किला, मंदिर, शिल्प, जल संरचना और प्राकृतिक शांति एक ही परिसर में अनुभव की जा सकती है। यह स्थल कटनी शहर से लगभग 15 किमी तथा जबलपुर से लगभग 130–140 किमी दूर है, इसलिए दोनों प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ पहुँचना सरल है। बिलहरी का प्राचीन नाम पुष्पावती माना जाता है, जो 10वीं सदी में एक विकसित धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र रहा। इसी कारण कामकंदला परिसर को केवल “किला” कहना इसके महत्व को सीमित कर देता है; यह वास्तव में एक योजनाबद्ध किले-मंदिर परिसर रहा होगा।
यहाँ प्रवेश करते ही बिखरे शिलाखंड, नक्काशीदार पत्थर, मंदिर अवशेष और सीढ़ीनुमा बावड़ी उस काल की उन्नत स्थापत्य समझ का संकेत देते हैं। वातावरण में एक गहरी शांति है, जो इतिहास के साथ समय बिताने का अवसर देती है। भीड़भाड़ से दूर होने के कारण यह स्थल शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों, इतिहास प्रेमियों और शांत यात्राओं के शौकीनों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। स्थानीय लोगों के बीच यह स्थान श्रद्धा का भी केंद्र है, क्योंकि परिसर में स्थित हनुमान प्रतिमा और शिव मंदिर आज भी आस्था से जुड़े हुए हैं।
कामकंदला की विशेषता यह है कि यहाँ बिना किसी टिकट, बिना किसी कृत्रिम विकास के, आप हजार वर्ष पुराने अवशेषों के बीच स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं। हर पत्थर, हर दीवार का अवशेष मानो किसी बीते युग की कहानी कहता है। प्राकृतिक हरियाली, खुला आकाश और ऐतिहासिक साक्ष्य—इन तीनों का संगम इस स्थान को अनूठा बनाता है। यही कारण है कि कामकंदला किला बिलहरी क्षेत्र की पहचान बन चुका है और धीरे-धीरे इतिहास प्रेमियों के मानचित्र पर अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
इतिहास (History)

कामकंदला परिसर का इतिहास लगभग 10वीं सदी (लगभग 945 AD) से जोड़ा जाता है, जब मध्य भारत में कलचुरी वंश का प्रभाव था। कलचुरी शासकों ने 9वीं से 12वीं सदी के बीच अनेक मंदिरों, जल संरचनाओं और स्थापत्य कृतियों का निर्माण कराया। बिलहरी, जिसका प्राचीन नाम पुष्पावती माना जाता है, उस समय एक समृद्ध बस्ती और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा। यहाँ पाए गए शिलालेखों और स्थापत्य शैली के आधार पर इतिहासकार इस परिसर को कलचुरी कालीन मानते हैं।
विशेष रूप से राजा युवराजदेव प्रथम और लक्ष्मणराज द्वितीय के समय इस क्षेत्र के विकास के संकेत मिलते हैं। उस काल में त्रिपुरी (तेवर, जबलपुर के पास) कलचुरी शासकों की राजधानी थी, और बिलहरी उसी प्रभाव क्षेत्र में आता था। कामकंदला में मंदिर, निवासीय संरचनाएँ और जल संरक्षण की बावड़ी एक साथ मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह केवल सैन्य किला नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित सांस्कृतिक-धार्मिक परिसर था।
स्थानीय परंपराओं में इसे “तपसी मठ” भी कहा जाता है, जिससे अनुमान लगता है कि यहाँ साधु-संतों का निवास और आध्यात्मिक गतिविधियाँ भी होती रही होंगी। समय के साथ प्राकृतिक क्षरण, उपेक्षा और संरक्षण के अभाव में अधिकांश संरचनाएँ खंडहर में बदल गईं, परंतु जो अवशेष बचे हैं वे उस काल की भव्यता का जीवंत प्रमाण देते हैं। पत्थरों पर की गई नक्काशी, मूर्तिकला और शिल्प आज भी स्पष्ट दिखाई देते हैं, जो कलचुरी युग की कला-दृष्टि और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं।
