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tourist places in india in Hindi छिंदवाड़ा के दर्शनीय और पर्यटन स्थल (Tourist and Sightseeing Places of Chhindwara)

कन्हरगांवबांध (Kanhargaon Dam), छिंदवाड़ा — प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल स्थल (The Precious Natural Beauty of Kanhargaon Dam, Chhindwara)

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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की प्राकृतिक धरोहरों में कन्हरगांवबांध (Kanhargaon Dam) एक ऐसा शांत और मनमोहक स्थल है, जहाँ प्रकृति अपनी सबसे खूबसूरत छटा बिखेरती दिखाई देती है। शहर की भीड़भाड़ और शोरगुल से दूर स्थित यह जलाशय उन लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं, जो कुछ समय प्रकृति की गोद में सुकून के साथ बिताना चाहते हैं। चारों ओर फैली हरियाली, विशाल जलराशि, ठंडी हवाएँ और पक्षियों की मधुर आवाज़ इस स्थान को एक आदर्श प्राकृतिक पर्यटन स्थल बनाती हैं।

कन्हरगांवबांध केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि यह छिंदवाड़ा क्षेत्र के जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा विकसित यह बांध मुख्य रूप से कुलबेहरा नदी (Kulbehra River) पर निर्मित है। इसका निर्माण वर्ष 1986 में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संग्रह, कृषि सिंचाई तथा आसपास के क्षेत्रों एवं छिंदवाड़ा शहर के लिए पेयजल उपलब्ध कराना है।

मानसून के दौरान जब बांध पूरी क्षमता तक भर जाता है, तब यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक हो जाता है। दूर-दूर तक फैला नीला जल, हरे-भरे पहाड़, खेत और बादलों से घिरा आकाश किसी प्राकृतिक चित्र जैसा प्रतीत होता है। यही कारण है कि स्थानीय लोग यहाँ सुबह-शाम घूमने, फोटोग्राफी करने, पिकनिक मनाने और प्रकृति का आनंद लेने आते हैं।

यदि आप छिंदवाड़ा की ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहाँ शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और ताज़ी हवा का अद्भुत संगम मिले, तो कन्हरगांवबांध आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए। यहाँ आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ भले सीमित हों, लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

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इतिहास और उद्देश्य (History and Purpose)

kanhargaon dam chhindwara

कन्हरगांवबांध का इतिहास छिंदवाड़ा जिले के विकास और जल प्रबंधन से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1980 के दशक में छिंदवाड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पाता था। वर्षा पर निर्भर खेती के कारण किसानों को हर साल अनिश्चित मौसम और सूखे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग ने कुलबेहरा नदी पर एक ऐसे बांध के निर्माण की योजना बनाई, जो वर्षा जल का संरक्षण कर सके और कृषि के साथ-साथ पेयजल की जरूरतों को भी पूरा कर सके।

इसी योजना के तहत वर्ष 1986 में कन्हरगांवबांध का निर्माण पूरा हुआ। बांध बनने के बाद आसपास के अनेक गांवों में सिंचाई व्यवस्था बेहतर हुई और किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी की खेती करने में भी सहायता मिलने लगी। समय के साथ यह जलाशय छिंदवाड़ा शहर के लिए भी जल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया।

हालांकि इस बांध का निर्माण धार्मिक या ऐतिहासिक स्मारक के रूप में नहीं हुआ था, लेकिन वर्षों के दौरान इसकी प्राकृतिक सुंदरता ने इसे स्थानीय पर्यटन स्थल का दर्जा दिला दिया। पहले जहाँ केवल स्थानीय ग्रामीण और मछुआरे ही यहाँ आते थे, वहीं आज यह स्थान छिंदवाड़ा के लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में जब बांध के गेट खोले जाते हैं और पानी का तेज बहाव दिखाई देता है, तब बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुँचते हैं।

आज कन्हरगांवबांध केवल जल संरक्षण की एक परियोजना नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा जिले की प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है। यह स्थान इस बात का प्रमाण है कि विकास परियोजनाएँ भी समय के साथ पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।

विशेषताएँ और आकर्षण (Features and Attractions)

कन्हरगांवबांध की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक शांति और हरियाली है। यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है जो शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं। चारों ओर फैले जंगल, पहाड़ और विशाल जलाशय इस स्थान को बेहद आकर्षक बनाते हैं।

