
छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, झरनों और आदिवासी संस्कृति के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इसी बस्तर क्षेत्र के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता। जगदलपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित यह जलप्रपात अपनी बहु-स्तरीय जलधारा, दूध जैसी सफेद गिरती पानी की धाराओं और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को पहली ही नजर में आकर्षित कर लेता है। जब ऊँची चट्टानों से पानी कई परतों में नीचे गिरता है, तब उसका दृश्य इतना आकर्षक दिखाई देता है कि पर्यटक लंबे समय तक उसे निहारते रह जाते हैं।
तीरथगढ़ जलप्रपात कांगेर नदी की सहायक धारा पर बना हुआ है और इसकी ऊँचाई लगभग 300 फीट के आसपास मानी जाती है। यह जलप्रपात किसी एक सीधी धारा के रूप में नहीं गिरता, बल्कि सीढ़ीनुमा चट्टानों से कई भागों में बंटकर नीचे आता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जो इसे भारत के अन्य झरनों से अलग बनाती है। मानसून के मौसम में यहाँ पानी का प्रवाह बहुत अधिक बढ़ जाता है और पूरा क्षेत्र सफेद धुंध और पानी की फुहारों से भर जाता है। वहीं सर्दियों में यहाँ का वातावरण बेहद शांत, ठंडा और घूमने के लिए अनुकूल हो जाता है।
यह स्थान केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान राम अपने वनवास काल के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। इसी कारण यहाँ के कुछ जलकुंडों को राम कुंड और सीता कुंड के नाम से जाना जाता है। आज यह स्थान परिवार, कपल, फोटोग्राफर, ट्रैवल ब्लॉगर और एडवेंचर प्रेमियों के लिए बस्तर का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल बन चुका है। प्रकृति की गोद में शांति और रोमांच का अनुभव करने के लिए तीरथगढ़ जलप्रपात एक परफेक्ट डेस्टिनेशन माना जाता है।
मानव विज्ञान संग्रहालय, जगदलपुर (Anthropological Museum, Jagdalpur)
इतिहास (History)

तीरथगढ़ जलप्रपात का निर्माण प्राकृतिक भूगर्भीय घटनाओं से हुआ माना जाता है। माना जाता है कि हजारों वर्ष पहले किसी भूकंपीय गतिविधि के कारण नदी के किनारे की चट्टानें टूटकर नीचे धंस गईं और इससे सीढ़ी जैसी घाटी बन गई, जिसने इस सुंदर जलप्रपात का रूप ले लिया।
तीरथगढ़ जलप्रपात का इतिहास बस्तर क्षेत्र की प्राचीन प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। यह जलप्रपात सदियों से स्थानीय आदिवासी समुदायों की आस्था और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण लंबे समय तक यह स्थान बाहरी दुनिया से लगभग छिपा रहा। बस्तर की जनजातियाँ इस स्थान को पवित्र मानती थीं और यहाँ प्रकृति पूजा से जुड़े कई पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते थे। जंगल, जलधारा और पहाड़ियों को यहाँ की जनजातीय संस्कृति में देवी-देवताओं का स्वरूप माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार तीरथगढ़ का संबंध रामायण काल से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अपने वनवास के दौरान बस्तर क्षेत्र से होकर गुजरे थे। इसी वजह से यहाँ मौजूद कुछ प्राकृतिक जलकुंडों को राम कुंड और सीता कुंड कहा जाता है। “तीरथगढ़” नाम भी इसी धार्मिक महत्व से जुड़ा माना जाता है। “तीरथ” शब्द का अर्थ पवित्र स्थान या धार्मिक स्थल होता है, इसलिए यह स्थान धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के बीच भी लोकप्रिय है।
आधुनिक समय में इस जलप्रपात को पहचान तब मिली जब कांगेर घाटी क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। इसके बाद यहाँ पर्यटन गतिविधियों का विकास शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह स्थान देशभर के पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध होने लगा। पहले यहाँ पहुँचना काफी कठिन माना जाता था क्योंकि जंगलों के बीच सड़क और सुविधाएँ सीमित थीं, लेकिन अब सड़क मार्ग बेहतर होने के कारण यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
