शिव क्षमा प्रार्थना स्तोत्र भगवान शिव की उस असीम करुणा और वात्सल्य का स्मरण है, जिसमें भक्त अपनी सभी ज्ञात-अज्ञात भूलों, अपराधों और पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करता है। यह स्तोत्र साधक के अहंकार को त्याग कर पूर्ण शरणागति का भाव प्रकट करता है, जहाँ मंत्र, विधि या ज्ञान से अधिक सच्ची भक्ति और पश्चाताप को महत्व दिया गया है।
जब जप में अक्षर दोष रह जाए, पूजा में विधि अपूर्ण हो जाए या अनजाने में शरीर, वाणी और मन से कोई अपराध हो जाए, तब यह स्तोत्र भगवान महादेव से विनम्र निवेदन करता है कि वे अपनी करुणा से सब कुछ स्वीकार करें। शिव क्षमा प्रार्थना स्तोत्र यह विश्वास दिलाता है कि भोलेनाथ अपने भक्तों की छोटी-बड़ी भूलों को क्षमा कर उन्हें भय, पाप और दुख से मुक्त करते हैं।
शिव क्षमा प्रार्थना स्तोत्र (Shiv Kshama Prarthana Stotra)
मृत्युञ्जय महारुद्र त्राहि मां शरणागतम्
जन्म मृत्युजरारोगैः पीड़ितं कर्म बन्धनैः ||१||
मन्त्रेणाक्षर हीनेन पुष्पेण विफलेन च
पूजितोसि महादेव तत्सर्वं क्षम्यतां मम ||२||
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवननयंजं वा मानसं वापराधम् ||३||
विहितमविहितं वा सर्वमेतत क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्री महादेवशम्भो ||४||
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व महेश्वरः ||५||
अन्यथा शरणं नास्ति, त्वमेव शरणं मम् । तस्मात्कारूणयभावेन रक्षस्व पार्वतीनाथः ||६||
गतं पापं गतं दुःखं गतं दारिद्रयमेव च
आगता सुख सम्पतिः पुण्याच्च तव दर्शनात् ।। ७ ॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर !
यत्पूजितम् मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे ॥८॥
हरहर महादेव यदक्षरंपदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद शिवशंकर ||९||
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें? (When and how should this hymn be recited?)
- सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत
- शिव पूजन या रुद्राभिषेक के अंत में
- 1, 3 या 11 बार श्रद्धा से पाठ
- अंत में “हर हर महादेव” का उच्चारण
आध्यात्मिक लाभ (Spiritual benefits)
✔ पूजा में हुई त्रुटियों का शमन
✔ मन की ग्लानि और अपराध-बोध से मुक्ति
✔ शिव कृपा और मानसिक शांति
✔ कर्म दोषों का क्षय
✔ भक्ति में स्थिरता और विश्वास