इस बांध का विशाल जल क्षेत्र सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बेहद सुंदर दिखाई देता है। सुबह की हल्की धूप जब पानी पर पड़ती है तो पूरा जलाशय सुनहरी आभा से चमक उठता है। वहीं शाम के समय डूबते सूरज का प्रतिबिंब पानी में दिखाई देना यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बन जाता है।

मानसून के मौसम में यह बांध अपनी वास्तविक सुंदरता में दिखाई देता है। वर्षा के बाद जलाशय पूरी तरह भर जाता है और आसपास की पहाड़ियाँ हरी चादर ओढ़ लेती हैं। इसी समय अनेक प्रकार के प्रवासी और स्थानीय पक्षी भी यहाँ देखे जा सकते हैं, जिससे यह स्थान बर्ड वॉचिंग के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

यहाँ का वातावरण प्रदूषण रहित और शांत है, इसलिए परिवार के साथ पिकनिक, दोस्तों के साथ घूमने, फोटोग्राफी, वीडियो शूट और प्रकृति अवलोकन के लिए यह बेहतरीन स्थान है। कई स्थानीय फोटोग्राफर प्री-वेडिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए भी इस स्थान को पसंद करते हैं।

कन्हरगांवबांध का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह छिंदवाड़ा शहर से अधिक दूर नहीं है, जिससे एक दिन में आसानी से यहाँ घूमकर वापस लौटा जा सकता है। यदि आप प्राकृतिक पर्यटन, शांत वातावरण और सुंदर दृश्यों का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह स्थान निश्चित रूप से आपको निराश नहीं करेगा।

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देखने योग्य चीजें (Things to See)

कन्हरगांवबांध केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और मनोरम दृश्यों से भरपूर पर्यटन स्थल है। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए कई ऐसे स्थान हैं, जहाँ समय बिताना एक यादगार अनुभव बन जाता है।

1. विशाल जलाशय (Massive Reservoir)

कन्हरगांवबांध का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विशाल जलाशय है। दूर-दूर तक फैला हुआ नीला पानी और उसके चारों ओर फैली हरियाली किसी प्राकृतिक चित्र जैसा दृश्य प्रस्तुत करती है। सुबह और शाम के समय यहाँ का वातावरण अत्यंत मनमोहक होता है। यदि आप प्रकृति के बीच शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह स्थान सबसे उपयुक्त है।

2. बांध का व्यू पॉइंट (Dam View Point)

बांध के ऊपरी भाग से पूरे जलाशय और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। यहाँ खड़े होकर आप दूर-दूर तक फैले पानी, खेतों और पहाड़ियों को एक साथ देख सकते हैं। मानसून के दौरान यह दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है।

3. मानसून में ओवरफ्लो का दृश्य (Overflow View During Monsoon)

बारिश के मौसम में जब बांध पूरी क्षमता तक भर जाता है और अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है, तब यहाँ का दृश्य देखने योग्य होता है। तेज़ी से गिरता हुआ पानी और उसकी गर्जना पर्यटकों को रोमांचित कर देती है। यही समय फोटोग्राफी और वीडियो बनाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

4. प्राकृतिक हरियाली और जंगल (Natural Green Forest Area)

बांध के चारों ओर फैली हरियाली इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है। बरसात के मौसम में पूरा क्षेत्र हरे रंग की चादर से ढक जाता है। यहाँ टहलते समय आपको कई प्रकार के पेड़-पौधे और प्राकृतिक वनस्पतियाँ देखने को मिलती हैं।

5. सनराइज और सनसेट पॉइंट (Sunrise & Sunset Spot)

यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बिल्कुल भी न छोड़ें। पानी पर पड़ती सूर्य की सुनहरी किरणें पूरे वातावरण को बेहद आकर्षक बना देती हैं। कई स्थानीय लोग केवल इस दृश्य का आनंद लेने के लिए सुबह और शाम यहाँ आते हैं।

6. बर्ड वॉचिंग (Bird Watching)

सर्दियों और मानसून के दौरान इस क्षेत्र में अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं। पक्षियों की मधुर आवाज़ और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यदि आपके पास दूरबीन या कैमरा हो, तो यह अनुभव और भी शानदार हो जाता है।

7. पिकनिक स्पॉट (Picnic Area)

परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए कन्हरगांवबांध एक शानदार पिकनिक स्थल है। सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यहाँ स्थानीय लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। खुले वातावरण में बैठकर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना यहाँ की सबसे खास बात है।

