सनातन धर्म में हनुमान जी को रामभक्ति का सर्वोच्च आदर्श माना गया है। उनकी भक्ति इतनी निष्कलंक, निःस्वार्थ और पवित्र है कि स्वयं भगवान श्रीराम भी उनके प्रेम और सेवा के वश में हो जाते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस में हनुमान जी की इसी महान भक्ति को एक अत्यंत भावपूर्ण चौपाई के माध्यम से व्यक्त किया गया है—
“सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपने बसि कर राखे रामू॥”
यह चौपाई हनुमान जी की महिमा और राम-भक्ति की शक्ति को सरल शब्दों में प्रकट करती है।
चौपाई (श्रीरामचरितमानस से)
सुमिर पवनसुत पावन नामू।
अपने बसि कर राखे रामू॥
अर्थ (Arth)
हनुमान जी ने पवनपुत्र होकर अपने पवित्र नाम और निष्काम भक्ति से श्रीराम नाम का निरंतर स्मरण किया, और अपनी अद्भुत भक्ति के प्रभाव से भगवान श्रीराम को अपने वश में कर लिया।
इस चौपाई के स्मरण के लाभ (Labh)
1️⃣ श्रीराम की विशेष कृपा
हनुमान जी का स्मरण करने से श्रीराम की अनुकंपा स्वतः प्राप्त होती है।
2️⃣ भय और संकटों से रक्षा
हनुमान जी संकटमोचन हैं। इस चौपाई का स्मरण भय, बाधा और शत्रु दोष से रक्षा करता है।
3️⃣ साहस और आत्मबल
हनुमान भक्ति से निर्भयता, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ती है।
4️⃣ नकारात्मक ऊर्जा का नाश
इस चौपाई के नियमित जाप से नकारात्मक विचार और ऊर्जा दूर होती है।
5️⃣ भक्ति मार्ग में स्थिरता
यह चौपाई भक्त को निष्काम भक्ति और सेवा भाव की ओर अग्रसर करती है।
जाप का उत्तम समय
- मंगलवार और शनिवार
- प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या समय
- हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने
- 11, 21 या 108 बार श्रद्धा से