तीरथगढ़ जलप्रपात केवल एक प्राकृतिक झरना नहीं है, बल्कि यह बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी है। यहाँ की चट्टानें, जंगल, बहती जलधारा और आसपास का वातावरण सदियों पुरानी प्राकृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं। आज यह स्थान छत्तीसगढ़ पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बन चुका है और हर साल हजारों लोग इसकी सुंदरता देखने के लिए यहाँ पहुँचते हैं। इतिहास, प्रकृति और आस्था का ऐसा संगम बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलता है।
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, भगवान राम, सीता और लक्ष्मण अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। यहां स्थित सीता कुंड और राम कुंड को उसी कथा से जोड़ा जाता है, इसलिए यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीरथगढ़ जलप्रपात की विशेषताएँ (Special Features)
तीरथगढ़ जलप्रपात की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहु-स्तरीय संरचना है। सामान्य झरनों की तरह यहाँ पानी एक सीधी धारा में नहीं गिरता, बल्कि सीढ़ीनुमा चट्टानों से टकराते हुए कई धाराओं में नीचे आता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे सफेद दूध की कई धाराएँ पहाड़ से नीचे बह रही हों। यही कारण है कि इसे कई लोग “मिल्की वाटरफॉल” भी कहते हैं। इसकी प्राकृतिक संरचना इसे भारत के सबसे खूबसूरत झरनों में शामिल करती है।
यह जलप्रपात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है, जिसके कारण यहाँ का वातावरण पूरी तरह प्राकृतिक और प्रदूषण मुक्त रहता है। चारों ओर घने जंगल, ऊँचे पेड़, चट्टानें और पक्षियों की आवाजें इस स्थान को बेहद शांत और आकर्षक बनाती हैं। मानसून के दौरान जब पानी का बहाव तेज होता है, तब यह झरना अपने सबसे विशाल और रोमांचक रूप में दिखाई देता है। पानी की तेज आवाज और उससे उठती धुंध पूरे वातावरण को रहस्यमयी बना देती है।
तीरथगढ़ जलप्रपात की एक और खास बात यह है कि पर्यटक यहाँ नीचे तक जाकर झरने को बेहद करीब से देख सकते हैं। नीचे पहुँचने के लिए पत्थरों और सीढ़ियों का रास्ता बनाया गया है। नीचे पहुँचते ही ठंडी फुहारें और बहते पानी की आवाज मन को पूरी तरह ताजगी से भर देती है। यहाँ कई व्यू पॉइंट भी बने हुए हैं जहाँ से पूरे जलप्रपात का शानदार दृश्य दिखाई देता है।
यह स्थान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। मानसून में झरने के आसपास बनने वाली धुंध और हरियाली तस्वीरों को और भी खूबसूरत बना देती है। कई ट्रैवल ब्लॉगर और नेचर फोटोग्राफर यहाँ विशेष रूप से फोटो शूट के लिए आते हैं।
तीरथगढ़ केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ जैव विविधता भी काफी समृद्ध है। आसपास के जंगलों में कई प्रकार के पक्षी, तितलियाँ और वन्यजीव पाए जाते हैं। प्रकृति, रोमांच और शांति का ऐसा संगम तीरथगढ़ जलप्रपात को बस्तर का सबसे अनोखा पर्यटन स्थल बनाता है।
दलपत सागर झील, जगदलपुर छत्तीसगढ़ (Dalpat Sagar, Lake Jagdalpur Chhattisgarh)
यहां देखने लायक चीजें (Things to See Here)

तीरथगढ़ जलप्रपात केवल एक झरना नहीं बल्कि कई प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों का संगम है।
मुख्य बहु-स्तरीय जलप्रपात – तीरथगढ़ का मुख्य आकर्षण इसका विशाल बहु-स्तरीय झरना है। ऊँची चट्टानों से कई स्तरों में गिरता पानी ऐसा दृश्य बनाता है जिसे देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मानसून के समय यह दृश्य और भी रोमांचक दिखाई देता है क्योंकि पानी का बहाव कई गुना बढ़ जाता है।
प्राकृतिक जलकुंड – झरने के नीचे प्राकृतिक रूप से बने जलकुंड पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ गिरता पानी छोटे-छोटे तालाब जैसा दृश्य बनाता है। ठंडी फुहारों के बीच खड़े होकर प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेना बेहद यादगार अनुभव होता है।