विशेषताएँ (Unique Features)
कामकंदला की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहु-आयामी स्वरूप है। यहाँ किले के अवशेष, प्राचीन शिव मंदिर, हनुमान प्रतिमा और सीढ़ीनुमा बावड़ी एक ही परिसर में मिलते हैं। यह संयोजन दर्शाता है कि उस समय सुरक्षा, धर्म और जल प्रबंधन—तीनों को साथ लेकर योजनाबद्ध निर्माण किया गया था। शिव मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर बारीक नक्काशी, पुष्प अलंकरण और ज्यामितीय आकृतियाँ उस काल की उच्च शिल्पकला का प्रमाण हैं।
प्रवेश क्षेत्र के पास स्थित हनुमान प्रतिमा स्थानीय आस्था का केंद्र है। यहाँ आने वाले ग्रामीण आज भी पूजा करते हैं, जिससे यह स्थान जीवंत बना हुआ है। परिसर की बावड़ी विशेष ध्यान आकर्षित करती है। सीढ़ियों के माध्यम से नीचे उतरती यह जल संरचना आज भी पानी संजोए हुए है, जो प्राचीन इंजीनियरिंग की समझ को दर्शाती है।

चारों ओर बिखरे शिलाखंडों पर देवी-देवताओं की आकृतियाँ दिखाई देती हैं, जो संकेत देती हैं कि कभी यहाँ अनेक मंदिर या मंडप रहे होंगे। प्राकृतिक हरियाली, खुला परिसर और शांति इस स्थल को ध्यान, फोटोग्राफी और अध्ययन के लिए आदर्श बनाते हैं। यह स्थान किसी विकसित पर्यटन स्थल जैसा नहीं, बल्कि एक खुले पुरातात्विक संग्रहालय जैसा प्रतीत होता है।
किले के अंदर देखने योग्य स्थल (Things to See Inside the Fort Complex)
प्राचीन शिव मंदिर — यह परिसर का केंद्र बिंदु है। नक्काशीदार स्तंभ, गर्भगृह की संरचना और पत्थरों की कलात्मक सज्जा कलचुरी शैली को स्पष्ट करती है।
हनुमान प्रतिमा — प्रवेश के पास स्थित यह प्रतिमा स्थानीय श्रद्धा और संरक्षण का प्रतीक है।
सीढ़ीनुमा बावड़ी — जल संरक्षण की प्राचीन तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण, जहाँ आज भी जल दिखाई देता है।
शिलालेख व शिलाखंड — बिखरे पत्थरों पर उकेरी आकृतियाँ इतिहास की कहानी कहती हैं।
दीवारों के अवशेष — संकेत देते हैं कि कभी यहाँ मजबूत संरचनाएँ और प्राचीर रही होंगी।
प्राकृतिक शांति — हरियाली और खुला वातावरण इस स्थल को विशिष्ट बनाता है।
आस-पास देखने योग्य प्रमुख स्थल (Nearby Places to Visit)
1. विष्णु वराह मंदिर, बिलहरी
कामकंदला परिसर से बहुत कम दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर 11वीं सदी की उत्कृष्ट कलचुरी शिल्पकला का उदाहरण माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु के वराह अवतार की भव्य आकृति पत्थर पर उकेरी गई है, जिसमें सूक्ष्म नक्काशी, अलंकरण और पौराणिक दृश्य स्पष्ट दिखाई देते हैं। मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर पुष्प डिज़ाइन तथा ज्यामितीय पैटर्न देखने योग्य हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह स्थल विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहाँ की मूर्तिकला कामकंदला परिसर की कला शैली से साम्य रखती है। सुबह के समय यहाँ का शांत वातावरण फोटोग्राफी और अध्ययन के लिए आदर्श रहता है।
2. श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, बिलहरी
