
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर धरती पर स्थित नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर निमाड़ क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और लोकविश्वास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं, विश्वास और परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। सतपुड़ा पर्वतमाला की ऊँचाइयों पर स्थित यह पवित्र स्थान दूर-दूर से आने वाले भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर तक पहुँचने का सफर जितना रोमांचक है, यहाँ पहुँचने के बाद मिलने वाली आध्यात्मिक शांति उतनी ही अद्भुत होती है।
नागलवाड़ी गाँव लंबे समय से भीलट देव की आराधना का प्रमुख केंद्र रहा है। भीलट देव को निमाड़ क्षेत्र के लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है और विशेष रूप से भील तथा अन्य आदिवासी समुदायों में उनकी गहरी मान्यता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएँ यहाँ अवश्य पूरी होती हैं। यही कारण है कि वर्षभर हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, जबकि नागपंचमी के अवसर पर यहाँ विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
मंदिर के चारों ओर फैली हरियाली, ऊँची-नीची पहाड़ियाँ और प्राकृतिक घाटियाँ इस स्थान को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षक बनाती हैं। बरसात के मौसम में पूरा क्षेत्र हरे रंग की चादर ओढ़ लेता है और बादलों से घिरी पहाड़ियाँ मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का वातावरण और भी अधिक सुंदर दिखाई देता है।
आज नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर बड़वानी जिले के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा-अर्चना ही नहीं करते बल्कि निमाड़ की संस्कृति, लोकपरंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता का भी अनुभव करते हैं। यही कारण है कि यह स्थान हर वर्ष हजारों लोगों के लिए श्रद्धा और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर बड़वानी (Shri Ramkulleshwar Mahadev Temple Barwani)
इतिहास (History)

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर लगभग 700 से 800 वर्ष प्राचीन माना जाता है। प्रारंभ में यह स्थान आदिवासी भील समुदाय की आराधना स्थली रहा। समय के साथ यहाँ भीलट देव की विधिवत स्थापना हुई और पहाड़ी की चोटी पर मंदिर का स्वरूप विकसित किया गया।
नागलवाड़ी स्थित भीलट देव मंदिर का इतिहास निमाड़ क्षेत्र की लोकसंस्कृति और जनश्रुतियों से जुड़ा हुआ है। यद्यपि मंदिर के निर्माण की सटीक तिथि के बारे में कोई स्पष्ट ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान सदियों पुराना है और कई पीढ़ियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। भीलट देव को निमाड़ क्षेत्र के लोकदेवता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है और आदिवासी समाज उन्हें अपने रक्षक तथा संकटमोचक देवता मानता है।
लोककथाओं के अनुसार भीलट देव ने अपने भक्तों की रक्षा करने और क्षेत्र में शांति एवं समृद्धि बनाए रखने का कार्य किया। समय के साथ उनकी महिमा दूर-दूर तक फैल गई और विभिन्न गाँवों के लोग उनकी पूजा करने के लिए नागलवाड़ी आने लगे। धीरे-धीरे यह स्थान एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। आज भी अनेक परिवार अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार किसी शुभ कार्य से पहले भीलट देव का स्मरण करते हैं।
निमाड़ क्षेत्र में भीलट देव की पूजा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहाँ आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजन, लोकगीत, भजन और पारंपरिक मेलों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। विशेष रूप से नागपंचमी के अवसर पर लगने वाला विशाल मेला इस ऐतिहासिक परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
इतिहासकारों का मानना है कि लोकदेवताओं की पूजा भारतीय ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। भीलट देव भी ऐसे ही लोकदेवता हैं जिनकी पूजा ने स्थानीय समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ मंदिर परिसर का विकास हुआ और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।
वर्तमान समय में यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि निमाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इतिहास, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम देखने का अवसर प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर आज भी लोगों की आस्था का मजबूत केंद्र बना हुआ है।
वास्तुकला (Architecture)
नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ अपनी सरल लेकिन प्रभावशाली वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर किसी भव्य राजसी महल या विशाल ऐतिहासिक मंदिर की तरह अलंकृत नहीं है, बल्कि इसकी वास्तुकला निमाड़ क्षेत्र की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती है। यही सादगी इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है। मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि यह आसपास की प्राकृतिक पहाड़ियों और वातावरण के साथ पूरी तरह सामंजस्य स्थापित करता है।
मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जिसके कारण इसकी संरचना प्राकृतिक भू-आकृति के अनुसार विकसित हुई है। मंदिर तक पहुँचने के लिए पहाड़ी मार्ग और सीढ़ियों का उपयोग किया जाता है। जैसे-जैसे श्रद्धालु ऊपर की ओर बढ़ते हैं, मंदिर का दृश्य धीरे-धीरे सामने आता है, जो आध्यात्मिक अनुभव को और अधिक रोमांचक बना देता है। पहाड़ी की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर दूर से ही दिखाई देता है और आसपास के क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक प्रतीक बन जाता है।
मंदिर का मुख्य गर्भगृह अपेक्षाकृत साधारण लेकिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ भीलट देव की पूजा की जाती है और भक्त अपनी मनोकामनाएँ लेकर दर्शन के लिए आते हैं। गर्भगृह के आसपास पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पर्याप्त स्थान बनाया गया है। मंदिर परिसर का विन्यास ऐसा है कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकें, विशेष रूप से नागपंचमी मेले के दौरान।
मंदिर की दीवारों और संरचनाओं में स्थानीय निर्माण शैली की झलक दिखाई देती है। निर्माण में पत्थर, सीमेंट और क्षेत्र में उपलब्ध अन्य सामग्री का उपयोग किया गया है। समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार भी किया गया है, जिससे इसकी संरचना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सकी है। मंदिर के शिखर पर धार्मिक ध्वज लहराते हुए दिखाई देते हैं, जो दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर की दिशा का संकेत देते हैं।
मंदिर परिसर की एक और महत्वपूर्ण वास्तुकला विशेषता इसका खुला वातावरण है। यहाँ से सतपुड़ा पर्वतमाला, आसपास की घाटियाँ और प्राकृतिक दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इस प्रकार मंदिर की वास्तुकला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण को भी अपने भीतर समाहित करती है। यही कारण है कि नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
विशेषताएँ (Special Features)

नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर कई ऐसी विशेषताओं से युक्त है जो इसे अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान प्रदान करती हैं। सबसे पहली और प्रमुख विशेषता इसका प्राकृतिक वातावरण है। मंदिर सतपुड़ा पर्वतमाला की सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित है जहाँ से दूर-दूर तक फैले प्राकृतिक दृश्य दिखाई देते हैं। यहाँ पहुँचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और प्रकृति की सुंदरता का अद्भुत अनुभव होता है।
मंदिर की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लोकआस्था है। भीलट देव को निमाड़ क्षेत्र में अत्यंत चमत्कारी लोकदेवता माना जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है। इसी विश्वास के कारण हजारों श्रद्धालु यहाँ नियमित रूप से दर्शन करने आते हैं।
तीसरी विशेषता यहाँ आयोजित होने वाला नागपंचमी मेला है। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि निमाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य, भजन, धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। इस समय पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।
मंदिर का स्थान भी इसे विशेष बनाता है। ऊँची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ से आसपास के गाँव, खेत, जंगल और पर्वतीय क्षेत्र दिखाई देते हैं। फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
इसके अतिरिक्त मंदिर क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण, प्राकृतिक शांति और स्थानीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ आने वाले लोग केवल धार्मिक अनुभव ही नहीं बल्कि निमाड़ क्षेत्र की जीवनशैली और परंपराओं को भी करीब से जान सकते हैं।
यही सभी विशेषताएँ मिलकर नागलवाड़ी के भीलट देव मंदिर को बड़वानी जिले का एक अनूठा और महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल बनाती हैं।
मंदिर के अंदर देवी-देवता (Deities Inside the Temple)
मंदिर के गर्भगृह में भीलट देव की पूजा की जाती है। उन्हें नागदेव का स्वरूप और क्षेत्रपाल देव माना जाता है। परिसर में अन्य छोटे देवस्थल भी बने हैं जहाँ स्थानीय देवताओं की पूजा की जाती है।
मंदिर के अंदर देखने योग्य स्थान (Places to See Inside the Temple)
भीलट देव मुख्य मंदिर (Main Bhilat Dev Shrine)
