
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में स्थित शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो अपनी रहस्यमयी सुंदरता, मुगलकालीन वास्तुकला और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। यह मकबरा “ब्लैक ताज महल” के नाम से भी प्रसिद्ध है। जब कोई पर्यटक पहली बार इस स्मारक को देखता है, तो उसकी आंखों के सामने आगरा के ताजमहल जैसी छवि उभर आती है। हालांकि यह आकार में ताजमहल से छोटा है, लेकिन इसकी बनावट और स्थापत्य शैली इसे बेहद खास बनाती है। काले पत्थरों से निर्मित होने के कारण यह स्मारक अन्य मुगलकालीन इमारतों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
बुरहानपुर हमेशा से मुगल साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां कई शाही इमारतें, मस्जिदें, मकबरे और किले मौजूद हैं, जो मुगल इतिहास की गौरवगाथा सुनाते हैं। शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा उन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह मकबरा उतावली नदी के किनारे स्थित है, जिसके कारण यहां का वातावरण बेहद शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दिखाई देता है। सुबह के समय हल्की धूप में इसकी काली दीवारें अलग ही चमक बिखेरती हैं, जबकि शाम के समय सूर्यास्त की सुनहरी रोशनी इस स्मारक को और भी रहस्यमयी बना देती है।
स्थानीय लोगों के बीच यह मकबरा कई कहानियों और किंवदंतियों के लिए भी प्रसिद्ध है। कुछ लोग इसे मुगल प्रेम और वीरता की निशानी मानते हैं, तो कुछ इसे मुगल वास्तुकला का छिपा हुआ खजाना कहते हैं। यहां आने वाले पर्यटक केवल इसकी खूबसूरती देखने नहीं आते, बल्कि इतिहास की उस दुनिया को महसूस करने आते हैं, जहां मुगल शासकों की शान और वैभव बसता था।
यह स्थान फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए भी बेहद शानदार है। मकबरे की विशाल गुंबद, मेहराबदार गलियारे, शांत बगीचे और आसपास का प्राकृतिक वातावरण तस्वीरों को बेहद आकर्षक बना देते हैं। बरसात के मौसम में यहां की हरियाली इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है। अगर आप इतिहास, वास्तुकला और शांत पर्यटन स्थलों में रुचि रखते हैं, तो शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकता है।
खरबूजा महल बुरहानपुर (Kharbuja Mahal Burhanpur)
इतिहास (History)

शाहनवाज़ ख़ान मुगल साम्राज्य के एक वीर सेनापति और उच्च पदाधिकारी थे। उनका वास्तविक नाम “इराज” माना जाता है और वे प्रसिद्ध मुगल सेनापति तथा कवि अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-खाना के सबसे बड़े पुत्र थे। अब्दुर्रहीम वही महान व्यक्ति थे जिन्होंने हिंदी साहित्य में रहीम के दोहे लिखे। शाहनवाज़ ख़ान ने मुगल साम्राज्य की कई महत्वपूर्ण लड़ाइयों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया था। उनकी वीरता और निष्ठा से प्रभावित होकर मुगल सम्राट जहांगीर ने उन्हें “शाहनवाज़ ख़ान” की उपाधि प्रदान की थी।
इतिहास के अनुसार शाहनवाज़ ख़ान का निधन कम उम्र में हो गया था। उनकी मृत्यु से मुगल दरबार में शोक की लहर फैल गई थी। कहा जाता है कि सम्राट जहांगीर स्वयं उनकी वीरता और सेवाओं से बेहद प्रभावित थे। उनकी स्मृति को अमर बनाने के लिए बुरहानपुर में इस भव्य मकबरे का निर्माण करवाया गया। माना जाता है कि इस मकबरे का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में कराया गया था।
बुरहानपुर उस समय मुगल साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सैन्य केंद्र था। दक्षिण भारत के अभियानों के दौरान मुगल शासक और सेनापति अक्सर यहां ठहरते थे। इसी कारण यहां कई शानदार इमारतों का निर्माण हुआ। शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा भी उसी काल की वास्तुकला और शाही वैभव का प्रतीक है।
