श्री नवनाग स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें नौ प्रमुख नाग देवताओं — अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय — का स्मरण किया गया है। यह स्तोत्र भगवान श्री गणेश के आशीर्वाद से प्रारंभ होता है और नाग देवताओं की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
स्तोत्र का महत्व:
हिंदू धर्म में नागों को धरती की ऊर्जा, जल तत्व और गूढ़ शक्तियों का प्रतीक माना गया है। नवनाग स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाले भय, विष, दुर्भाग्य, और कालसर्प दोष जैसे नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है। इसे विशेष रूप से नाग पंचमी या श्रावण मास में पढ़ना अत्यंत फलदायी होता है।
श्री नवनाग स्तोत्र (Shri Navnag Stotra)
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्क्षपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥1॥
एतानि नवनामनि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पथेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः ॥2॥
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥3॥
॥ इति श्री नवनाग नाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
पाठ का लाभ:
- विष भय से रक्षा: जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नित्य पाठ करता है, उसे सर्प भय या विष के प्रभाव से कोई नुकसान नहीं होता।
- घर में शांति और समृद्धि: नाग देवताओं की कृपा से जीवन में स्थिरता, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है।
- कालसर्प दोष से मुक्ति: यह स्तोत्र जन्म कुंडली में उपस्थित कालसर्प योग के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है।
- यात्रा में सुरक्षा: प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति प्रातः और सायं इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे मार्ग में किसी भी प्रकार का भय या दुर्घटना नहीं होती।
- आध्यात्मिक उन्नति: नाग देवता कुंडलिनी शक्ति के रक्षक हैं — अतः यह स्तोत्र साधक की आध्यात्मिक शक्ति को भी जाग्रत करता है।
विशेष जानकारी:
- इस स्तोत्र का पाठ सुबह स्नान के बाद या सायं सूर्यास्त से पहले शांत मन से करना चाहिए।
- यदि संभव हो तो नाग देवता की प्रतिमा या शेषनाग की मूर्ति के समक्ष दीपक और जल अर्पित करें।
- श्रद्धा और नियमपूर्वक 21 दिनों तक इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


