
मध्यप्रदेश का छिंदवाड़ा जिला प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इन्हीं धरोहरों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय (Shri Badal Bhoi State Tribal Museum)। यह संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, कला, जीवनशैली और इतिहास का जीवंत दस्तावेज़ है। यदि आप जनजातीय जीवन को नज़दीक से समझना चाहते हैं, तो यह संग्रहालय आपके लिए किसी ज्ञान-यात्रा से कम नहीं है।
संग्रहालय में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप आधुनिक शहर से निकलकर आदिवासी संस्कृति की एक अलग दुनिया में पहुँच गए हों। यहाँ प्रदर्शित पारंपरिक आभूषण, हथियार, कृषि उपकरण, धार्मिक प्रतीक, लोक वाद्ययंत्र, मिट्टी और लकड़ी की कलाकृतियाँ, जनजातीय चित्रकला, वस्त्र तथा जीवन से जुड़ी अनेक दुर्लभ वस्तुएँ सदियों पुरानी परंपराओं की कहानी सुनाती हैं। संग्रहालय की प्रत्येक दीर्घा किसी न किसी जनजाति के रहन-सहन, त्योहारों, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान को विस्तार से प्रस्तुत करती है।
यह संग्रहालय विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहास प्रेमियों, पर्यटकों और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनियाँ नहीं देखते, बल्कि भारत की विविध जनजातीय विरासत को महसूस भी करते हैं। यदि आप छिंदवाड़ा घूमने का विचार बना रहे हैं, तो श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय आपकी यात्रा का ऐसा पड़ाव है, जहाँ इतिहास, संस्कृति और ज्ञान एक साथ आपका स्वागत करते हैं।
संग्रहालय का इतिहास (History of the Museum)

श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय का इतिहास लगभग सात दशक पुराना है और यह मध्यप्रदेश की जनजातीय विरासत के संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। इस संग्रहालय की स्थापना 20 अप्रैल 1954 को जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न आदिवासी समाजों से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह, संरक्षण और अध्ययन करना था ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें।
समय के साथ संग्रहालय का संग्रह लगातार बढ़ता गया और इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 1975 में इसे राज्य संग्रहालय का दर्जा प्रदान किया गया। इसके बाद यहाँ नई दीर्घाओं का विकास हुआ तथा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों से संबंधित हजारों दुर्लभ वस्तुओं को व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया जाने लगा। आज यह संग्रहालय गोंड, बैगा, भील, कोरकू, भारिया, सहरिया, कोल, हल्बा और अन्य अनेक जनजातियों की सांस्कृतिक धरोहरों का महत्वपूर्ण केंद्र है।
इस संग्रहालय का वर्तमान नाम 8 सितंबर 1997 को स्वतंत्रता सेनानी एवं आदिवासी समाज के सम्मानित व्यक्तित्व श्री बादल भोई की स्मृति में रखा गया। उनके नाम पर संग्रहालय का नामकरण आदिवासी समाज के योगदान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
आज श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय मध्यप्रदेश का सबसे प्रमुख आदिवासी संग्रहालय माना जाता है। यहाँ हजारों दुर्लभ पुरावशेष, लोक कलाएँ, धार्मिक सामग्री, पारंपरिक हथियार, आभूषण, वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प और जनजातीय जीवन से जुड़ी अनेक वस्तुएँ सुरक्षित रखी गई हैं। यह संग्रहालय केवल इतिहास का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की जनजातीय संस्कृति को समझने और संरक्षित करने का एक जीवंत केंद्र है।
संग्रहालय की विशेषताएँ (Key Features of the Museum)
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय केवल एक सामान्य संग्रहालय नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति का सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध ज्ञान केंद्र माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लगभग 45 जनजातियों की जीवनशैली, संस्कृति, परंपराएँ, धार्मिक मान्यताएँ और लोक कला को एक ही परिसर में देखने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि इसे मध्यप्रदेश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा आदिवासी संग्रहालय कहा जाता है।