इस मकबरे के साथ कई रोचक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी बनावट ने बाद में बने ताजमहल की वास्तुकला को प्रेरित किया था। हालांकि इतिहासकार इस दावे को पूरी तरह प्रमाणित नहीं मानते, लेकिन इसकी गुंबद शैली और मेहराबदार संरचना ताजमहल की याद जरूर दिलाती है। मकबरे के नीचे बने भूमिगत कक्ष में शाहनवाज़ ख़ान और उनकी पत्नी की असली कब्र स्थित है। यह शैली भी मुगलकालीन मकबरों की विशेष पहचान मानी जाती है।
समय के साथ यह मकबरा इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। आज यह स्मारक केवल एक कब्र नहीं, बल्कि मुगलकालीन कला, स्थापत्य और इतिहास की जीवित धरोहर के रूप में देखा जाता है। यहां पहुंचने पर ऐसा लगता है जैसे व्यक्ति कई सौ वर्ष पीछे मुगलकालीन दौर में पहुंच गया हो।
मोती महल बुुरहानपुर (Moti Mahal Burhanpur)
विशेषताएँ (Architectural Features)

शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा अपनी अनोखी वास्तुकला और रहस्यमयी आकर्षण के कारण बुरहानपुर की सबसे खास ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका काले पत्थरों से निर्मित होना है। भारत में अधिकतर मुगलकालीन इमारतें सफेद संगमरमर या लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई हैं, लेकिन यह मकबरा अपने गहरे काले रंग के कारण बिल्कुल अलग दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे “ब्लैक ताज महल” कहा जाता है।
मकबरे की संरचना चौकोर आकार की है और इसके केंद्र में एक विशाल गुंबद बना हुआ है। गुंबद के चारों ओर बनी छोटी-छोटी मीनारें इसकी सुंदरता को और अधिक भव्य बना देती हैं। जब सूर्य की रोशनी इस पर पड़ती है, तो इसकी दीवारों पर एक अलग ही चमक दिखाई देती है। शाम के समय इसका दृश्य बेहद आकर्षक लगता है।
मकबरे के चारों ओर बने मेहराबदार गलियारे मुगल स्थापत्य कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। इन गलियारों में खड़े होकर जब कोई व्यक्ति आसपास का दृश्य देखता है, तो उसे ऐसा महसूस होता है जैसे वह किसी शाही महल में मौजूद हो। अंदर की दीवारों पर बनी प्राचीन कलाकृतियां और सजावट आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। हालांकि समय के साथ इनमें कुछ क्षति हुई है, लेकिन उनकी सुंदरता अभी भी बरकरार है।
इस मकबरे की एक और खास बात इसका शांत वातावरण है। उतावली नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहां प्राकृतिक सुंदरता भी भरपूर देखने को मिलती है। बरसात के मौसम में यहां की हरियाली और भी मनमोहक हो जाती है। मकबरे के आसपास बने बगीचे पर्यटकों को आराम और सुकून का अनुभव कराते हैं।
मकबरे के भीतर ध्वनि की गूंज भी बेहद अनोखी है। हल्की सी आवाज भी पूरे कक्ष में सुनाई देती है। यह वास्तुकला की उस तकनीक को दर्शाती है, जिसमें ध्वनि को विशेष रूप से ध्यान में रखकर निर्माण किया जाता था।
यह स्थान केवल इतिहास प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि फोटोग्राफरों और घूमने के शौकीनों के लिए भी बेहद खास है। यहां की हर दीवार, हर मेहराब और हर कोना मुगलकालीन शान और कला की कहानी सुनाता है।
अंदर देखने लायक चीजें (Things to See Inside)
मुख्य गुंबद (Main Dome)
मकबरे का विशाल मुख्य गुंबद इसकी सबसे बड़ी पहचान है। दूर से देखने पर यह किसी शाही महल जैसा दिखाई देता है। गुंबद के नीचे खड़े होकर ऊपर देखने पर मुगलकालीन वास्तुकला की अद्भुत कला देखने को मिलती है। इसकी बनावट इतनी संतुलित है कि हर दिशा से यह अलग सुंदरता प्रस्तुत करता है।
भूमिगत कब्र कक्ष (Underground Crypt Chamber)
मकबरे के नीचे बना भूमिगत कक्ष यहां का सबसे रहस्यमयी भाग माना जाता है। छोटी सी सीढ़ियों से नीचे उतरने पर शाहनवाज़ ख़ान और उनकी पत्नी की वास्तविक कब्र दिखाई देती है। यहां का वातावरण बेहद शांत और गंभीर होता है।
मेहराबदार गलियारे (Arched Corridors)