यह जैन तीर्थ प्राचीनता और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में स्थापित पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा अत्यंत आकर्षक है। यहाँ साफ-सफाई, शांत वातावरण और अनुशासित व्यवस्था देखने को मिलती है। श्रद्धालुओं के साथ-साथ सामान्य पर्यटक भी यहाँ की स्थापत्य सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल का अनुभव कर सकते हैं। जैन कला और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान महत्वपूर्ण पड़ाव है।
3. लक्ष्मण सागर तालाब (Laxman Sagar Tank)
यह ऐतिहासिक जलाशय प्राचीन जल प्रबंधन का सुंदर उदाहरण है। बड़े क्षेत्र में फैला यह तालाब ग्रामीण परिवेश और प्राकृतिक शांति प्रदान करता है। पक्षियों की आवाज़, खुले आकाश का प्रतिबिंब और शांत जल इसे विश्राम व प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त बनाते हैं। स्थानीय लोग यहाँ सुबह-शाम टहलने भी आते हैं।
4. विजयराघवगढ़ किला
कटनी जिले की पहाड़ियों पर स्थित यह किला 19वीं सदी के इतिहास से जुड़ा है। ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ से आसपास के क्षेत्र का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है। प्राचीर, द्वार और खंडहर संरचनाएँ इतिहास की झलक देती हैं। सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक होता है।
5. बहुरीबंद
बहुरीबंद अपने प्राचीन जैन अवशेषों और विशाल शिलालेख के लिए जाना जाता है। यहाँ की प्राचीन प्रतिमा और शिल्पकला मध्यकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है। शांत वातावरण इसे अध्ययन और भ्रमण दोनों के लिए उपयुक्त बनाता है।
6. रूपनाथ धाम
प्राकृतिक चट्टानों के बीच स्थित यह धाम एक जलकुंड और शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। वर्षा ऋतु में यहाँ की हरियाली और जलधारा अत्यंत सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है। यह स्थान प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है।
7. खुसरा घाटी (Khusra Valley)
हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक पगडंडियों वाली यह घाटी ट्रैकिंग और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त है। बरसात के समय यहाँ की हरियाली और झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान खास है।
टी4 वाटर पार्क, जोहला, कटनी (T4 Water Park, Johla, Katni)
8. एकांत वन क्षेत्र (Ekant Forest Area)
कामकंदला और बिलहरी के आसपास फैले वन क्षेत्र शांति, ताज़ी हवा और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कराते हैं। यहाँ पक्षियों की चहचहाहट और पेड़ों की छाया में समय बिताना सुकून देता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र आदर्श है।
समय, प्रवेश शुल्क, सावधानियाँ (Timing, Entry & Tips)
यह एक खुला पुरातात्विक स्थल है। सामान्यतः सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक भ्रमण उपयुक्त रहता है। प्रवेश निःशुल्क है। दोपहर की गर्मी से बचें, वर्षा में फिसलन से सावधान रहें, पानी साथ रखें और मजबूत जूते पहनें।
पूरा पता और यात्रा मार्ग (Full Address and Travel Guide – स्पष्ट और विस्तृत विवरण)
पूरा पता (Full Address)
कामकंदला किला (Kamakandla Fort) स्थित है:
Bilhari Village, Rithi Tehsil, Katni District, Madhya Pradesh – 483501, India.