पत्थरों से बनी सीढ़ियाँ – नीचे तक पहुँचने के लिए पत्थरों और सीमेंट की सीढ़ियाँ बनाई गई हैं। इन रास्तों से उतरते समय पर्यटक अलग-अलग कोणों से झरने की खूबसूरती देख सकते हैं। रास्ते में कई प्राकृतिक दृश्य दिखाई देते हैं जो ट्रैकिंग जैसा अनुभव देते हैं।
व्यू पॉइंट्स – जलप्रपात के आसपास कई व्यू पॉइंट बनाए गए हैं जहाँ से पूरा झरना बेहद शानदार दिखाई देता है। इन स्थानों से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य देखने का अलग ही आनंद मिलता है।
राम कुंड और सीता कुंड – धार्मिक मान्यताओं से जुड़े ये प्राकृतिक कुंड पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। स्थानीय लोग इन्हें पवित्र स्थान मानते हैं और यहाँ श्रद्धा के साथ आते हैं।
कांगेर घाटी का जंगल क्षेत्र – झरने के आसपास फैले घने जंगल इस स्थान को और आकर्षक बनाते हैं। यहाँ कई दुर्लभ पक्षी और तितलियाँ देखने को मिलती हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र बेहद खास अनुभव देता है।
फोटोग्राफी स्पॉट – यहाँ कई ऐसी जगहें हैं जहाँ से झरने और जंगल का शानदार दृश्य दिखाई देता है। ट्रैवल फोटोग्राफर और सोशल मीडिया क्रिएटर इन स्थानों पर विशेष रूप से फोटो और वीडियो शूट करते हैं।
प्राकृतिक चट्टानें और धुंध – झरने के आसपास मौजूद विशाल चट्टानें और पानी से बनने वाली प्राकृतिक धुंध इस जगह को किसी फिल्मी लोकेशन जैसा बना देती हैं। मानसून के समय यहाँ का वातावरण बेहद आकर्षक दिखाई देता है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जगदलपुर (Kanger Valley National Park, Jagdalpur)
तीरथगढ़ जलप्रपात की टाइमिंग (Timing)
- खुलने का समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक
- सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि बारिश के बाद जलप्रपात में पानी भरपूर रहता है और मौसम भी सुहावना होता है।
आसपास घूमने लायक स्थान (Nearby Places to Visit)
चित्रकोट जलप्रपात (Chitrakote Waterfall) – तीरथगढ़ जलप्रपात से लगभग 40–45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात बस्तर का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माना जाता है। इंद्रावती नदी पर बना यह विशाल झरना भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात माना जाता है और इसे “भारत का नियाग्रा फॉल” भी कहा जाता है। मानसून के दौरान जब नदी में पानी का बहाव बढ़ता है, तब यह जलप्रपात अर्धवृत्ताकार आकार में बेहद विशाल और रोमांचक दिखाई देता है। यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बहुत आकर्षक होता है। पर्यटक यहाँ बोटिंग, फोटोग्राफी और प्राकृतिक दृश्य देखने का आनंद लेते हैं। आसपास बने व्यू पॉइंट से पूरे जलप्रपात का शानदार नजारा दिखाई देता है। रात के समय रंगीन लाइटिंग के कारण इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है।
कुटुमसर गुफा (Kotumsar Cave) – कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित यह गुफा भारत की सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक गुफाओं में से एक मानी जाती है। चूना पत्थर से बनी यह गुफा अपनी रहस्यमयी बनावट, संकरी सुरंगों और प्राकृतिक संरचनाओं के लिए जानी जाती है। गुफा के अंदर हमेशा ठंडा वातावरण रहता है और अंधेरा रोमांच का अनुभव कराता है। यहाँ की स्टैलेग्माइट और स्टैलेक्टाइट संरचनाएँ हजारों वर्षों में बनी हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह गुफा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई पर्यटक इसे एडवेंचर ट्रिप का सबसे रोमांचक हिस्सा मानते हैं। बारिश के मौसम में सुरक्षा कारणों से गुफा कभी-कभी बंद भी कर दी जाती है।
