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श्री महागणेशा पंच्रात्नाम स्तोत्रं (Sri Maha Ganesha Pancharatnam Stotram)

हिंदी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

“श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र” भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली और लोकप्रिय स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य जी द्वारा की गई है। यह स्तोत्र पांच (पंच) रत्नों (श्लोकों) के रूप में भगवान गणेश की स्तुति करता है, इसलिए इसे “पंचरत्न स्तोत्र” कहा जाता है।

इस स्तोत्र में भगवान गणपति के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा, बुद्धिमत्ता, बल, सौंदर्य और भक्तवत्सलता का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। प्रत्येक श्लोक में श्री गणेश के गुणों और उनके प्रभावों का वर्णन मिलता है, जो साधक के हृदय को शुद्ध कर, उसमें श्रद्धा और विश्वास का संचार करता है।

गणेश जी को विघ्नहर्ता (विघ्नों को दूर करने वाले) और सिद्धिदाता (सफलता देने वाले) कहा जाता है। इसलिए किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले उनका स्मरण एवं पूजा अनिवार्य मानी जाती है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक शक्ति देता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए भी सहायक है।

श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र का नियमित पाठ करने से साधक को आरोग्यता, सुख, समृद्धि, संतान सुख, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसका पाठ विशेष रूप से चतुर्थी, गणेश चतुर्थी, और प्रतिदिन प्रातःकाल करना अति शुभ माना जाता है।

🔱 यह स्तोत्र श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ पढ़ा जाए तो भगवान गणेश अवश्य कृपा करते हैं।

श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र

(श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र हिंदी पाठ)

मुदाकरात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम्।
कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम्।
अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम्।
नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम्॥ 1 ॥

नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम्।
नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्धरम्।
सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम्।
महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरंतरम्॥ 2 ॥

समस्त लोक शंकरं निरस्त दैत्य कुंजरम्।
दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम्।
कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम्।
मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम्॥ 3 ॥

अकिंचनार्ति मार्जनं चिरंतनोक्ति भाजनम्।
पुरारि पूर्व नंदनं सुरारि गर्व चर्वणम्।
प्रपंच नाश भीषणं धनंजयादि भूषणम्।
कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम्॥ 4 ॥

नितांत कांति दंत कांति मंत कांति कात्मजम्।
अचिंत्य रूपमंत हीन मंतराय कृंतनम्।
हृदंतरे निरंतरं वसंतमेव योगिनाम्।
तमेकदंतमेव तं विचिंतयामि संततम्॥ 5 ॥

फलश्रुति:
महागणेश पंचरत्नमादरेण योऽन्वहम्।
प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम्।
अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम्।
समाहितायु रष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात्॥

॥ इति श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र — हिंदी अनुवाद

जो हाथ में मोदक (मिठाई) धारण करते हैं, सदा ही मुक्ति का साधन बनते हैं,
चंद्रमा की कला से शोभित हैं, इस संसार की रक्षा करते हैं,
जो स्वयं बिना किसी के अधीन हैं, सबके एकमात्र स्वामी हैं,
हाथी जैसे राक्षसों का विनाश करते हैं, अशुभ को शीघ्र ही नष्ट करते हैं—ऐसे विनायक को मैं नमस्कार करता हूँ।॥ 1 ॥

जो अपने विरोधियों को भयभीत कर देते हैं, नवोदित सूर्य की भाँति प्रकाशमान हैं,
जो देवताओं के शत्रुओं का संहार करते हैं, भक्तों की गंभीर आपत्तियों से रक्षा करते हैं,
जो देवताओं के स्वामी, धन के स्वामी, गजों के स्वामी और समस्त गणों के स्वामी हैं,
वे महेश्वर से भी श्रेष्ठ और परम परा हैं—मैं उन्हें निरंतर शरण करता हूँ।॥ 2 ॥

जो सभी लोकों के लिए मंगलकारी हैं, राक्षस रूपी हाथियों का नाश करते हैं,
जिनका विशाल पेट वरदानस्वरूप है, जिनका हाथी समान मुख अक्षय है,
जो करुणा के भंडार, क्षमा के स्वरूप, आनंद देने वाले और यश प्रदान करने वाले हैं,
जो मन को आकर्षित करते हैं और सबके द्वारा पूजित हैं—मैं उन तेजस्वी गणेश को नमस्कार करता हूँ।॥ 3 ॥