पीर बाबा दरगाह, कटनी (Peer Baba Dargah Katni) – आस्था, एकता और आध्यात्मिक शांति का केंद्र
यह स्थान कटनी जिले के एक ग्रामीण इलाके में स्थित है, जो ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिलहरी गांव कामकंदला किले के लिए बुनियादी पहुँच बिंदु है, और यहाँ से सड़कों द्वारा किले तक पहुँचना सहज है।
कैसे पहुंचे (How to Reach)
कामकंदला किला तक यात्रा के लिए आप ट्रेन, बस, टैक्सी, कार/बाइक आदि का उपयोग कर सकते हैं। नीचे इसे चरणबद्ध तरीके से समझाया गया है:
① रेल मार्ग (By Train)
- निकटतम रेलवे स्टेशन:
Majhgawan PH Railway Station – लगभग 7–8 किमी
यह स्टेशन छोटा है लेकिन कामकंदला किले के सबसे नजदीकी रेलवे कनेक्शन के रूप में कार्य करता है। - बड़ा रेलवे कनेक्शन:
Katni Junction Railway Station – लगभग 15 किमी
कटनी जंक्शन मध्य भारत का प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जहाँ से देशभर के बड़े शहरों से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, कटनी (Dakshin Mukhi Hanuman Mandir, Katni)
ट्रेन से आने के बाद यात्रा:
– Majhgawan या Katni स्टेशन से आप टैक्सी/ऑटो/इंडिया का लोकल वाहन (e-rickshaw/tempo) किराये पर लेकर आसानी से बिलहरी गाँव पहुँच सकते हैं।
– स्टेशन से किले तक सड़क मार्ग लगभग 15–20 मिनट का सफर है।
② सड़क मार्ग (By Road)
- कटनी से:
कामकंदला किला बिलहरी गाँव से लगभग 15 किमी की दूरी पर है।
आप निजी कार, टैक्सी, बैक / बाइक से आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।
सतत सड़कों का नेटवर्क कामकंदला किले तक जाता है, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।
सड़कों पर पर्याप्त दिशा संकेत (signboards) मौजूद हैं, जिससे मार्ग सरल हो जाता है। - जबलपुर से:
जबलपुर से कटनी लगभग 130–140 किमी की दूरी पर है, जिसे सड़क मार्ग से लगभग 3–4 घंटे में तय किया जा सकता है।
जबलपुर से सड़क मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग से कटनी पहुँचकर उसके पश्चात बिलहरी-कामकंदला की दिशा में मार्ग अपनाना होता है। - अन्य नज़दीकी शहर:
– Rewa: लगभग 140–150 किमी
– Satna: लगभग 150–160 किमी
बस सेवा:
सितंबर से अप्रैल तक नियमित राज्य-स्तरीय बसें कटनी और बिलहरी क्षेत्र के आसपास उपलब्ध होती हैं।
कटनी बस स्टैंड से आप लोकल बस / टैक्सी के माध्यम से बिलहरी गाँव पहुँच सकते हैं।
माँ जालपा देवी मंदिर, कटनी हिंदी में (Maa Jalpa Devi Temple, Katni in Hindi)
③ वायु मार्ग (By Air)
निकटतम एयरपोर्ट:
– Jabalpur Airport (JLR) – लगभग 135–145 किमी
जबलपुर एयरपोर्ट से कामकंदला तक की सड़क यात्रा सबसे सुविधाजनक और सीधी है। एयरपोर्ट से टैक्सी/कार किराये पर लेकर सीधे कामकंदला के मार्ग पर निकल सकते हैं।
स्थानीय मार्गदर्शन (Local Directions / Wayfinding)
– कटनी/मज़गवां स्टेशन से व्हीकल किराये पर लेते समय “Bilhari Village / Kamakandla Fort” कहें—अधिकांश दुकानदार और चालक इस ऐतिहासिक स्थल को जानते हैं।
– गाँव पहुँचकर अंदर की ओर संकेत मिलते हैं; स्थानीय मार्गदर्शक या ग्रामीणों से मार्ग पूछना आसान है।
यात्रा सलाह (Travel Tips)
• सड़कें ग्रामीण इलाकों वाली हैं—सुबह या दिन के उजाले में यात्रा करना बेहतर।
• बारिश के मौसम में कुछ मार्ग थोड़े कठिन हो सकते हैं—तो ऑफ-रोड वाहन या बाइक का उपयोग करते समय सतर्क रहें।
• मोबाइल नेटवर्क कुछ इलाकों में कमजोर हो सकता है—गलत मार्ग से बचने के लिए offline map/Google Maps offline route तैयार कर लें।
• आरामदायक जूते पहनें और पानी साथ रखें।
कामकंदला किला अपनी ऐतिहासिक महत्ता, शांत वातावरण और आसपास के दर्शनीय स्थलों के कारण एक अद्वितीय यात्रा अनुभव प्रदान करता है। यहां पहुँचकर आप न केवल प्राचीन स्थापत्य कला का अध्ययन कर सकते हैं बल्कि स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकते हैं।
कमकंदला किले, बिलहारी, कटनी (मध्य प्रदेश) की तस्वीर। (Photo of Kamkandla Fort, Bilhari, Katni (M.P.))


















