यह संस्कृत श्लोक भगवान स्वर्णाकर्षण भैरव को समर्पित है। स्वर्णाकर्षण भैरव, कालभैरव का ही एक विशेष और दुर्लभ स्वरूप माने जाते हैं, जिनकी आराधना धन, समृद्धि और दरिद्रता के नाश के लिए की जाती है। यह मंत्र विशेष रूप से आर्थिक समस्याओं, अभाव और दुर्भाग्य को दूर करने हेतु जपा जाता है।
यह श्लोक भगवान भैरव को दरिद्रता और काल के स्वामी, महान संपत्ति प्रदान करने वाले, देवी श्री भैरवी के साथ संयुक्त तथा तीनों लोकों के अधिपति के रूप में नमन करता है।
मंत्र (Mantra) :
नमो दरिद्रकालाय,
महासम्पत्प्रदायिने
श्रीभैरवी-संयुक्ताय,
त्रिलोकशाय ते नमः
मंत्र का संदर्भ (Context of mantra)
यह श्लोक स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का एक महत्वपूर्ण अंश है। इस स्तोत्र में भगवान भैरव के उस रूप की उपासना की जाती है जो भक्तों को धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं तथा दरिद्रता, दुर्भाग्य और आर्थिक बाधाओं का नाश करते हैं।
मंत्र का उद्देश्य और फल (The purpose and benefits of the mantra)
- आर्थिक संकट और कर्ज से मुक्ति
- धन आगमन के मार्ग खुलना
- दरिद्रता और दुर्भाग्य का शमन
- स्थिर आय, समृद्धि और सुरक्षा की प्राप्ति
- कालभैरव की कृपा से भय और अस्थिरता का नाश