कांगेर धारा (Kanger Dhara) – तीरथगढ़ के पास स्थित यह प्राकृतिक जलधारा शांत वातावरण और हरियाली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ साफ पानी चट्टानों के बीच से बहता हुआ दिखाई देता है, जो बेहद सुंदर दृश्य बनाता है। यह स्थान उन लोगों के लिए खास है जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की शांति महसूस करना चाहते हैं। आसपास घने जंगल और पेड़-पौधे वातावरण को और आकर्षक बनाते हैं। पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए यह जगह काफी लोकप्रिय है। मानसून में यहाँ पानी का बहाव बढ़ने के कारण इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।
कैलाश गुफा (Kailash Cave) – यह प्राकृतिक गुफा अपनी अद्भुत चूना पत्थर संरचनाओं के लिए जानी जाती है। गुफा के अंदर कई ऐसी आकृतियाँ दिखाई देती हैं जो शिवलिंग और मंदिर जैसी प्रतीत होती हैं। इसी कारण इसे “कैलाश गुफा” कहा जाता है। यहाँ पहुँचने के लिए हल्की ट्रैकिंग करनी पड़ती है, जिससे यात्रा और भी रोमांचक बन जाती है। गुफा के अंदर ठंडा वातावरण और प्राकृतिक चट्टानें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग भी यहाँ विशेष रूप से आते हैं। प्रकृति और अध्यात्म का अनोखा संगम इस स्थान को खास बनाता है।
दंतेश्वरी मंदिर (Danteshwari Temple) – जगदलपुर और दंतेवाड़ा क्षेत्र की पहचान माना जाने वाला यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है। देवी दंतेश्वरी बस्तर की आराध्य देवी मानी जाती हैं। मंदिर की वास्तुकला प्राचीन शैली में बनी हुई है और यहाँ का वातावरण बेहद आध्यात्मिक महसूस होता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के आसपास स्थानीय बाजार भी लगता है जहाँ बस्तर की हस्तशिल्प वस्तुएँ और पारंपरिक सामान खरीदे जा सकते हैं। धार्मिक पर्यटन पसंद करने वालों के लिए यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है।
दलपत सागर झील (Dalpat Sagar Lake) – जगदलपुर शहर के बीचोंबीच स्थित यह विशाल झील शहर की सबसे खूबसूरत जगहों में गिनी जाती है। शाम के समय यहाँ का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। पर्यटक यहाँ बोटिंग का आनंद लेते हैं और झील के किनारे बैठकर शांत वातावरण का अनुभव करते हैं। सूर्यास्त के समय पानी में पड़ती सुनहरी रोशनी झील को और भी खूबसूरत बना देती है। आसपास बने पार्क और बैठने की जगहें परिवार के साथ समय बिताने के लिए अच्छी मानी जाती हैं। यह स्थान स्थानीय लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय है।
बस्तर पैलेस (Bastar Palace) – बस्तर राजघराने का यह ऐतिहासिक महल अपनी शानदार वास्तुकला और शाही इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। महल के अंदर पुरानी शैली की डिजाइन और संरचना देखने को मिलती है, जो बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। यहाँ घूमते समय पर्यटक बस्तर रियासत के इतिहास और राजपरिवार से जुड़ी कई रोचक बातें जान सकते हैं। महल के आसपास का शांत वातावरण और पुरानी इमारतों की भव्यता फोटोग्राफी के लिए भी बेहतरीन मानी जाती है।
मानव विज्ञान संग्रहालय (Anthropological Museum) – यह संग्रहालय बस्तर की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समझने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यहाँ जनजातीय जीवन से जुड़े पारंपरिक कपड़े, हथियार, आभूषण, वाद्य यंत्र और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। संग्रहालय घूमने के बाद पर्यटक बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को करीब से महसूस कर सकते हैं। इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान बेहद जानकारीपूर्ण माना जाता है।
मंदवा जलप्रपात (Mandawa Waterfall) – यह अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध लेकिन बेहद सुंदर प्राकृतिक जलप्रपात है। यहाँ का शांत वातावरण और घने जंगल इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बनाते हैं। भीड़ कम होने के कारण यहाँ शांति से समय बिताया जा सकता है। बारिश के मौसम में यह झरना और भी खूबसूरत दिखाई देता है। ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के लिए यह स्थान शानदार माना जाता है।
