
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर मांडू में स्थित उजाला बावड़ी एक ऐसी प्राचीन जल संरचना है, जो अपने नाम की तरह ही रोशनी और शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। “उजाला” शब्द यहां की संरचना और प्रकाश व्यवस्था को दर्शाता है, क्योंकि यह बावड़ी अन्य बावड़ियों की तुलना में अधिक खुली और प्रकाशयुक्त मानी जाती है। यह स्थान इतिहास प्रेमियों, फोटोग्राफर्स और प्रकृति के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए बेहद खास है।
मांडू, जिसे “खुशियों का शहर” भी कहा जाता है, अपनी स्थापत्य कला और प्रेम कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। उसी विरासत का एक सुंदर उदाहरण है यह बावड़ी, जो जल संरक्षण की प्राचीन तकनीकों को दर्शाती है। यहां पहुंचते ही आपको पत्थरों से बनी सीढ़ियों, शांत वातावरण और हल्की ठंडक का एहसास होता है, जो इसे गर्मियों में भी बेहद सुखद बनाता है।
उजाला बावड़ी सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि यह उस समय की इंजीनियरिंग और सौंदर्यबोध का प्रतीक है। इसकी संरचना इस तरह बनाई गई है कि सूरज की रोशनी अंदर तक पहुंचती है, जिससे पानी हमेशा स्वच्छ और उपयोगी बना रहता था। आज भी यह बावड़ी पर्यटकों को आकर्षित करती है और मांडू के ऐतिहासिक पर्यटन का एक अहम हिस्सा है।
इतिहास (History)

उजाला बावड़ी का इतिहास मांडू के स्वर्णिम काल से जुड़ा हुआ है, जब यहां मालवा सल्तनत का शासन था। यह क्षेत्र 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच अपनी समृद्धि और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता था। माना जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण उस समय के शासकों द्वारा जल प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा के लिए कराया गया था।
मांडू एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां पानी की उपलब्धता एक चुनौती थी। ऐसे में बावड़ियों का निर्माण जीवन का आधार बन गया था। उजाला बावड़ी को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया कि इसमें अधिक से अधिक प्राकृतिक रोशनी पहुंचे। यही कारण है कि इसे “उजाला” नाम दिया गया।
इतिहासकारों के अनुसार, यह बावड़ी न केवल पानी का स्रोत थी, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र रही। लोग यहां इकट्ठा होते, बातचीत करते और विश्राम करते थे। इसके आसपास बने पत्थरों के प्लेटफॉर्म इस बात का संकेत देते हैं कि यहां बैठने और आराम करने की व्यवस्था भी थी।
समय के साथ, यह बावड़ी अपनी ऐतिहासिक महत्ता के कारण संरक्षित की गई और आज यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा देखरेख में रखी गई धरोहरों में शामिल है। यह स्थान आज भी उस युग की कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए है।
मलिक मुगीस मस्जिद, धार (Malik Mughith Mosque, Dhar)
वास्तुकला एवं विशेषताएँ (Architecture & Features)
उजाला बावड़ी की सबसे खास बात इसकी अनोखी संरचना है, जो इसे अन्य बावड़ियों से अलग बनाती है। यह बावड़ी चौकोर आकार में बनी हुई है और इसमें नीचे तक जाने के लिए चौड़ी सीढ़ियाँ बनाई गई हैं। इन सीढ़ियों के दोनों ओर मजबूत पत्थरों की दीवारें हैं, जो इसे स्थायित्व प्रदान करती हैं।
इस बावड़ी का डिजाइन ऐसा है कि इसमें प्राकृतिक रोशनी भरपूर मात्रा में प्रवेश करती है। ऊपर से खुला होने के कारण सूरज की किरणें सीधे पानी तक पहुंचती हैं, जिससे यह हमेशा उजली और साफ दिखाई देती है। यही इसकी पहचान और नाम का कारण भी है।
इसके अलावा, यहां का वातावरण बेहद शांत और ठंडा रहता है। पत्थरों की मोटी दीवारें गर्मी को अंदर आने से रोकती हैं, जिससे अंदर का तापमान कम बना रहता है। यह विशेषता इसे गर्मियों में भी एक आरामदायक स्थान बनाती है।
बावड़ी के किनारों पर बनी संरचनाएं दर्शाती हैं कि यहां कभी बैठने और विश्राम करने की व्यवस्था थी। साथ ही, इसकी दीवारों पर हल्की-फुल्की नक्काशी भी देखने को मिलती है, जो उस समय की कला को दर्शाती है।
यह बावड़ी आज भी अपनी मजबूती और सुंदरता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है और मांडू की वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।
अंदर देखने योग्य स्थान व चीज़ें (Things to See Inside)

