Shri Navnaag Stotra (श्री नवनाग स्तोत्र) एक शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है जो नौ महान नागों के नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र न केवल नाग दोष, कालसर्प दोष, और राहु-केतु दोष से मुक्ति दिलाता है, बल्कि शत्रु बाधा, नजर दोष, और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा भी प्रदान करता है।
यह मंत्र उन सभी लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो जीवन में असफलताओं, भय, ईर्ष्या या विरोध का सामना कर रहे हैं। श्रद्धा और नियमितता के साथ इसका जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, धन-वैभव और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
श्री नवनाग स्तोत्र
Shri Navnaag Stotra
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् ।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥ 1 ॥
एतानि नवनामानि नागानां च महात्मनाम् ।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः ॥ 2 ॥
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ 3 ॥
॥ इति श्री नवनाग नाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
श्री नवनाग स्तोत्र (हिंदी अनुवाद)
Shri Navnaag Stotra – Hindi Meaning
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
अनन्त, वासुकी, शेष, पद्मनाभ और कंबल,
शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय — ये नौ महान नाग हैं। ॥ 1 ॥
इन नौ महान नागों के नामों का
जो व्यक्ति सायंकाल में और विशेष रूप से प्रातःकाल में प्रतिदिन पाठ करता है — ॥ 2 ॥
उसे कभी भी विष का भय नहीं रहता,
और वह हर स्थान पर विजय प्राप्त करता है। ॥ 3 ॥
॥ इति श्री नवनाग नाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
श्री नवनाग स्तोत्र के लाभ (Benefits):
- नाग, कालसर्प, राहु-केतु दोषों का शमन।
- बुरी दृष्टि, तंत्र-मंत्र, शाप और जादू-टोना से सुरक्षा।
- शत्रुओं और ईर्ष्यालु लोगों पर विजय प्राप्त होती है।
- बुरे स्वप्नों और भय से छुटकारा मिलता है।
- संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों को लाभ मिलता है।
- गर्भवती महिलाओं को यह स्तोत्र गर्भ की रक्षा और सुरक्षित प्रसव हेतु किया जाता है।
- अविवाहित युवक-युवतियाँ इसे अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए जप सकते हैं।
जिन्हें यह स्तोत्र अवश्य पढ़ना चाहिए (Those who must read this hymn):
- जिनके जीवन में बार-बार बाधाएँ आ रही हों।
- जो प्रतियोगिता, परीक्षा या व्यापार में लगातार असफल हो रहे हों।
- जिन पर नकारात्मक शक्तियों, नजर दोष या कालसर्प दोष का प्रभाव हो।
- जिन्हें शत्रु, विरोधी या जलने वाले लोग परेशान करते हों।
- जिन्हें मानसिक अशांति या भय सताता हो।


