नवनागस्तुति एक प्राचीन स्तोत्र है जिसमें नौ महान नागों (सर्पों) की स्तुति की गई है। इन नागों के नाम हैं — अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय।
यह स्तुति विशेष रूप से सर्पदंश (साँप के काटने) से रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस नवनाग स्तुति का पाठ प्रातःकाल और सायंकाल श्रद्धा से करता है, उसे सर्प भय, विष भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
यह स्तोत्र न केवल रक्षा प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति को जीवन में विजय और निर्भयता का आशीर्वाद भी देता है।
नवनागस्तुति (Navanaga Stuti)
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥ १॥
एतानि नवनामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायं प्रातः पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥ २॥


