
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की शांत पहाड़ियों, घने वृक्षों और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित पीपल खूंटा हनुमान मंदिर (Pipal Khunta Hanuman Temple) श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रसिद्ध केंद्र है। यह मंदिर केवल झाबुआ जिले के लोगों की आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के अनेक श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। प्रकृति की गोद में बसे इस मंदिर का वातावरण इतना शांत और मनमोहक है कि यहां पहुंचते ही व्यक्ति स्वयं को सांसारिक भागदौड़ से दूर महसूस करने लगता है।
पीपल खूंटा नाम स्वयं इस स्थान की प्राचीन पहचान को दर्शाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां कभी एक विशाल पीपल का वृक्ष था, जिसके आसपास साधु-संतों द्वारा तपस्या और पूजा-अर्चना की जाती थी। समय के साथ यह स्थान धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया और यहां भगवान हनुमान की प्रतिष्ठा होने के बाद इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। वर्तमान में यह मंदिर एक विशाल धार्मिक परिसर और आश्रम के रूप में विकसित हो चुका है।
मंदिर में विराजमान बजरंगबली की प्रतिमा भक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना और पूजा भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को मंदिर में भक्तों की बड़ी संख्या देखने को मिलती है। इन दिनों श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और भगवान से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मंदिर का प्राकृतिक वातावरण इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ी दृश्य और पक्षियों की मधुर आवाजें यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक अनूठा अनुभव प्रदान करती हैं। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह स्थान आध्यात्मिक साधना, ध्यान और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भी अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
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मंदिर की स्थापना (Establishment of the Temple)

पीपल खूंटा हनुमान मंदिर की स्थापना के संबंध में कई स्थानीय कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि मंदिर की स्थापना से संबंधित कोई विस्तृत लिखित ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों और संतों की परंपराओं के आधार पर यह माना जाता है कि यह स्थान प्राचीन समय से ही साधना और तपस्या का केंद्र रहा है।
कहा जाता है कि वर्षों पहले यह क्षेत्र घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ था। यहां साधु-संत आकर ध्यान और तपस्या किया करते थे। एक समय ऐसा आया जब इस स्थान पर भगवान हनुमान की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कुछ संतों को हुआ। इसके बाद यहां एक छोटी प्रतिमा स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ की गई। धीरे-धीरे आसपास के गांवों के लोगों की श्रद्धा इस स्थान से जुड़ती चली गई और यहां भक्तों का आना-जाना बढ़ने लगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर इस स्थान को विकसित करने का संकल्प लिया। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और एक सुंदर धार्मिक परिसर का निर्माण किया गया। बाद में यहां आश्रम की स्थापना भी की गई, जहां संतों और साधकों के लिए रहने तथा धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की व्यवस्था की गई।
मंदिर की स्थापना केवल एक धार्मिक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम भी बना। यहां आयोजित होने वाले सत्संग, भजन, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों ने लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का कार्य किया।
आज पीपल खूंटा हनुमान मंदिर केवल एक मंदिर नहीं बल्कि श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल भगवान के दर्शन करते हैं बल्कि इस स्थान की दिव्यता और शांति का भी अनुभव करते हैं।
मंदिर का इतिहास (History of the Temple)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर का इतिहास स्थानीय आस्था, संत परंपरा और ग्रामीण संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। झाबुआ जिला प्राचीन काल से ही अपनी आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में पीपल खूंटा क्षेत्र का विकास हुआ।
प्रारंभिक समय में यह स्थान एक साधारण धार्मिक स्थल था जहां स्थानीय लोग पूजा-अर्चना किया करते थे। धीरे-धीरे यहां हनुमान जी के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना था कि यहां की गई प्रार्थनाएं विशेष रूप से फलदायी होती हैं और भगवान हनुमान अपने भक्तों के संकटों का निवारण करते हैं।
