यह मंत्र भगवान गणेश भगवान की स्तुति में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ गाया जाता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है, जिनकी कृपा से जीवन के सभी कार्य सफल होते हैं। इस मंत्र में उन्हें गौरी नंदन और शंभू सुत के रूप में प्रणाम करते हुए उनसे विघ्नों और दुखों को दूर करने की प्रार्थना की गई है।
मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जप करने से जीवन में आने वाली सभी विघ्नों और समस्याओं का नाश होता है, और व्यक्ति को सफलता, शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का उच्चारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और हर कार्य में मंगल परिणाम प्राप्त होते हैं।
मंत्र (Mantra):
हे गौरी नंदन तुमको वंदन… शंभू सुत गणनायकम्।
विघ्न हारक दुःख निवारक… गणपति प्रथमेश्वरम्॥
मंत्र का महत्व (importance of mantra)
- किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है
- यह मंत्र जीवन के विघ्न (रुकावटों) को दूर करने में सहायक माना जाता है
- घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा लाता है
- मन में शांति और एकाग्रता बढ़ाता है
कब और कैसे जप करें? (When and how to chant?)
- सुबह पूजा के समय या किसी कार्य की शुरुआत से पहले
- 11, 21 या 108 बार जप करना शुभ माना जाता है
- गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर श्रद्धा से जप करें
विशेष लाभ (Special benefits)
- कार्यों में सफलता और सिद्धि
- बाधाओं और रुकावटों से मुक्ति
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास
- सुख-समृद्धि में वृद्धि