संग्रहालय में प्रवेश करते ही इसकी सुंदर दीर्घाएँ, पारंपरिक सजावट और आदिवासी जीवन के वास्तविक दृश्य पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहाँ केवल वस्तुएँ ही नहीं रखी गई हैं, बल्कि आदिवासी परिवारों के जीवन, उनके घर, खेती, त्योहार, विवाह, नृत्य, संगीत और दैनिक गतिविधियों को वास्तविक आकार के मॉडलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इन मॉडलों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो आदिवासी जीवन आपके सामने जीवंत हो उठा हो।
इस संग्रहालय की एक और विशेषता इसका विशाल संग्रह है। यहाँ आदिवासी समुदायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक हथियार, कृषि उपकरण, मिट्टी एवं धातु के बर्तन, लकड़ी की कलाकृतियाँ, बांस से बने घरेलू सामान, धार्मिक प्रतीक, देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ, लोक वाद्ययंत्र, पारंपरिक वस्त्र और दुर्लभ आभूषण सुरक्षित रखे गए हैं। इन वस्तुओं के साथ उनकी जानकारी भी दी गई है, जिससे पर्यटक प्रत्येक प्रदर्शनी को आसानी से समझ सकते हैं।
संग्रहालय में जनजातीय चित्रकला, गोदना (टैटू) कला, लोक नृत्य, लोक संगीत तथा औषधीय वनस्पतियों से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। यह स्थान विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, फोटोग्राफी और संस्कृति प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। यहाँ का शांत वातावरण, व्यवस्थित प्रदर्शन और ऐतिहासिक महत्व हर आयु वर्ग के पर्यटक को प्रभावित करता है और आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत से परिचित कराता है।
पातालेश्वर शिव मंदिर, छिंदवाड़ा (Pataleshwar Shiv Temple, Chhindwara)
संग्रहालय के अंदर देखने योग्य चीजें (Things to See Inside the Museum)

1. आदिवासी जीवनशैली दीर्घा (Tribal Lifestyle Gallery)
यह संग्रहालय की सबसे लोकप्रिय दीर्घाओं में से एक है। यहाँ गोंड, बैगा, भारिया, कोरकू, भील और अन्य जनजातियों के पारंपरिक घरों को वास्तविक आकार में प्रदर्शित किया गया है। मिट्टी, लकड़ी और बांस से बने इन घरों को देखकर यह समझा जा सकता है कि आदिवासी समुदाय प्रकृति के साथ किस प्रकार सामंजस्य बनाकर जीवन व्यतीत करता है। घरों के अंदर रखे दैनिक उपयोग के सामान, रसोई, अनाज भंडारण और पारिवारिक व्यवस्था को भी बारीकी से दर्शाया गया है, जिससे पर्यटक उनके जीवन को करीब से समझ सकते हैं।
2. पारंपरिक हथियार एवं शिकार उपकरण
इस भाग में तीर-कमान, भाले, कुल्हाड़ियाँ, तलवारें, शिकारी जाल, मछली पकड़ने के उपकरण और जंगल में उपयोग होने वाले अनेक पारंपरिक साधन प्रदर्शित किए गए हैं। इन वस्तुओं से पता चलता है कि आदिवासी समाज प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कितनी समझदारी और संतुलित तरीके से करता था। प्रत्येक वस्तु के साथ उसका उपयोग भी बताया गया है, जिससे यह अनुभाग इतिहास और संस्कृति दोनों की जानकारी देता है।
3. आदिवासी आभूषण एवं पारंपरिक वेशभूषा
यह दीर्घा विशेष रूप से महिलाओं और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित करती है। यहाँ चाँदी, पीतल, तांबा, मनके और प्राकृतिक वस्तुओं से बने पारंपरिक आभूषण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके साथ विभिन्न जनजातियों की रंग-बिरंगी वेशभूषा भी देखने को मिलती है, जो उनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक प्रस्तुत करती है। प्रत्येक जनजाति की पोशाक में अलग-अलग रंग, डिज़ाइन और हस्तकला देखने योग्य है।
4. लोक संगीत एवं पारंपरिक वाद्ययंत्र
आदिवासी संस्कृति में संगीत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस अनुभाग में ढोल, मांदर, नगाड़ा, बाँसुरी, तुरही, थाली तथा अनेक पारंपरिक वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि इनका उपयोग विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठानों और लोक नृत्यों में किस प्रकार किया जाता था। यह अनुभाग आदिवासी संगीत परंपरा को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।
5. आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी एवं गौरव गैलरी
यह गैलरी आदिवासी समाज के उन महान वीरों को समर्पित है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और समाज सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहाँ श्री बादल भोई, टंट्या भील, भीमा नायक, शंकर शाह, रघुनाथ शाह सहित अनेक आदिवासी नायकों के जीवन और संघर्ष को चित्रों, कलाकृतियों तथा विवरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह अनुभाग नई पीढ़ी को आदिवासी वीरों के इतिहास से परिचित कराता है और उनके बलिदान को सम्मानपूर्वक याद करता है।
6. खुली प्रदर्शनी (Open Gallery)
संग्रहालय परिसर में स्थित खुली प्रदर्शनी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहाँ बड़े आकार की जनजातीय प्रतिमाएँ, पारंपरिक घरों की प्रतिकृतियाँ, कृषि उपकरण, धार्मिक प्रतीक और सांस्कृतिक संरचनाएँ खुले वातावरण में प्रदर्शित की गई हैं। यहाँ घूमते हुए पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच आदिवासी संस्कृति का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते हैं। फोटोग्राफी के लिए भी यह स्थान अत्यंत लोकप्रिय माना जाता है और परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक शांत एवं ज्ञानवर्धक वातावरण उपलब्ध कराता है।
7. औषधीय वनस्पति एवं पारंपरिक चिकित्सा अनुभाग
आदिवासी समुदाय सदियों से जंगलों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों के माध्यम से अनेक रोगों का उपचार करते आए हैं। इस दीर्घा में औषधीय पौधों, जड़ों, बीजों तथा वनस्पतियों की जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि विभिन्न जनजातियाँ किस प्रकार प्राकृतिक औषधियों का उपयोग करती थीं। आयुर्वेद, वनस्पति विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह अनुभाग विशेष रूप से उपयोगी है।
संग्रहालय की समय-सारणी (Museum Timings)
संग्रहालय सामान्यतः सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है।
सोमवार और कुछ सरकारी अवकाशों में संग्रहालय बंद रहता है।
माँ हिंगलाज शक्ति पीठ छिंदवाड़ा: आस्था, भक्ति और चमत्कार का अद्भुत केंद्र
प्रवेश टिकट (Entry Ticket)
संग्रहालय का प्रवेश शुल्क बहुत ही किफायती है। आमतौर पर 5 से 10 रुपये प्रति व्यक्ति लिया जाता है। छात्रों और शैक्षणिक समूहों के लिए यह स्थान विशेष रूप से उपयोगी है।
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Tourist Places)
1. पातालेश्वर शिव मंदिर (Pataleshwar Shiv Temple)
छिंदवाड़ा शहर का यह प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर का शांत वातावरण, प्राचीन शिवलिंग और धार्मिक महत्व इसे विशेष बनाते हैं। यदि आप संग्रहालय देखने के बाद आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह स्थान अवश्य जाएँ।
2. अमर जवान स्मृति (Amar Jawan Smriti)
यह स्मारक देश के वीर सैनिकों को समर्पित है। यहाँ का सुंदर उद्यान, युद्ध स्मारक और शांत वातावरण पर्यटकों को देशभक्ति की भावना से भर देता है। शाम के समय यहाँ घूमना अत्यंत सुखद अनुभव होता है।
3. प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी पार्क (Priyadarshini Indira Gandhi Park)
परिवार और बच्चों के साथ समय बिताने के लिए यह पार्क एक शानदार स्थान है। यहाँ हरियाली, पैदल घूमने के रास्ते, बच्चों के खेल क्षेत्र और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। स्थानीय लोग भी सुबह और शाम की सैर के लिए यहाँ आते हैं।
4. छोटा महादेव मंदिर, जमुनिया (Chhota Mahadev Temple)
प्राकृतिक गुफाओं और भगवान शिव की अद्भुत उपासना के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर छिंदवाड़ा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। वर्षा ऋतु में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और भी अधिक आकर्षक हो जाता है।
5. देवगढ़ किला (Deogarh Fort)
इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए देवगढ़ किला एक बेहतरीन स्थान है। पहाड़ी पर स्थित यह किला अपने ऐतिहासिक महत्व, प्राचीन निर्माण शैली और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
6. माचागोरा बांध (Machagora Dam)