समय और प्रवेश शुल्क (Timings and Entry Fee)

  • खुलने का समय (Opening Hours): सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30-7:00 बजे तक (6:00 AM to 6:30-7:00 PM)
  • प्रवेश शुल्क (Entry Fee): कोई प्रवेश शुल्क नहीं — यह एक सार्वजनिक स्थल है (No entry fee – it is a public place)

पातालेश्वर शिव मंदिर, छिंदवाड़ा

कैसे पहुंचें — ट्रैवल गाइड (How to Reach – Travel Guide)

  • सड़क मार्ग (By Road): छिंदवाड़ा शहर से लगभग 40 किमी की दूरी, टैक्सी या बाइक से आसानी से पहुँचा जा सकता है (Approx. 40 km from Chhindwara, reachable by taxi or bike)
  • निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station): छिंदवाड़ा जंक्शन (Chhindwara Junction)
  • निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport): नागपुर (Nagpur), इसके बाद सड़क मार्ग से छिंदवाड़ा और फिर कन्हरगांव (Then by road to Chhindwara and Kanhargaon)

हनुमान मंदिर, सिमरिया, छिंदवाड़ा

पता और गूगल मैप (Address and Google Map)

स्थान (Location): ग्राम कन्हरगांव, तहसील बिछुआ, छिंदवाड़ा जिला, मध्य प्रदेश (PIN – 480331)

आस-पास देखने लायक स्थल (Nearby Places to Visit)

यदि आप कन्हरगांवबांध घूमने आते हैं, तो आसपास स्थित कई प्राकृतिक, धार्मिक और मनोरम स्थानों की यात्रा भी कर सकते हैं। एक दिन की यात्रा में इन सभी स्थानों को आसानी से शामिल किया जा सकता है।

1. जामसांवली हनुमान मंदिर (Jamsaoli Hanuman Temple)

छिंदवाड़ा जिले का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जामसांवली हनुमान मंदिर कन्हरगांवबांध से अधिक दूर नहीं है। मान्यता है कि यहाँ विराजमान हनुमान जी के दर्शन करने से शनि दोष और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। विशाल मंदिर परिसर, शांत वातावरण और धार्मिक आस्था इसे जिले के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में शामिल करते हैं।

2. देवगढ़ किला (Deogarh Fort)

यदि आपको इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि है, तो देवगढ़ किला अवश्य देखें। पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन किला गोंड शासनकाल की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है। यहाँ से आसपास के जंगलों और घाटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थान बेहद आकर्षक है।

3. पातालकोट घाटी (Patalkot Valley)

कन्हरगांवबांध से कुछ दूरी पर स्थित पातालकोट घाटी छिंदवाड़ा की सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहरों में से एक है। लगभग 1,200 फीट गहरी यह घाटी अपनी जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी रोमांच से कम नहीं है।

4. तामिया हिल स्टेशन (Tamia Hill Station)

यदि आपके पास अतिरिक्त समय हो, तो तामिया अवश्य जाएँ। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित यह खूबसूरत हिल स्टेशन अपने व्यू पॉइंट, ठंडी जलवायु, जंगलों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मानसून और सर्दियों में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है।

5. छिंदवाड़ा शहर (Chhindwara City)

कन्हरगांवबांध से लौटते समय आप छिंदवाड़ा शहर के प्रमुख मंदिरों, स्थानीय बाजारों, पार्कों और भोजनालयों का भी आनंद ले सकते हैं। यहाँ आपको स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुएँ भी देखने को मिलती हैं।

6. आदिवासी संग्रहालय (Tribal Museum, Chhindwara)

यदि आप छिंदवाड़ा की संस्कृति और इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, तो आदिवासी संग्रहालय अवश्य जाएँ। यहाँ गोंड, भील और अन्य जनजातियों की संस्कृति, परंपराएँ, जीवनशैली और प्राचीन वस्तुओं का सुंदर संग्रह देखने को मिलता है।

टिप्स और उपयोगी बातें (Tips and Useful Information)