समय के साथ इस मंदिर की प्रसिद्धि आसपास के गांवों और जिलों तक फैल गई। लोग यहां धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन करने लगे। इससे मंदिर क्षेत्र में आध्यात्मिक गतिविधियों का विस्तार हुआ। कई संतों और धार्मिक गुरुओं ने भी यहां आकर प्रवचन और सत्संग आयोजित किए, जिससे मंदिर की पहचान और अधिक मजबूत हुई।
मंदिर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पक्ष इसका आश्रम है। आश्रम की स्थापना के बाद यहां धार्मिक शिक्षा, ध्यान और साधना की गतिविधियां बढ़ीं। इसने मंदिर को केवल पूजा स्थल न बनाकर एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।
आज यह मंदिर झाबुआ जिले की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हनुमान जयंती, रामनवमी और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्षों की आस्था और भक्ति ने इस मंदिर को क्षेत्र के सबसे सम्मानित धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाया है।
देवझिरी शिव मंदिर, झाबुआ (Devjhiri Shiv Temple, Jhabua)
मंदिर की वास्तुकला (Architecture of the Temple)

पीपल खूंटा हनुमान मंदिर की वास्तुकला भव्यता और सादगी का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। यह मंदिर आधुनिक निर्माण तकनीकों और पारंपरिक भारतीय धार्मिक स्थापत्य शैली का सुंदर उदाहरण माना जाता है। मंदिर परिसर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव हो सके।
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार आकर्षक और विशाल है, जो भक्तों का स्वागत करता है। प्रवेश करते ही मंदिर परिसर की स्वच्छता और व्यवस्थित संरचना ध्यान आकर्षित करती है। मुख्य गर्भगृह मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, जहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और भक्तिमय है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था जागृत होती है।
मंदिर परिसर में खुले प्रांगण, पूजा स्थल और धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष स्थान बनाए गए हैं। यहां बड़े स्तर पर भजन, कीर्तन और सत्संग आयोजित किए जा सकते हैं। मंदिर के आसपास वृक्षारोपण और प्राकृतिक हरियाली इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है।
आश्रम क्षेत्र भी मंदिर की वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां साधकों और संतों के लिए रहने की व्यवस्था की गई है। आश्रम परिसर का वातावरण अत्यंत शांत और ध्यान के अनुकूल है। कई श्रद्धालु यहां कुछ समय बिताकर मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर किसी प्राचीन विशाल स्मारक जैसा नहीं है, लेकिन इसकी सादगी, स्वच्छता, धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य इसे विशेष बनाते हैं। यही कारण है कि यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति मंदिर की दिव्यता और सौंदर्य से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता।
मंदिर की विशेषताएँ (Special Features of the Temple)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका आध्यात्मिक वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य है। झाबुआ जिले के शांत और हरित क्षेत्र में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यहां पहुंचते ही भक्तों को ऐसा अनुभव होता है मानो वे किसी साधना स्थल में प्रवेश कर रहे हों। मंदिर परिसर में व्याप्त सकारात्मक ऊर्जा, घंटियों की ध्वनि, भजन-कीर्तन और भक्तों की श्रद्धा इस स्थान को विशेष बनाती है।
मंदिर की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता यहां विराजमान भगवान हनुमान की पूजनीय प्रतिमा है। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बजरंगबली यहां अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनते हैं और उनके कष्टों का निवारण करते हैं। इसी कारण दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखने को मिलती है।
मंदिर के साथ स्थित आश्रम भी इसकी प्रमुख पहचान है। यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों, सत्संग, यज्ञ, ध्यान और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का केंद्र है। यहां समय-समय पर धार्मिक गुरुओं और संतों के प्रवचन आयोजित होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।
मंदिर की एक अन्य विशेषता इसका प्राकृतिक परिवेश है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ी क्षेत्र और स्वच्छ वातावरण इसे धार्मिक पर्यटन के लिए आदर्श बनाते हैं। कई श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए ही नहीं बल्कि कुछ समय शांति और ध्यान के लिए भी यहां आते हैं।
हनुमान जयंती, रामनवमी, दीपावली और अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इन अवसरों पर भव्य भंडारे, अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड और भजन संध्याओं का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना देते हैं।