प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए माचागोरा बांध एक आदर्श पर्यटन स्थल है। यहाँ का विशाल जलाशय, हरियाली और सूर्यास्त का दृश्य पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।
7. सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, सिमरिया (Siddheshwar Hanuman Temple)
101 फीट ऊँची भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा के कारण यह मंदिर पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह फोटोग्राफी और दर्शनीय स्थल के रूप में भी लोकप्रिय है।
यहाँ जाते समय ध्यान देने योग्य बातें (Important Things to Note)
यदि आप श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने से आपका भ्रमण अधिक आरामदायक और यादगार बन सकता है। यह संग्रहालय केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए यहाँ प्रत्येक पर्यटक से अनुशासित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
सबसे पहले, संग्रहालय के खुलने के समय की जानकारी लेकर ही यात्रा करें। सुबह के समय यहाँ अपेक्षाकृत कम भीड़ होती है, जिससे आप प्रत्येक दीर्घा को आराम से देख सकते हैं। संग्रहालय को अच्छी तरह देखने के लिए कम से कम 2 से 3 घंटे का समय अवश्य निकालें।
प्रदर्शित वस्तुएँ कई दशकों और कुछ मामलों में सदियों पुरानी हैं। इसलिए किसी भी कलाकृति, मूर्ति, हथियार, आभूषण या अन्य ऐतिहासिक वस्तु को हाथ न लगाएँ। इससे वस्तुओं को नुकसान पहुँच सकता है। संग्रहालय के नियमों का पालन करें और कर्मचारियों के निर्देशों का सम्मान करें।
यदि आप फोटोग्राफी करना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित दीर्घा में फोटो लेने की अनुमति है या नहीं। कुछ स्थानों पर फ्लैश फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी प्रतिबंधित हो सकती है।
संग्रहालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखें। प्लास्टिक, पानी की बोतल या अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें। बच्चों के साथ आए हैं तो उन्हें भी प्रदर्शनी की वस्तुओं से दूरी बनाए रखने के लिए समझाएँ।
गर्मी के मौसम में हल्के कपड़े पहनें और अपने साथ पानी की बोतल रखें। यदि आप इतिहास, संस्कृति या फोटोग्राफी में रुचि रखते हैं, तो नोटबुक या कैमरा साथ ले जा सकते हैं। संग्रहालय में शांति बनाए रखें ताकि अन्य पर्यटक भी आराम से प्रदर्शनी का आनंद ले सकें।
संग्रहालय का पूरा पता (Full Address)
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय
सर्कुलर रोड, शुभम कॉलोनी के पास
छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश – 480001, भारत
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय छिंदवाड़ा शहर के मध्य भाग में स्थित है। शहर के प्रमुख बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से यहाँ पहुँचना काफी आसान है। सड़क मार्ग भी अच्छी स्थिति में है, इसलिए निजी वाहन से यात्रा करने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती।
सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें
छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, जबलपुर, नागपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा और बैतूल से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नियमित बस सेवाएँ और टैक्सी आसानी से उपलब्ध रहती हैं। यदि आप स्वयं की कार या बाइक से यात्रा कर रहे हैं, तो शहर के बीच स्थित होने के कारण संग्रहालय तक पहुँचना सरल है।
रेल मार्ग से कैसे पहुँचें
निकटतम रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा जंक्शन है। यह स्टेशन मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से संग्रहालय की दूरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर है, जिसे ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा या टैक्सी द्वारा लगभग 10–15 मिनट में तय किया जा सकता है।
हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें
संग्रहालय के लिए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर है, जो लगभग 125–130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा लगभग 3 घंटे में छिंदवाड़ा पहुँचा जा सकता है।
