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tourist places in india in Hindi राजगढ़ के बेहतरीन पर्यटन स्थल (Top Tourist Places in Rajgarh You Must Visit)

मोहनपुरा और कुंडालिया बांध — राजगढ़, मध्य प्रदेश (Mohanpura & Kundaliya Dams — Rajgarh, Madhya Pradesh)

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मध्य प्रदेश का राजगढ़ जिला आज जिन बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के कारण चर्चा में है, उनमें Mohanpura Dam और Kundaliya Dam का नाम सबसे प्रमुख है। ये दोनों बांध केवल पानी रोकने वाली संरचनाएँ नहीं, बल्कि सूखा-प्रभावित क्षेत्र की किस्मत बदलने वाली जीवनरेखा हैं। हरियाली, विशाल जलराशि, शांत वातावरण और आधुनिक इंजीनियरिंग—ये सब मिलकर इस स्थान को एक अनोखा अनुभव बनाते हैं। बरसात के मौसम में जब जलस्तर बढ़ता है और गेट खोले जाते हैं, तब यहाँ का दृश्य किसी प्राकृतिक झरने से कम नहीं लगता।

राजगढ़ मुख्यालय से कम दूरी पर स्थित ये दोनों स्थल अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। इन बांधों के आसपास फैला ग्रामीण परिदृश्य, खेतों की हरियाली और खुला आसमान एक अलग ही शांति प्रदान करता है। यहाँ आकर आप समझ पाते हैं कि किस तरह एक जल परियोजना पूरे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक जीवन को बदल सकती है। यही कारण है कि मोहनपुरा और कुंडालिया बांध आज पर्यटन, तकनीक और ग्रामीण विकास—तीनों के संगम स्थल के रूप में पहचाने जाते हैं।

भेसवामाता (बीजासन माता) मंदिर – सारंगपुर, राजगढ़ (Bheswa Mata / Bijasan Mata Temple – Sarangpur, Rajgarh)

परिचय (Introduction)

Rajgarh जिला लंबे समय तक कम वर्षा और जल संकट की समस्या से जूझता रहा। खेती वर्षा पर निर्भर थी, जिससे किसानों को अस्थिर आय और अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ता था। इसी पृष्ठभूमि में मोहनपुरा और कुंडालिया जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ अस्तित्व में आईं। इन बांधों का उद्देश्य केवल जल संग्रहण नहीं, बल्कि प्रेशराइज्ड पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक नियंत्रित और प्रभावी तरीके से पानी पहुँचाना था।

मोहनपुरा बांध Newaza River पर निर्मित है, जबकि कुंडालिया बांध Kalisindh River पर स्थित है। दोनों परियोजनाएँ मिलकर सैकड़ों गाँवों की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देती हैं। इनसे जुड़े पाइपलाइन नेटवर्क के कारण पानी की बर्बादी कम होती है और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलता है। परिणामस्वरूप कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो पाया है।

आज ये बांध केवल किसानों के लिए वरदान नहीं, बल्कि एक शांत प्राकृतिक स्थल के रूप में भी उभर रहे हैं, जहाँ लोग सैर, पिकनिक और प्रकृति का आनंद लेने आते हैं।

इतिहास और उद्देश्य (History & Purpose)

mohanpura dams rajgarh mp

मोहनपुरा और कुंडालिया परियोजनाओं की परिकल्पना उस समय की गई जब राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट एक बड़ी समस्या था। राज्य सरकार ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में इन बांधों की योजना बनाई। आधुनिक इंजीनियरिंग और माइक्रो-इरिगेशन सोच के साथ इनका निर्माण 2010 के दशक में शुरू हुआ और कुछ वर्षों में ये आकार लेने लगे।

मोहनपुरा बांध को विशेष रूप से देश की शुरुआती प्रेशराइज्ड इरिगेशन परियोजनाओं में गिना जाता है। यहाँ से पानी नहरों से नहीं, बल्कि पाइपलाइन के दबाव से खेतों तक पहुँचता है। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि जमीन की नमी भी संतुलित रहती है। कुंडालिया परियोजना भी इसी सोच के साथ विकसित की गई, ताकि बड़े क्षेत्र में नियंत्रित सिंचाई संभव हो सके।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सैकड़ों गाँवों में खेती का स्वरूप बदला। पहले जहाँ एक फसल मुश्किल से होती थी, अब वहाँ दो से तीन फसलें उगाई जा रही हैं। किसानों की आय बढ़ी, रोजगार के अवसर बढ़े, और ग्रामीण जीवन में स्थिरता आई। यही इतिहास इन बांधों को केवल संरचना नहीं, बल्कि विकास की कहानी बनाता है।

नरसिंहगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (चिड़ीखोह), राजगढ़ (Narsinghgarh Wildlife Sanctuary – Chidikhoh, Rajgarh)

kundaliya dams rajgarh

विशेषताएँ (Key Features)

मोहनपुरा और कुंडालिया बांधों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी दबावयुक्त सिंचाई प्रणाली है। पारंपरिक नहरों की जगह पाइपलाइन नेटवर्क का उपयोग किया गया है, जिससे पानी सीधे खेतों तक पहुँचता है। इससे वाष्पीकरण और रिसाव में कमी आती है।

दूसरी प्रमुख विशेषता इनका विशाल कमांड एरिया है। हजारों हेक्टेयर भूमि इनसे सिंचित होती है। माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों को अपनाने से जल संरक्षण और उत्पादन वृद्धि साथ-साथ संभव हुई है।

तीसरी विशेषता इनका प्राकृतिक परिवेश है। विशाल जलाशय, दूर तक फैली हरियाली और शांत वातावरण इसे एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल का रूप देते हैं। विशेषकर मानसून में यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

श्री अंजनीलाल मंदिर धाम, ब्यावरा (Shri Anjanilal Temple Dham, Biaora)

यहाँ देखने योग्य स्थान और दृश्य (Things to See On Site)

  • बांध की ऊँचाई से दिखाई देता जलाशय
  • गेट्स से बहता प्रचंड जल प्रवाह (बरसात में)
  • आसपास की हरियाली और ग्रामीण दृश्य
  • सूर्यास्त और सूर्योदय के मनमोहक दृश्य
  • पक्षियों की आवाजाही (विशेषकर सुबह के समय)

समय और एंट्री टिकट (Timings & Entry Fee)

  • समय: प्रातः लगभग 6 बजे से शाम 6 बजे तक भ्रमण उपयुक्त
  • एंट्री टिकट: कोई शुल्क नहीं (खुला सार्वजनिक स्थल)
  • बरसात के समय सुरक्षा कारणों से कुछ क्षेत्रों में प्रवेश सीमित हो सकता है

खोयरी महादेव मंदिर, राजगढ़ (Khoyri Mahadev Temple, Rajgarh)

पूरा पता (Full Address)

मोहनपुरा बांध: नेवाज नदी तट, राजगढ़ जिला, मध्य प्रदेश, पिन कोड 465661 के आसपास
कुंडालिया बांध: जीरापुर मार्ग, राजगढ़ जिला, मध्य प्रदेश

कैसे पहुँचे? (How to Reach)

  • राजगढ़ शहर से मोहनपुरा बांध लगभग 8 किमी दूरी पर
  • कुंडालिया बांध राजगढ़ से लगभग 50–55 किमी (जीरापुर रूट)
  • नज़दीकी रेलवे स्टेशन: Biaora
  • नज़दीकी हवाई अड्डा: Bhopal

सड़क मार्ग से निजी वाहन या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

श्यामजी साँका मंदिर, नरसिंहगढ़ (Shyamji Sanka Temple, Narsinghgarh)

आसपास घूमने योग्य स्थान (Nearby Attractions)

नरसिंहगढ़ (Narsinghgarh)
Narsinghgarh एक ऐतिहासिक नगर है, जो अपने किले, तालाब और मंदिरों के लिए जाना जाता है।

ब्यावरा (Biaora)
Biaora नजदीकी कस्बा है जहाँ से आवागमन और आवश्यक सुविधाएँ आसानी से मिल जाती हैं।

ध्यान देने योग्य बातें (Important Tips)

बरसात में जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए किनारों पर सावधानी रखें।
परिवार के साथ पिकनिक के लिए उपयुक्त है, लेकिन सुरक्षा का ध्यान रखें।
सुबह और शाम का समय फोटोग्राफी के लिए श्रेष्ठ है।

नरसिंहगढ़ किला (Narsinghgarh Fort), मध्य प्रदेश

मोहनपुरा और कुंडलिया बांधों की छवियां – राजगढ़, मध्य प्रदेश (Images of Mohanpura & Kundaliya Dams — Rajgarh, Madhya Pradesh)

पूर्ण ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)

यदि आप प्रकृति, इंजीनियरिंग और शांति का संगम एक ही स्थान पर देखना चाहते हैं, तो मोहनपुरा और कुंडालिया बांध की यात्रा अवश्य करें। सुबह जल्दी पहुँचें, बांध के ऊपरी हिस्से से दृश्य देखें, फोटोग्राफी करें, और आसपास के ग्रामीण वातावरण का आनंद लें। मानसून के दिनों में यह स्थान किसी झरने या जलप्रपात से कम नहीं लगता।

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