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं बल्कि श्रद्धा, सेवा, आध्यात्मिकता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यही कारण है कि यह मंदिर झाबुआ जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवता (Deities in the Temple Complex)
मंदिर में मुख्य रूप से भगवान हनुमान जी विराजमान हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्वरूपों की भी पूजा की जाती है।
मंदिर परिसर में देखने योग्य स्थान (Places to See Inside the Temple)
मुख्य हनुमान गर्भगृह (Main Hanuman Sanctum)
मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक स्थान मुख्य गर्भगृह है, जहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रतिमा के दर्शन करते ही भक्तों के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत हो जाता है। गर्भगृह के आसपास का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने वाला है।
राम दरबार (Ram Darbar)
मंदिर परिसर में स्थित राम दरबार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। भक्त यहां परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
शिवलिंग एवं शिव मंदिर (Shivling and Shiva Shrine)
भगवान शिव को समर्पित यह स्थान भक्तों को ध्यान और पूजा का अवसर प्रदान करता है। सावन के महीने में यहां विशेष भीड़ रहती है और श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं।
आश्रम परिसर (Ashram Complex)
मंदिर के साथ स्थित आश्रम आध्यात्मिक साधना का केंद्र है। यहां साधु-संत निवास करते हैं और धार्मिक गतिविधियों का संचालन करते हैं। आश्रम का शांत वातावरण ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
भजन एवं सत्संग स्थल (Bhajan and Satsang Hall)
यह वह स्थान है जहां धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
यज्ञशाला (Yagya Area)
मंदिर परिसर में यज्ञ और हवन के लिए विशेष स्थान बनाया गया है। धार्मिक अवसरों पर यहां वैदिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भक्त बड़ी श्रद्धा से भाग लेते हैं।
प्राकृतिक उद्यान और हरित क्षेत्र (Green Surroundings)
मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण अपने आप में एक आकर्षण है। वृक्षों की छाया, शुद्ध हवा और शांत वातावरण भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करते हैं। कई लोग यहां बैठकर ध्यान और जप करते हैं।
धार्मिक ध्वज एवं प्रवेश द्वार (Religious Entrance Gate)
मंदिर का प्रवेश द्वार और ऊंचे धार्मिक ध्वज श्रद्धालुओं का ध्यान तुरंत आकर्षित करते हैं। यह स्थान फोटो लेने और मंदिर की भव्यता को महसूस करने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
इन सभी स्थानों को देखने के बाद श्रद्धालु न केवल धार्मिक संतोष प्राप्त करते हैं बल्कि मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक सुंदरता का भी भरपूर अनुभव करते हैं।
मंदिर में होने वाली आरतियाँ और भजन (Aartis and Bhajans in the Temple)
प्रातःकाल आरती
संध्या आरती
हनुमान चालीसा पाठ
सुंदरकांड पाठ
सामूहिक भजन-कीर्तन
त्योहारों और विशेष अवसरों पर आरतियाँ और भजन अत्यंत भक्तिमय वातावरण में होते हैं।
मंदिर में मनाए जाने वाले पर्व और कार्यक्रम (Festivals and Events)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर में वर्षभर अनेक धार्मिक उत्सव और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन पर्वों के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से भर जाता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु इन आयोजनों में भाग लेकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti)
हनुमान जयंती मंदिर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है। इस अवसर पर भगवान हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है तथा विशाल शोभायात्रा, सुंदरकांड पाठ, हवन और भंडारे का आयोजन होता है। हजारों श्रद्धालु इस दिन मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं। पूरे परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है।
राम नवमी (Ram Navami)
भगवान राम के जन्मोत्सव के अवसर पर रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की जाती है। चूंकि भगवान हनुमान को रामभक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है, इसलिए राम नवमी का उत्सव यहां अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
नवरात्रि (Navratri Festival)
नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में देवी पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई श्रद्धालु उपवास रखकर यहां माता की आराधना करते हैं।
दीपावली (Diwali Festival)
दीपावली के अवसर पर मंदिर को हजारों दीपों से सजाया जाता है। इस दिन विशेष आरती और महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है।
सावन मास (Shravan Month)
सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
सुंदरकांड और अखंड रामायण पाठ
वर्षभर समय-समय पर सुंदरकांड और अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