विशाल सीढ़ीनुमा संरचना (Step Architecture)
उजाला बावड़ी की सीढ़ियाँ इसकी सबसे आकर्षक विशेषता हैं। ये सीढ़ियाँ गहराई तक जाती हैं और एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत करती हैं। नीचे उतरते समय हर स्तर पर अलग अनुभव मिलता है, जो इसे रोमांचक बनाता है। पत्थरों की मजबूती और उनकी सटीक बनावट इस बात का प्रमाण है कि उस समय के कारीगर कितने कुशल थे।
प्राकृतिक रोशनी का खेल (Natural Light Effect)
यहां सूरज की किरणें सीधे पानी पर पड़ती हैं, जिससे एक सुंदर प्रतिबिंब बनता है। सुबह और शाम के समय यह दृश्य बेहद मनमोहक होता है। यही रोशनी इस बावड़ी को “उजाला” नाम देती है।
ठंडा और शांत वातावरण (Cool & Calm Atmosphere)
बावड़ी के अंदर का वातावरण बेहद ठंडा और सुकून भरा होता है। यहां बैठकर आप प्रकृति के बीच शांति का अनुभव कर सकते हैं और शहर की भागदौड़ से दूर सुकून पा सकते हैं।
प्राचीन पत्थर की नक्काशी (Stone Carvings)
दीवारों पर बनी हल्की नक्काशी उस समय की कला को दर्शाती है। यह इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है।
खुलने का समय (Timings)
उजाला बावड़ी सामान्यतः सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है।
प्रवेश शुल्क (Entry Ticket)
उजाला बावड़ी देखने के लिए सामान्यतः मांडू स्मारक समूह टिकट लिया जाता है:
- भारतीय पर्यटक – लगभग ₹25
- विदेशी पर्यटक – लगभग ₹100
शुल्क समय के अनुसार बदल सकता है।
कारवां सराय, धार (Caravan Sarai, Dhar)
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Attractions)
जहाज महल (Jahaz Mahal)
जहाज महल मांडू का सबसे प्रसिद्ध महल है, जो दो जलाशयों के बीच स्थित होने के कारण पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है। इसकी लंबी संरचना और रात में रोशनी का प्रतिबिंब इसे बेहद आकर्षक बनाता है।
हिंडोला महल (Hindola Mahal)
हिंडोला महल अपनी झुकी हुई दीवारों के कारण “झूला महल” के नाम से भी जाना जाता है। यह अपने अनोखे आर्किटेक्चर के लिए प्रसिद्ध है।
रूपमती मंडप (Rani Roopmati Pavilion)
रूपमती मंडप से नर्मदा नदी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है और यह बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी से जुड़ा हुआ है।
बाज बहादुर महल (Baz Bahadur Palace)
बाज बहादुर महल संगीत प्रेमी शासक बाज बहादुर का निवास स्थान था, जो अपनी ध्वनि गूंजने वाली संरचना और सुंदरता के लिए जाना जाता है।
यहाँ ध्यान देने योग्य बातें (Important Tips)
उजाला बावड़ी की यात्रा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सीढ़ियाँ गहरी और कभी-कभी फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए आरामदायक जूते पहनें। बारिश के मौसम में विशेष सावधानी रखें।
यह एक ऐतिहासिक धरोहर है, इसलिए यहां साफ-सफाई बनाए रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। कूड़ा न फैलाएं और संरचना को नुकसान न पहुंचाएं।
गर्मी के मौसम में पानी और टोपी साथ रखें, हालांकि बावड़ी के अंदर ठंडक रहती है, लेकिन बाहर का मौसम गर्म हो सकता है।
पूरा पता (Full Address)
उजाला बावड़ी, मांडू किला क्षेत्र, मांडू, जिला धार,
मध्य प्रदेश – 454010, भारत
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
सड़क मार्ग से (By Road)
इंदौर से मांडू की दूरी लगभग 95 किलोमीटर है। इंदौर से बस, टैक्सी और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग से (By Train)
निकटतम रेलवे स्टेशन – इंदौर जंक्शन (लगभग 95 किमी)
हवाई मार्ग से (By Air)
निकटतम हवाई अड्डा – देवी अहिल्या बाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
इंदौर से मांडू तक टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
उजाला बावली, मांडू, धार की तस्वीरें (Images of Ujala Baoli, Mandu, Dhar)



निष्कर्ष (Conclusion)
उजाला बावड़ी मांडू की उन ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है, जो आज भी अपने रहस्य, सुंदरता और वास्तुकला से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यदि आप इतिहास, स्थापत्य और प्राकृतिक ठंडक का अनोखा अनुभव करना चाहते हैं, तो उजाला बावड़ी आपकी यात्रा सूची में अवश्य शामिल होनी चाहिए।