चारों ओर बने मेहराबदार गलियारे मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन गलियारों से गुजरते समय ऐसा लगता है जैसे किसी शाही महल के अंदर घूम रहे हों।
प्राचीन दीवार चित्रकारी (Ancient Wall Paintings)
मकबरे की अंदरूनी दीवारों पर बनी पुरानी चित्रकारी इसकी भव्यता को और अधिक बढ़ाती है। कई चित्र समय के साथ हल्के पड़ चुके हैं, लेकिन उनकी कलात्मकता आज भी साफ दिखाई देती है।
शांत बगीचे (Peaceful Gardens)
मकबरे के आसपास बने छोटे-छोटे बगीचे यहां के वातावरण को सुकून भरा बनाते हैं। यहां बैठकर पर्यटक इतिहास और प्रकृति दोनों का आनंद ले सकते हैं।
उतावली नदी का दृश्य (View of Utavali River)
मकबरे के पास बहने वाली उतावली नदी यहां की सुंदरता को और बढ़ा देती है। शाम के समय नदी किनारे बैठकर सूर्यास्त देखना बेहद यादगार अनुभव होता है।
पानदान महल (Paandan Mahal)
मकबरे के पास स्थित यह पुरानी संरचना अपनी अनोखी आकृति के कारण प्रसिद्ध है। इसकी बनावट किसी पानदान जैसी प्रतीत होती है, इसलिए इसे पानदान महल कहा जाता है।
पुरानी नक्काशी और पत्थर कला (Stone Carvings and Mughal Art)
मकबरे के कई हिस्सों में पत्थरों पर की गई नक्काशी देखने लायक है। यह मुगलकालीन कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है।
समय और प्रवेश शुल्क (Timing and Entry Fee)
- खुलने का समय: प्रातः लगभग 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: सामान्यतः निःशुल्क
- सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है (स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समय में बदलाव संभव)
राजा जय सिंह की छतरी (Raja Jai Singh Ki Chhatri), बुरहानपुर (Burhanpur)
आस-पास घूमने लायक स्थान (Nearby Attractions)
असीरगढ़ किला (Asirgarh Fort)
असीरगढ़ किला बुरहानपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित एक विशाल और रहस्यमयी किला है। इसे “दक्कन का दरवाजा” भी कहा जाता है, क्योंकि प्राचीन समय में दक्षिण भारत में प्रवेश करने के लिए यह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। इस किले का इतिहास फारूकी शासकों, मुगलों और मराठों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर को इस किले पर अधिकार करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा था।
किले के अंदर कई प्राचीन संरचनाएं देखने को मिलती हैं, जिनमें मस्जिद, मंदिर, बावड़ी और सैनिकों के रहने के स्थान शामिल हैं। यहां स्थित शिव मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। पहाड़ी पर बने होने के कारण यहां से आसपास के जंगलों और बुरहानपुर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। बरसात के मौसम में यहां की हरियाली और बादलों से घिरा वातावरण इसे और भी खूबसूरत बना देता है। इतिहास प्रेमियों और ट्रैकिंग पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान बेहद खास माना जाता है।
शाही किला (Shahi Qila)
ताप्ती नदी के किनारे स्थित शाही किला बुरहानपुर की सबसे भव्य ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। यह किला मुगल शासकों के निवास और प्रशासनिक कार्यों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। माना जाता है कि यहां कई मुगल सम्राट ठहरे थे। किले की विशाल दीवारें, खूबसूरत दरबार हॉल और मुगलकालीन वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।
किले के अंदर कई प्राचीन कक्ष और गलियारे बने हुए हैं। यहां की दीवारों पर बनी कलाकृतियां और नक्काशी मुगल कला की सुंदरता को दर्शाती हैं। ताप्ती नदी के किनारे होने के कारण यहां का दृश्य बेहद आकर्षक लगता है। शाम के समय यहां से नदी का दृश्य बहुत खूबसूरत दिखाई देता है। यह स्थान फोटोग्राफी और इतिहास दोनों के शौकीनों के लिए खास अनुभव प्रदान करता है।