स्थानीय परिवहन
छिंदवाड़ा शहर में ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी और स्थानीय बसें आसानी से उपलब्ध रहती हैं। यदि आप एक ही दिन में संग्रहालय के साथ शहर के अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना चाहते हैं, तो टैक्सी किराए पर लेना सबसे सुविधाजनक विकल्प रहेगा।
पातालकोट घाटी, छिंदवाड़ा – धरती के गर्भ में छुपी एक रहस्यमयी दुनिया
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय, छिंदवाड़ा की तस्वीरें (Images of Shri Badal Bhoi State Tribal Museum, Chhindwara)












निष्कर्ष (Conclusion)
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की आदिवासी संस्कृति, इतिहास और विरासत को समझने का सशक्त माध्यम है। यदि आप छिंदवाड़ा की यात्रा पर हैं, तो इस संग्रहालय को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें।
तामिया हिल स्टेशन, छिंदवाड़ा – मध्यप्रदेश का छिपा हुआ प्राकृतिक स्वर्ग
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय कहाँ स्थित है?
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा शहर में सर्कुलर रोड, खजरी चौक के पास, छिंदवाड़ा – 480001 में स्थित है। यह शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।
2. श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय की स्थापना कब हुई थी?
इस संग्रहालय की स्थापना 20 अप्रैल 1954 को की गई थी। बाद में वर्ष 1975 में इसे राज्य संग्रहालय का दर्जा प्राप्त हुआ तथा 8 सितंबर 1997 को इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी श्री बादल भोई के सम्मान में रखा गया।
3. संग्रहालय में क्या-क्या देखने को मिलता है?
यहाँ आदिवासी जनजातियों की संस्कृति, पारंपरिक घरों के मॉडल, लोक वाद्ययंत्र, हथियार, आभूषण, धार्मिक सामग्री, हस्तशिल्प, चित्रकला, कृषि उपकरण, पारंपरिक वेशभूषा तथा हजारों दुर्लभ पुरावशेष देखने को मिलते हैं।
4. श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय की टाइमिंग क्या है?
संग्रहालय सामान्यतः सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। प्रत्येक सोमवार को संग्रहालय बंद रहता है।
5. संग्रहालय में प्रवेश शुल्क कितना है?
भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क सामान्यतः लगभग ₹20 होता है। विद्यार्थियों के लिए रियायती शुल्क उपलब्ध हो सकता है। समय-समय पर शुल्क में परिवर्तन संभव है।
6. संग्रहालय घूमने में कितना समय लगता है?
संग्रहालय की सभी दीर्घाओं और प्रदर्शनों को आराम से देखने के लिए लगभग 2 से 3 घंटे का समय पर्याप्त माना जाता है।
7. क्या संग्रहालय में फोटोग्राफी की अनुमति है?
संग्रहालय के कुछ हिस्सों में फोटोग्राफी की अनुमति हो सकती है, जबकि कुछ दीर्घाओं में प्रतिबंध भी हो सकता है। इसलिए प्रवेश के समय संग्रहालय प्रशासन से अनुमति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
8. संग्रहालय घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अक्टूबर से मार्च का समय संग्रहालय घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और शहर के अन्य पर्यटन स्थलों का भी आराम से भ्रमण किया जा सकता है।
9. संग्रहालय के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल हैं?
संग्रहालय के आसपास पातालेश्वर शिव मंदिर, अमर जवान स्मृति, प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी पार्क, देवगढ़ किला, माचागोरा बांध, छोटा महादेव मंदिर और सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर जैसे कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थल स्थित हैं।
10. क्या श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय परिवार और बच्चों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह संग्रहालय परिवार, बच्चों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास एवं संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है। यहाँ मनोरंजन के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति और इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी भी प्राप्त होती है।