चित्रधारा जलप्रपात (Chitradhara Waterfall) – यह छोटा लेकिन बेहद आकर्षक जलप्रपात जगदलपुर के पास स्थित है। यहाँ पानी कई चट्टानों से होकर बहता है, जिससे प्राकृतिक सुंदरता और बढ़ जाती है। मानसून में यहाँ हरियाली और पानी का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। स्थानीय लोग पिकनिक और घूमने के लिए यहाँ अक्सर आते हैं। शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारे इसे आरामदायक पर्यटन स्थल बनाते हैं।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Travel Tips)
तीरथगढ़ जलप्रपात की यात्रा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है ताकि आपकी यात्रा सुरक्षित और आरामदायक बनी रहे। सबसे पहले, यहाँ की चट्टानें विशेष रूप से मानसून के मौसम में काफी फिसलन भरी हो जाती हैं। इसलिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना जरूरी माना जाता है। सीढ़ियों से नीचे उतरते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कुछ स्थानों पर रास्ता संकरा और गीला हो सकता है।
झरने के बहुत करीब जाने या तेज बहाव वाले पानी में उतरने से बचना चाहिए। मानसून में पानी का प्रवाह अचानक बढ़ सकता है, जो खतरनाक साबित हो सकता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हमेशा साथ लेकर चलना चाहिए और अकेले नीचे जाने से बचना चाहिए।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक संरक्षित वन क्षेत्र है, इसलिए यहाँ प्लास्टिक फेंकना, शराब पीना, तेज आवाज में म्यूजिक बजाना या जंगल को नुकसान पहुँचाना प्रतिबंधित है। पर्यटकों को यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और सफाई बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
यदि आप फोटोग्राफी करना चाहते हैं तो अपने कैमरा और मोबाइल को पानी से सुरक्षित रखें क्योंकि झरने की फुहारें काफी दूर तक आती हैं। सुबह जल्दी पहुँचना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि उस समय मौसम ठंडा रहता है और भीड़ भी कम होती है।
यहाँ नेटवर्क की समस्या कुछ स्थानों पर हो सकती है, इसलिए अपने साथियों के साथ पहले से संपर्क संबंधी जानकारी साझा कर लेना बेहतर रहता है। खाने-पीने की सीमित सुविधाएँ उपलब्ध होने के कारण पानी की बोतल और हल्का नाश्ता साथ रखना फायदेमंद रहता है।
पूरा पता (Full Address)
तीरथगढ़ जलप्रपात
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
जगदलपुर, जिला बस्तर
छत्तीसगढ़ – 494442, भारत
तीरथगढ़ जलप्रपात का पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
हवाई मार्ग से (By Air)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जगदलपुर (माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट) है, जो यहां से लगभग 35 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या कैब लेकर जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग से (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जगदलपुर रेलवे स्टेशन है। स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा तीरथगढ़ जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग से (By Road)
जगदलपुर से तीरथगढ़ जलप्रपात की दूरी लगभग 35 किमी है। यहां टैक्सी, बस या निजी वाहन से लगभग 1 से 1.5 घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कुटुमसर गुफा, बस्तर, जगदलपुर (Kutumsar Cave, Bastar, Jagdalpur)
जगदलपुर में स्थित तिरथगढ़ जलप्रपात की तस्वीरें (Images of Tirathgarh Waterfall, Jagdalpur)



यात्रा का रोमांच (Travel Experience)
तीरथगढ़ जलप्रपात केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि प्रकृति, रोमांच और शांति का अद्भुत संगम है। यहां गिरता हुआ जल, चारों ओर फैली हरियाली और जंगलों की रहस्यमयी खामोशी हर पर्यटक को एक अनोखा अनुभव देती है।