मंदिर परिसर का सबसे प्रमुख आकर्षण मुख्य गर्भगृह है जहाँ भीलट देव की पूजा की जाती है। श्रद्धालु यहाँ दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
शिखर दर्शन स्थल (Hilltop View Point)
मंदिर के ऊपरी भाग से सतपुड़ा पर्वतमाला के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का नजारा अत्यंत आकर्षक होता है।
प्राकृतिक घाटियाँ (Natural Valleys)
मंदिर के आसपास फैली घाटियाँ और हरियाली प्रकृति प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। मानसून के दौरान यह क्षेत्र बेहद सुंदर दिखाई देता है।
पूजा एवं यज्ञ स्थल (Prayer and Ritual Area)
मंदिर परिसर में कई स्थान ऐसे हैं जहाँ विशेष धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक पूजा आयोजित की जाती है।
नागपंचमी मेला क्षेत्र (Nag Panchami Fair Ground)
त्योहारों के समय यह क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
प्राचीन श्रद्धा स्थल (Ancient Sacred Spots)
मंदिर के आसपास कुछ ऐसे स्थान भी हैं जिन्हें स्थानीय लोग अत्यंत पवित्र मानते हैं और जहाँ श्रद्धालु विशेष रूप से दर्शन करते हैं।
सेंधवा किला, बड़वानी (Sendhwa Fort, Barwani)
आरती और भजन (Aarti and Bhajans)
मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती की जाती है। विशेष अवसरों पर भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। नागपंचमी के दौरान सामूहिक महाआरती का आयोजन होता है जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
त्योहार और कार्यक्रम (Festivals and Events)
नागपंचमी यहाँ का सबसे बड़ा पर्व है। इस अवसर पर कई दिनों तक मेला लगता है। धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा, प्रसाद वितरण और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह मेला क्षेत्रीय आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंदिर की समय-सारणी (Temple Timings)
मंदिर सामान्यतः प्रातः लगभग 6 बजे से सायंकाल तक दर्शन के लिए खुला रहता है। त्योहारों के समय दर्शन का समय बढ़ाया जा सकता है।
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Attractions)
राजघाट नर्मदा तट (Rajghat Narmada Ghat)
नागलवाड़ी से बड़वानी की ओर आने पर नर्मदा नदी के किनारे स्थित राजघाट क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों में से एक है। यह स्थान नर्मदा नदी के शांत प्रवाह, विशाल घाटों और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। सुबह और शाम के समय यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है, जब सूर्य की किरणें नर्मदा के जल पर पड़कर सुनहरी चमक उत्पन्न करती हैं। श्रद्धालु यहाँ स्नान, पूजा-अर्चना और नर्मदा दर्शन के लिए आते हैं। नर्मदा जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ विशेष आयोजन भी होते हैं। फोटोग्राफी, प्रकृति अवलोकन और आध्यात्मिक शांति की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए यह एक आदर्श स्थान है।
भंवरगढ़ किला (Bhawargarh Fort)
सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच स्थित भंवरगढ़ किला बड़वानी जिले की ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है। यह किला कभी क्षेत्र की सुरक्षा और प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र था। आज भले ही इसका अधिकांश भाग खंडहर अवस्था में हो, लेकिन इसकी विशाल दीवारें, प्राचीन अवशेष और पहाड़ी स्थिति इतिहास की गौरवशाली कहानी सुनाते हैं। किले की ऊँचाई से आसपास के जंगलों, घाटियों और पहाड़ियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। इतिहास प्रेमियों, ट्रेकिंग के शौकीनों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण रखता है। बरसात के मौसम में यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और भी अधिक बढ़ जाती है।
सेंधवा किला (Sendhwa Fort)
नागलवाड़ी से कुछ दूरी पर स्थित सेंधवा किला क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किला व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था और मराठा काल में इसका विशेष महत्व था। किले के अवशेष आज भी उस समय की सैन्य व्यवस्था और स्थापत्य कला की झलक प्रस्तुत करते हैं। किले के आसपास फैली पहाड़ियाँ और प्राकृतिक दृश्य इसे पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनाते हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक इतिहास के साथ-साथ प्रकृति का भी आनंद ले सकते हैं।
तोरणमाल हिल स्टेशन (Toranmal Hill Station)
यदि आप नागलवाड़ी यात्रा के साथ किसी खूबसूरत पर्वतीय पर्यटन स्थल की तलाश में हैं, तो तोरणमाल हिल स्टेशन एक शानदार विकल्प है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में स्थित यह हिल स्टेशन सतपुड़ा पर्वतमाला की ऊँचाइयों पर बसा हुआ है। यहाँ की ठंडी जलवायु, घने जंगल, झीलें, झरने और पहाड़ी दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यशवंत झील, सीता खाई, गोरखनाथ मंदिर और मच्छिंद्रनाथ गुफाएँ यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं। मानसून और सर्दियों के दौरान तोरणमाल की सुंदरता अपने चरम पर होती है।
