यह मंत्र भगवान हनुमान जी को समर्पित एक विशेष दर्द-निवारक शाबर/लोक-प्रचलित मंत्र माना जाता है।
इसमें शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले शूल (दर्द, पीड़ा, कष्ट) को दूर करने की प्रार्थना की गई है।
मंत्र में “चिंतामणि हनुमान” नाम से हनुमान जी का आवाहन किया गया है, जो भक्तों की चिंता, रोग और पीड़ा हरने वाले माने जाते हैं।
परंपरागत मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का जाप करने से शारीरिक व मानसिक कष्टों में शांति का अनुभव होता है।
मंत्र (Mantra) :
ॐ नमो भगवते चिंतामणि
हनुमान अंग शूल, अति-शूल,
कटि-शूल, कुक्षि-शूल,
गुदा-शूल, मस्तक-शूल,
सर्व-शूल निर्मूलय निर्मूलय
कुरु कुरु स्वाहा ॥
मंत्र का महत्त्व (Importance)
हनुमान जी संकट मोचक हैं
हनुमान जी को हिंदू धर्म में संकटों का नाश करने वाला, रोगों से रक्षा करने वाला और बल-बुद्धि देने वाला देवता माना गया है।
शूल निवारण की भावना
इस मंत्र में शरीर के अलग-अलग अंगों के शूल (जैसे सिर, कमर, पेट, गुदा आदि) को संबोधित कर उन्हें “निर्मूल” करने की प्रार्थना की गई है, जो इसकी विशेषता है।
श्रद्धा और मानसिक शांति
मंत्र जाप केवल आध्यात्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ध्यान और विश्वास का माध्यम भी है, जिससे मन शांत होता है और पीड़ा सहने की शक्ति बढ़ती है।
मंत्र से होने वाले लाभ (Benefits)
शारीरिक दर्द में राहत की मान्यता
सिरदर्द, कमर दर्द, पेट दर्द, जोड़ों के दर्द आदि में मानसिक शांति और आराम का अनुभव होने की मान्यता है।
मानसिक तनाव में कमी
नियमित जाप से चिंता, भय और बेचैनी कम होती है तथा मन में सकारात्मकता आती है।
आत्मिक बल और विश्वास
हनुमान मंत्र होने के कारण इससे आत्मविश्वास, साहस और धैर्य में वृद्धि मानी जाती है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
लोक मान्यता के अनुसार यह मंत्र नकारात्मक प्रभावों और अशुभ चिंताओं से रक्षा करता है।