शाही हमाम (Shahi Hamam)
शाही हमाम बुरहानपुर की सबसे प्रसिद्ध मुगलकालीन संरचनाओं में गिना जाता है। यह शाही स्नानागार मुगल रानियों और शाही परिवार के उपयोग के लिए बनाया गया था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीवारों और छतों पर बनी रंगीन पेंटिंग्स हैं, जो फारसी कला शैली से प्रेरित मानी जाती हैं।
हमाम के अंदर गर्म और ठंडे पानी की अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। उस समय की जल प्रबंधन तकनीक यहां देखने लायक है। कहा जाता है कि यहां की जल प्रणाली इतनी उन्नत थी कि पानी विशेष पाइपों के माध्यम से अलग-अलग कमरों तक पहुंचाया जाता था। आज भी इसकी संरचना लोगों को हैरान कर देती है। यदि आप मुगलकालीन विलासिता और वास्तुकला को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह स्थान जरूर घूमना चाहिए।
आहूखाना (Ahukhana)
आहूखाना बुरहानपुर का एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसे “मृग उद्यान” भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यह स्थान मुगल सम्राट शाहजहां की प्रिय बेगम मुमताज महल से जुड़ा हुआ है। इतिहास के अनुसार मुमताज महल का निधन बुरहानपुर में हुआ था और ताजमहल बनने से पहले उनके पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए यहीं रखा गया था।
यह स्थान अपने शांत वातावरण और सुंदर बगीचों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मुगलकालीन उद्यान शैली देखने को मिलती है। पुराने फव्वारे, जल संरचनाएं और हरियाली इस जगह को बेहद खास बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह स्थान भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
जामा मस्जिद (Jama Masjid Burhanpur)
जामा मस्जिद बुरहानपुर की सबसे प्राचीन और विशाल मस्जिदों में से एक है। इसका निर्माण फारूकी शासकों द्वारा करवाया गया था। मस्जिद की विशाल मेहराबें, लंबे स्तंभ और शानदार गुंबद इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। मस्जिद के अंदर का शांत वातावरण लोगों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
यह मस्जिद केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इस्लामी वास्तुकला का शानदार उदाहरण भी है। इसकी दीवारों पर की गई सुंदर नक्काशी और अरबी लेखन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। नमाज के समय यहां का दृश्य बेहद भव्य दिखाई देता है। इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान बेहद खास है।
दर्गाह-ए-हकीमी (Dargah-e-Hakimi)
दर्गाह-ए-हकीमी दाऊदी बोहरा समुदाय का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह स्थान संत हकीमुद्दीन साहब की दरगाह के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं।
दरगाह की वास्तुकला बेहद सुंदर और आकर्षक है। सफेद रंग की इमारत और शांत वातावरण यहां आने वाले लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। आसपास का क्षेत्र साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहता है। धार्मिक पर्यटन पसंद करने वाले लोगों के लिए यह स्थान जरूर देखने लायक है।
कुंडी भंडारा (Kundi Bhandara)
कुंडी भंडारा बुरहानपुर की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का अद्भुत उदाहरण है। यह भूमिगत जल संरचना मुगलकाल में बनाई गई थी, ताकि शहर तक स्वच्छ पानी पहुंचाया जा सके। उस समय बिना किसी आधुनिक मशीन के इतनी उन्नत प्रणाली का निर्माण वास्तव में आश्चर्यजनक माना जाता है।
यहां कई भूमिगत सुरंगें और जल कुंड देखने को मिलते हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह प्रणाली फारसी तकनीक से प्रेरित थी। आज भी कई लोग इस संरचना को देखने आते हैं और उस समय की इंजीनियरिंग क्षमता की प्रशंसा करते हैं।
राजा जयसिंह की छतरी (Raja Jai Singh Chhatri)