जो दरिद्र और पीड़ित जनों की पीड़ा मिटाते हैं, सदियों से गाए जाते हैं,
जो त्रिपुरासुर के शत्रु भगवान शिव के पुत्र हैं, जो दैत्यराजों के अहंकार को चबाकर नष्ट कर देते हैं,
जो इस संसार का संहार कर देने वाले हैं, और अर्जुन जैसे महायोद्धाओं के आभूषण हैं,
जिनके कपोलों पर बल धारण करने वाले हाथी का रूप है—मैं उन प्राचीन हाथी-स्वरूप गणेश की आराधना करता हूँ।॥ 4 ॥

जो अपार तेज, सुंदर दांतों, मंत्रों के स्वरूप और शिवजी के पुत्र हैं,
जिनका रूप चिंतन से परे है, जो अंतहीन हैं और बाधाओं का नाश करते हैं,
जो योगियों के हृदय में निरंतर वास करते हैं,
ऐसे एकदंत भगवान गणेश को मैं सदा ध्यान में रखता हूँ।॥ 5 ॥

फलश्रुति (इस स्तोत्र का लाभ)

जो श्रद्धा और प्रेम के साथ, प्रतिदिन सुबह इस स्तोत्र का पाठ करते हैं,
और गणेश जी का ध्यान करते हुए इसका जाप करते हैं,
उन्हें शीघ्र ही उत्तम स्वास्थ्य, दोषरहित जीवन, अच्छी संगति,
श्रेष्ठ संतान, दीर्घायु और आठ प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

॥ इति श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र के लाभ (Benefits of Shri Maha Ganesha Pancharatnam Stotram):

  1. विघ्नों का नाश होता है – यह स्तोत्र भगवान गणेश को प्रसन्न कर जीवन में आने वाले सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करता है।
  2. बुद्धि, विवेक व स्मरण शक्ति में वृद्धि – विद्यार्थी व ज्ञान की साधना करने वालों के लिए यह स्तोत्र अत्यंत लाभकारी है।
  3. आरोग्यता एवं आयु वृद्धि – इसके पाठ से शरीर और मन दोनों में शक्ति आती है, और रोग व दोष दूर होते हैं।
  4. सुख, शांति और समृद्धि – घर में कलह, अशांति या आर्थिक संकट हो, तो इसका नियमित पाठ विशेष रूप से लाभदायक है।
  5. कार्य में सफलता – नया कार्य, व्यापार, शिक्षा या नौकरी में सफलता के लिए यह स्तोत्र अत्यंत प्रभावी है।
  6. सुसंतान की प्राप्ति – संतान सुख की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं को यह स्तोत्र विशेष फलदायी होता है।
  7. शुभता और पुण्य प्राप्ति – यह स्तोत्र पवित्रता बढ़ाता है और साधक के जीवन को शुभता से भर देता है।

पाठ विधि (Vidhi of Chanting):

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  3. भगवान गणेश की मूर्ति/चित्र के सामने दीपक जलाएं, चंदन व पुष्प अर्पित करें।
  4. श्री गणेश जी का ध्यान करें – “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र से आरंभ करें।
  5. शांत मन से “श्री महागणेश पंचरत्न स्तोत्र” का पाठ करें। चाहें तो इसका पाठ शुद्ध उच्चारण के साथ तीन बार करें।
  6. पाठ के बाद गणेश जी को दूर्वा, मोदक या गुड़-चना का भोग लगाएं।
  7. अंत में गणेश जी से अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

जप का समय (Best Time for Recitation):

समयलाभ
प्रातःकाल (सुबह)सबसे उत्तम समय माना गया है, दिनभर सफलता और शांति मिलती है।
गणेश चतुर्थीचतुर्थी के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
अंगारक चतुर्थीयदि मंगलवार को चतुर्थी हो, तो इसका प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है।
प्रतिदिननिरंतर पाठ से दीर्घकालिक शुभ फल प्राप्त होते हैं।
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