शहीद भीमा नायक स्मारक एवं बांध (Shaheed Bhima Nayak Memorial and Dam)
बड़वानी जिले का यह स्थान इतिहास और प्रकृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। भीमा नायक 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान आदिवासी क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। उनके सम्मान में इस परियोजना और क्षेत्र का नाम रखा गया है। यहाँ स्थित विशाल जलाशय, हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बारिश के मौसम में बांध का दृश्य अत्यंत मनोरम दिखाई देता है। यह स्थान पिकनिक और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए भी लोकप्रिय है।
बावनगजा जैन तीर्थ (Bawangaja Jain Pilgrimage Site)
नागलवाड़ी से अपेक्षाकृत कम दूरी पर स्थित बावनगजा विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल है। यहाँ भगवान आदिनाथ की लगभग 84 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थापित है, जिसे दुनिया की सबसे ऊँची जैन प्रतिमाओं में से एक माना जाता है। पहाड़ी पर स्थित यह प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मंदिर परिसर से आसपास के प्राकृतिक दृश्य भी अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान स्थापत्य और कला प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रखता है।
अंजड़ नगर (Anjad Town)
अंजड़ बड़वानी जिले का एक प्रमुख नगर है जो अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक बाजारों के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थानीय निमाड़ी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। अंजड़ के बाजारों में पारंपरिक वस्तुएँ, स्थानीय खाद्य पदार्थ और ग्रामीण जीवन का वास्तविक स्वरूप देखने को मिलता है। नागलवाड़ी की यात्रा के दौरान अंजड़ का भ्रमण क्षेत्र की संस्कृति को समझने का अच्छा अवसर प्रदान करता है।
बड़वानी शहर (Barwani City)
बड़वानी जिला मुख्यालय होने के साथ-साथ निमाड़ क्षेत्र का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र भी है। यहाँ कई प्राचीन मंदिर, नर्मदा तट, स्थानीय बाजार और ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं। शहर में घूमते समय पर्यटक निमाड़ी खानपान, स्थानीय हस्तशिल्प और क्षेत्रीय संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं। बड़वानी से नागलवाड़ी की यात्रा करने वाले अधिकांश पर्यटक शहर के अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करते हैं।
नर्मदा घाटी एवं सतपुड़ा वन क्षेत्र (Narmada Valley and Satpura Forest Region)
नागलवाड़ी के आसपास फैला नर्मदा घाटी क्षेत्र और सतपुड़ा का वन क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ की पहाड़ियाँ, जंगल, छोटे जलस्रोत और प्राकृतिक दृश्य पूरे क्षेत्र को विशेष आकर्षण प्रदान करते हैं। मानसून के समय बादलों से ढकी पहाड़ियाँ और हरियाली से भरे जंगल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। जो पर्यटक धार्मिक यात्रा के साथ प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए यह क्षेत्र एक उत्कृष्ट विकल्प है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Things to Remember)
पहाड़ी पर चढ़ाई होने के कारण आरामदायक जूते पहनें। गर्मी के मौसम में पानी साथ रखें। नागपंचमी के दौरान भारी भीड़ रहती है, इसलिए समय से पहले पहुँचने की योजना बनाएं। स्वच्छता बनाए रखें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।
तीर गोला स्मारक, बड़वानी (Tir Gola Memorial, Barwani)
पूरा पता (Full Address)
भीलट देव मंदिर
ग्राम नागलवाड़ी खुर्द
तहसील सेंधवा
जिला बड़वानी
मध्यप्रदेश – 451449
भारत
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
सड़क मार्ग से बड़वानी और सेंधवा से नागलवाड़ी के लिए नियमित बस और निजी वाहन उपलब्ध हैं। बड़वानी से यह स्थान लगभग 55–60 किलोमीटर दूर है।
निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन खंडवा है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्या बाई होलकर हवाई अड्डा है, जहाँ से टैक्सी या बस द्वारा बड़वानी होते हुए नागलवाड़ी पहुँचा जा सकता है।
नागलवाड़ी का भीलट देव मंदिर आस्था, प्रकृति और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम है। यदि आप आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह स्थान आपके लिए अवश्य दर्शनीय है।
Images of Nagalwadi Bhilat Dev Temple, Barwani




श्री बड़ी बिजासन माता मंदिर, सेंधवा (Shri Badi Bijasan Mata Mandir, Sendhwa)


