
भारत की भूमि देवी उपासना के लिए प्रसिद्ध है, और इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है दंतेश्वरी माता मंदिर, जो छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित है। यह मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि इतिहास, आस्था और रहस्य से भरा एक अद्भुत धाम है।
दंतेश्वरी माता मंदिर 13वीं शताब्दी में निर्मित माना जाता है। यह मंदिर माँ दंतेश्वरी देवी को समर्पित है, जो शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने सती के शरीर को सुदर्शन चक्र से खंडित किया, तब सती के दाँत (दंत) यहाँ गिरे थे, इसलिए इस स्थान का नाम पड़ा “दंतेश्वरी”।
जतमई माता मंदिर, गरियाबंद — प्रकृति की गोद में बसाया देवी माँ का अद्भुत धाम
इतिहास और पौराणिक कथा

कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम ने लंका विजय के बाद इस क्षेत्र से होकर लौटते समय माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए थे। वहीं स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह मंदिर काकतीय राजाओं द्वारा निर्मित कराया गया था। मंदिर में प्राचीन दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत मेल देखने को मिलता है — यहाँ के स्तंभ, तोरण और नक्काशियाँ मन को मोह लेती हैं।
गिदिया खो झरना देवास — हरियाली में छिपा रोमांच और सौंदर्य
मंदिर की विशेषताएँ
यह मंदिर शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है।
मंदिर की मुख्य मूर्ति चाँदी के सिंहासन पर विराजमान है।
माँ की चार भुजाएँ हैं, जिनमें वे शंख, चक्र, त्रिशूल और कमल धारण करती हैं।
यहाँ नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा होती है और पूरे क्षेत्र में देवी की भक्ति की गूंज सुनाई देती है।
मंदिर परिसर में कई छोटे मंदिर भी हैं जहाँ अन्य देवी-देवता विराजमान हैं।
घुघुवा फॉसिल नेशनल पार्क – करोड़ों साल पुराने पृथ्वी के इतिहास की जीवंत गवाही
मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवता
- दंतेश्वरी माता (मुख्य देवी)
- भैरव बाबा (कुलरक्षक)
- काली माता मंदिर
- हनुमान जी मंदिर
- शिवलिंग मंदिर
- नवग्रह मंदिर
आरती और भजन
मंदिर में रोज़ सुबह और शाम आरती होती है।
- प्रातः आरती: सुबह 6:00 बजे
- सायं आरती: शाम 7:00 बजे
आरती के समय “जय दंतेश्वरी माता की जय” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठता है।
नवरात्रि, दशहरा और चैत्र मास में विशेष भजन संध्याएँ आयोजित की जाती हैं जिनमें स्थानीय कलाकार देवी भक्ति गीत गाते हैं।
प्रमुख त्यौहार और कार्यक्रम
- शारदीय नवरात्रि – माँ की नौ दिनों तक भव्य पूजा, गरबा और अखंड ज्योति।
- दशहरा पर्व – रथ यात्रा और विशाल जुलूस, जिसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं।
- चैत्र नवरात्रि – व्रत, कथा और देवी जागरण।
- वार्षिक मेला – मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य मेला जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
मंदिर दर्शन का समय
- सुबह: 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
मंदिर के आसपास घूमने योग्य स्थल
- शंकरगुहा – रहस्यमयी गुफा जहाँ प्राचीन शिवलिंग स्थापित है।
- बैलाडीला पर्वत श्रृंखला – प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर हरा-भरा इलाका।
- इंद्रावती नदी तट – नदी के किनारे बैठकर ध्यान करने का अद्भुत अनुभव।
- बारसूर मंदिर – “एक हज़ार मंदिरों का शहर” कहलाने वाला ऐतिहासिक स्थान।
मंदिर तक कैसे पहुँचें
- निकटतम रेलवे स्टेशन: दंतेवाड़ा रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी दूरी)
- निकटतम हवाई अड्डा: जगदलपुर एयरपोर्ट (लगभग 80 किमी)
- सड़क मार्ग: रायपुर, बस्तर और जगदलपुर से नियमित बस और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं।
मंदिर जाने का सर्वोत्तम समय
सितंबर से मार्च के बीच का समय यहाँ घूमने के लिए उत्तम माना जाता है।
विशेष रूप से नवरात्रि और दशहरा के दौरान यहाँ का माहौल भक्ति और उत्सव से भरा रहता है।
मंदिर का पूर्ण पता
दंतेश्वरी माता मंदिर, दंतेवाड़ा जिला,
छत्तीसगढ़ – 494449, भारत
ध्यान देने योग्य बातें
मंदिर परिसर में जूते-चप्पल और मोबाइल फोन ले जाना वर्जित है।
फोटोग्राफी की अनुमति केवल बाहर से है।
मंदिर में प्रसाद और दान का वितरण मंदिर समिति द्वारा किया जाता है।
नवरात्रि के समय भारी भीड़ होती है, इसलिए पहले से योजना बनाना उचित रहेगा।
श्री जागेश्वरनाथ शिव मंदिर, बांदकपुर
यात्रा गाइड (Travel Guide)
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ |
| मुख्य देवी | माँ दंतेश्वरी |
| स्थापना काल | 13वीं शताब्दी |
| प्रसिद्ध त्यौहार | नवरात्रि, दशहरा |
| निकटतम शहर | जगदलपुर |
| भाषा | हिंदी, गोंडी |
| भोजन व्यवस्था | मंदिर के पास कई स्थानीय भोजनालय उपलब्ध हैं |
| आवास व्यवस्था | धर्मशालाएँ और होटल जगदलपुर में आसानी से मिल जाते हैं |
छत्तीसगढ़ का दंतेश्वरी माता मंदिर की तस्वीरें (Images Danteshwari Mata Temple, Chhattisgarh)
गीता भवन मंदिर, इंदौर — एक आध्यात्मिक संगम (Geeta Bhawan Mnadir Indore)
निष्कर्ष
दंतेश्वरी माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और शक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु माँ की कृपा से नई ऊर्जा और आत्मबल प्राप्त करता है।
अगर आप छत्तीसगढ़ की यात्रा कर रहे हैं, तो दंतेश्वरी माता के दर्शन के बिना आपकी यात्रा अधूरी रहेगी।
जय माँ दंतेश्वरी!