  • कन्हरगांवबांध एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, इसलिए यहाँ घूमते समय कुछ सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
  • मानसून के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए पानी के बिल्कुल किनारे जाने से बचें।
  • यदि बांध के गेट खुले हों, तो सुरक्षा बैरिकेड पार न करें।
  • तैरने या गहरे पानी में उतरने का प्रयास बिल्कुल न करें।
  • छोटे बच्चों पर हमेशा विशेष ध्यान रखें।
  • प्लास्टिक, बोतलें और अन्य कचरा यहाँ न फैलाएँ तथा प्राकृतिक वातावरण को स्वच्छ रखें।
  • बारिश के मौसम में फिसलन अधिक होती है, इसलिए अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें।
  • शाम होने से पहले वापस लौटना अधिक सुरक्षित रहता है।
  • गर्मियों में पानी, टोपी और सनस्क्रीन साथ रखें।
  • यदि पिकनिक मनाने आए हैं, तो भोजन का बचा हुआ कचरा अपने साथ वापस ले जाएँ।
  • वन्य जीव या पक्षी दिखाई दें तो उन्हें परेशान न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

छोटा महादेव मंदिर, जमुनिया, छिंदवाड़ा (Chhota Mahadev Temple, Jamunia, Chhindwara)

Images of Kanhargaon Dam, Chhindwara

निष्कर्ष (Conclusion)

कन्हरगांवबांध अपने शांत और खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण के कारण एक अद्भुत ट्रैवल स्पॉट है। यह परिवार, फ़ोटोग्राफ़ी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श डे‑ट्रिप स्थल है। हरियाली, पानी और खुला आसमान इसे एक यादगार अनुभव बनाते हैं।

श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय, छिंदवाड़ा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कन्हरगांवबांध कहाँ स्थित है?

कन्हरगांवबांध मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख जलाशय है। यह छिंदवाड़ा शहर से लगभग 15–20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

2. कन्हरगांवबांध किस नदी पर बना है?

कन्हरगांवबांध का निर्माण कुलबेहरा नदी (Kulbehra River) पर किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई, जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

3. कन्हरगांवबांध का निर्माण कब हुआ था?

कन्हरगांवबांध का निर्माण वर्ष 1986 में मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था।

4. कन्हरगांवबांध घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय जुलाई से फरवरी तक माना जाता है। विशेष रूप से मानसून और सर्दियों में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है।

5. क्या कन्हरगांवबांध में प्रवेश के लिए टिकट लगता है?

नहीं। वर्तमान में कन्हरगांवबांध में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है और यहाँ घूमने के लिए किसी प्रकार का एंट्री टिकट नहीं लिया जाता।

6. कन्हरगांवबांध का समय (Timings) क्या है?

हालाँकि यह एक सार्वजनिक स्थल है, फिर भी पर्यटकों के लिए सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

7. क्या कन्हरगांवबांध परिवार और बच्चों के साथ घूमने के लिए अच्छा स्थान है?

हाँ, यह परिवार, दोस्तों और बच्चों के साथ पिकनिक मनाने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक स्थल है। हालांकि बच्चों को पानी के किनारे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

8. क्या कन्हरगांवबांध में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है?

वर्तमान समय में कन्हरगांवबांध पर नियमित सार्वजनिक बोटिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। यात्रा से पहले स्थानीय जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

9. कन्हरगांवबांध में कौन-कौन सी गतिविधियाँ की जा सकती हैं?

यहाँ आप प्राकृतिक दृश्य देख सकते हैं, फोटोग्राफी कर सकते हैं, बर्ड वॉचिंग का आनंद ले सकते हैं, पिकनिक मना सकते हैं, सूर्योदय और सूर्यास्त का खूबसूरत नज़ारा देख सकते हैं तथा शांत वातावरण में समय बिता सकते हैं।

10. कन्हरगांवबांध के आसपास कौन-कौन से प्रमुख पर्यटन स्थल हैं?

कन्हरगांवबांध के आसपास जामसांवली हनुमान मंदिर, देवगढ़ किला, पातालकोट घाटी, तामिया हिल स्टेशन, आदिवासी संग्रहालय तथा छिंदवाड़ा शहर के अन्य दर्शनीय स्थल घूमे जा सकते हैं।

11. क्या मानसून में कन्हरगांवबांध घूमना सुरक्षित है?

हाँ, लेकिन सावधानी बरतना आवश्यक है। यदि बांध के गेट खुले हों या जलस्तर अधिक हो, तो सुरक्षा बैरिकेड पार न करें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

12. कन्हरगांवबांध तक कैसे पहुँचा जा सकता है?

कन्हरगांवबांध तक सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा जंक्शन और निकटतम हवाई अड्डा नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वहाँ से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा बांध तक पहुँचा जा सकता है।

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