राजा जयसिंह की छतरी एक खूबसूरत स्मारक है, जो अपनी शांत वातावरण और सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान विशेष रूप से सूर्यास्त देखने के लिए काफी लोकप्रिय माना जाता है। छतरी की नक्काशी और पत्थर की कलाकारी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
यहां बैठकर आसपास के प्राकृतिक दृश्य का आनंद लिया जा सकता है। बरसात के मौसम में यहां की हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है। इतिहास और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए यह स्थान शानदार अनुभव प्रदान करता है।
ताप्ती नदी घाट (Tapti River Ghats)
ताप्ती नदी के घाट बुरहानपुर के शांत और सुंदर स्थानों में गिने जाते हैं। सुबह और शाम के समय यहां का वातावरण बेहद सुकून भरा होता है। स्थानीय लोग यहां पूजा-पाठ और घूमने के लिए आते हैं।
नदी किनारे बैठकर बहते पानी और ठंडी हवा का आनंद लेना बेहद यादगार अनुभव होता है। सूर्यास्त के समय नदी पर पड़ती सुनहरी रोशनी बहुत खूबसूरत दिखाई देती है। फोटोग्राफी और शांत वातावरण पसंद करने वालों के लिए यह स्थान बेहद खास है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Travel Tips)
शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा एक ऐतिहासिक और संरक्षित स्मारक है, इसलिए यहां घूमते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। सबसे पहले स्मारक की दीवारों या पत्थरों पर कुछ भी लिखने या नुकसान पहुंचाने से बचें। यह हमारी ऐतिहासिक धरोहर है और इसकी सुरक्षा करना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है।
गर्मियों के मौसम में यहां तापमान काफी अधिक हो सकता है, इसलिए पानी की बोतल साथ रखना बेहतर माना जाता है। सुबह और शाम का समय घूमने के लिए सबसे आरामदायक रहता है। बरसात के दौरान यहां फिसलन हो सकती है, इसलिए आरामदायक जूते पहनना अच्छा रहता है।
यदि आप फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं, तो कैमरा जरूर साथ लाएं क्योंकि यहां की वास्तुकला और प्राकृतिक वातावरण बेहद शानदार तस्वीरें लेने का अवसर प्रदान करते हैं। ड्रोन कैमरे का उपयोग करने से पहले स्थानीय अनुमति लेना आवश्यक हो सकता है।
मकबरे के अंदर शांति बनाए रखें और तेज आवाज में बात करने से बचें। यह स्थान ऐतिहासिक होने के साथ-साथ लोगों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखता है।
पूरा पता (Full Address)
Shah Nawaz Khan Tomb (Pehelwan Shah Maqbara)
Teressa Area,
Burhanpur – 450331
Madhya Pradesh, India
कैसे पहुँचे – सम्पूर्ण ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
हवाई मार्ग (By Air)
निकटतम हवाई अड्डा: Devi Ahilya Bai Holkar Airport (लगभग 180 किमी दूर)
इंदौर से टैक्सी या बस द्वारा बुरहानपुर पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग (By Train)
निकटतम स्टेशन: Burhanpur Railway Station
स्टेशन से मकबरा लगभग 3–4 किमी दूरी पर है। ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाती है।
गुरुद्वारा बड़ी संगत, बुरहानपुर (Gurudwara Badi Sangat, Burhanpur)
सड़क मार्ग (By Road)
बुरहानपुर मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
इंदौर, खंडवा, भोपाल आदि से नियमित बस सेवा उपलब्ध है।
शाह नवाज़ खान के मकबरे की तस्वीरें (Images of Tomb of Shah Nawaz Khan)





निष्कर्ष (Conclusion)
शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि मुगलकालीन गौरव और स्थापत्य कला की जीवित कहानी है। काले पत्थर से निर्मित यह स्मारक बुरहानपुर की पहचान बन चुका है।
यदि आप इतिहास, फोटोग्राफी और शांत वातावरण के प्रेमी हैं, तो यह स्थान आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा।
शाहनवाज़ ख़ान का मकबरा (Tomb of Shah Nawaz Khan / Black Taj Mahal)