ये सभी धार्मिक आयोजन मंदिर को केवल पूजा स्थल ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं।
राम दरबार मंदिर, रंगपुरा झाबुआ (Ram Darbar Temple, Rangpura Jhabua)
मंदिर की समय-सारणी (Temple Timings)
मंदिर सामान्यतः
सुबह 6:00 बजे से
शाम 8:00 बजे तक
खुला रहता है।
त्योहारों के दिनों में समय में परिवर्तन संभव है।
मंदिर के आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Places to Visit)
देवझिरी धाम (Devjhiri Dham)
देवझिरी झाबुआ जिले का एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यहां स्थित प्राकृतिक जलधारा और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बेहद खास है।
हनुमान टेकरी, झाबुआ (Hanuman Tekri, Jhabua)
यह झाबुआ शहर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से आसपास के क्षेत्र का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। सूर्यास्त का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक होता है।
कठिवाड़ा (Kathiwada)
कठिवाड़ा अपने प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़ियों और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाता है।
थांदला (Thandla)
थांदला झाबुआ जिले का एक प्रमुख नगर है जो अपने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां स्थानीय बाजार और पारंपरिक जीवनशैली देखने योग्य है।
मेघनगर (Meghnagar)
मेघनगर झाबुआ जिले का एक महत्वपूर्ण कस्बा है और मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन भी यहीं स्थित है। यहां स्थानीय बाजार और धार्मिक स्थल देखे जा सकते हैं।
झाबुआ शहर (Jhabua City)
झाबुआ शहर आदिवासी संस्कृति, रंग-बिरंगे बाजारों और स्थानीय हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। यहां घूमकर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझा जा सकता है।
कालीदेवी मंदिर (Kalidevi Temple)
झाबुआ क्षेत्र का यह प्रसिद्ध देवी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था रखता है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
पेटलावद (Petlawad)
पेटलावद क्षेत्र अपने ग्रामीण परिवेश, स्थानीय संस्कृति और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां का वातावरण मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल की झलक प्रस्तुत करता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ध्यान देने योग्य बातें (Important Tips for Visitors)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर की यात्रा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि आपकी यात्रा सुखद और आध्यात्मिक अनुभव से भरपूर रहे।
सबसे पहले मंदिर परिसर की धार्मिक मर्यादा का सम्मान करें। मंदिर में प्रवेश करते समय स्वच्छ और शालीन वस्त्र पहनना उचित माना जाता है। गर्भगृह के पास शोर-शराबा करने से बचें और अन्य श्रद्धालुओं की पूजा में बाधा न डालें।
मंदिर परिसर को स्वच्छ रखना प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य है। प्रसाद या अन्य सामग्री के रैपर इधर-उधर न फेंकें। निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालें।
त्योहारों और मंगलवार-शनिवार को मंदिर में अत्यधिक भीड़ हो सकती है। इसलिए समय से पहले पहुंचना उचित रहता है। यदि आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
वर्षा ऋतु में मंदिर के आसपास का क्षेत्र हरा-भरा और सुंदर हो जाता है, लेकिन कुछ रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। इसलिए सावधानीपूर्वक चलना चाहिए।
फोटोग्राफी करने से पहले मंदिर प्रबंधन या स्थानीय पुजारियों से अनुमति लेना उचित है। कुछ धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान फोटो खींचने की अनुमति नहीं होती।
मंदिर का पूरा पता (Full Address of the Temple)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर एवं आश्रम
ग्राम पीपल खूंटा
तहसील मेघनगर
जिला झाबुआ
मध्य प्रदेश – 457779
मंदिर का संपूर्ण यात्रा मार्गदर्शन (Complete Travel Guide)
सड़क मार्ग से (By Road)
झाबुआ और मेघनगर से पीपल खूंटा गाँव तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है।
रेल मार्ग से (By Train)
नजदीकी रेलवे स्टेशन मेघनगर है, जहाँ से मंदिर कुछ ही दूरी पर स्थित है।
वायु मार्ग से (By Air)
नजदीकी हवाई अड्डा इंदौर है। इंदौर से सड़क मार्ग द्वारा झाबुआ और फिर पीपल खूंटा पहुँचा जा सकता है।
हनुमान टेकरी झाबुआ (Hanuman Tekri Jhabua)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर, झाबुआ की तस्वीरें (Images of Pipal Khunta Hanuman Temple, Jhabua)



निष्कर्ष (Conclusion)
पीपल खूंटा हनुमान मंदिर झाबुआ जिले का एक पवित्र और शांत धार्मिक स्थल है। यहाँ भक्ति, प्रकृति और अध्यात्म का सुंदर संगम देखने को मिलता है। हनुमान जी के भक्तों और शांति की तलाश करने वालों के लिए यह स्थान अवश्य ही दर्शनीय है।


