यह मंत्र भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण स्तुति है। भगवान जगन्नाथ, जो श्रीकृष्ण के ही एक स्वरूप माने जाते हैं, पुरी के नीलाचल धाम में अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं।
यह मंत्र विशेष रूप से रथ यात्रा के समय श्रद्धा और भक्ति के साथ जपा जाता है। इसके जाप से भक्त के मन में शांति, विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जाग्रत होती है। यह मंत्र हमें याद दिलाता है कि भगवान जगन्नाथ केवल मंदिर में नहीं, बल्कि हर भक्त के हृदय में सदा निवास करते हैं।
भगवान जगन्नाथ प्रार्थना मंत्र (Lord Jagannath Prayer Mantra)
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः॥
मंत्र का सरल हिंदी अर्थ (The simple Hindi meaning of the mantra)
जो नीलाचल (पुरी धाम) में निवास करने वाले हैं,
जो सदा रहने वाले, शाश्वत और परमात्मा हैं,
जो अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं,
ऐसे सम्पूर्ण जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ को
मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।
मंत्र जप के लाभ (Benefits of Chanting)
इस मंत्र का नियमित जाप करने से:
- मन में शांति और स्थिरता आती है
- भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव गहरा होता है
- नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है
- जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बढ़ता है
- रथ यात्रा या गुरुवार के दिन विशेष फलदायी माना जाता है
जाप की सरल विधि
- प्रातः स्नान के बाद या संध्या समय
- शांत मन से 11, 21 या 108 बार जाप
- दीपक या अगरबत्ती के साथ करें तो और भी शुभ
- अंत में भगवान जगन्नाथ से कृतज्ञता प्रकट करें
बलभद्र और सुभद्रा का महत्व
इस श्लोक में भगवान जगन्नाथ को अकेले नहीं, बल्कि
- बलभद्र (शक्ति और धर्म का प्रतीक)
- सुभद्रा (करुणा और भक्ति की शक्ति)
के साथ स्मरण किया गया है।
यह दर्शाता है कि ईश्वर परिवार, संतुलन और सामूहिक चेतना का प्रतीक भी हैं।


