“श्री विनायक स्तोत्र” भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें उनके विविध नामों, स्वरूपों और दिव्य गुणों की स्तुति की गई है। यह स्तोत्र विशेष रूप से विघ्नों को दूर करने, बाधाओं का नाश करने, और सफलता तथा शांति की प्राप्ति के लिए भक्तों द्वारा श्रद्धा से पढ़ा जाता है।
इस स्तोत्र की रचना में भगवान गणेश को एकदंत, वक्रतुण्ड, गजमुख, विनायक, गणाध्यक्ष, और शिवपुत्र जैसे अनेक नामों से संबोधित किया गया है। इसमें उनके रूप, स्वभाव, शक्तियों और भक्तों के प्रति वात्सल्य भाव का अत्यंत सुंदर वर्णन है।
“विनायक स्तोत्र” का नियमित पाठ मन को एकाग्र करता है, कार्यों में सफलता लाता है और जीवन के संकटों से रक्षा करता है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल प्राप्त करने के लिए भी अत्यंत उपयोगी माना गया है।
यदि कोई व्यक्ति भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना चाहता है, तो यह स्तोत्र उसके लिए एक दिव्य साधन है।
श्री विनायक स्तोत्रम्
Vinayak Stotra
मूषिकवाहनमोदकहस्तचामरकर्णविलम्बितसूत्र ।
वामनरूपमहेश्वरपुत्रविघ्नविनायकपादनमस्ते ॥
देवदेवसुतंदेवंजगद्विघ्नविनायकम् ।
हस्तिरूपंमहाकायंसूर्यकोटिसमप्रभम् ॥ 1 ॥
वामनंजटिलंकान्तंह्रस्वग्रीवंमहोदरम् ।
धूम्रसिन्दूरयुद्गण्डंविकटंप्रकटोत्कटम् ॥ 2 ॥
एकदन्तंप्रलम्बोष्ठंनागयज्ञोपवीतिनम् ।
त्र्यक्षंगजमुखंकृष्णंसुकृतंरक्तवाससम् ॥ 3 ॥
दन्तपाणिंचवरदंब्रह्मण्यंब्रह्मचारिणम् ।
पुण्यंगणपतिंदिव्यंविघ्नराजंनमाम्यहम् ॥ 4 ॥
देवंगणपतिंनाथंविश्वस्याग्रेतुगामिनम् ।
देवानामधिकंश्रेष्ठंनायकंसुविनायकम् ॥ 5 ॥
नमामिभगवंदेवंअद्भुतंगणनायकम् ।
वक्रतुण्डप्रचण्डायउग्रतुण्डायतेनमः ॥ 6 ॥
चण्डायगुरुचण्डायचण्डचण्डायतेनमः ।
मत्तोन्मत्तप्रमत्तायनित्यमत्तायतेनमः ॥ 7 ॥
उमासुतंनमस्यामिगङ्गापुत्रायतेनमः ।
ओङ्कारायवषट्कारस्वाहाकारायतेनमः ॥ 8 ॥
मन्त्रमूर्तेमहायोगिन्जातवेदेनमोनमः ।
परशुपाशकहस्तायगजहस्तायतेनमः ॥ 9 ॥
मेघायमेघवर्णायमेघेश्वरनमोनमः ।
घोरायघोररूपायघोरघोरायतेनमः ॥ 10 ॥
पुराणपूर्वपूज्यायपुरुषायनमोनमः ।
मदोत्कटनमस्तेऽस्तुनमस्तेचण्डविक्रम ॥ 11 ॥
विनायकनमस्तेऽस्तुनमस्तेभक्तवत्सल ।
भक्तप्रियायशान्तायमहातेजस्विनेनमः ॥ 12 ॥
यज्ञाययज्ञहोत्रेचयज्ञेशायनमोनमः ।
नमस्तेशुक्लभस्माङ्गशुक्लमालाधरायच ॥ 13 ॥
मदक्लिन्नकपोलायगणाधिपतयेनमः ।
रक्तपुष्पप्रियायचरक्तचन्दनभूषित ॥ 14 ॥
अग्निहोत्रायशान्तायअपराजय्यतेनमः ।
आखुवाहनदेवेशएकदन्तायतेनमः॥ 15 ॥
शूर्पकर्णायशूरायदीर्घदन्तायतेनमः ।
विघ्नंहरतुदेवेशशिवपुत्रोविनायकः ॥ 16 ॥
॥ इति श्री विनायक स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
“श्री विनायक स्तोत्र” का हिंदी अनुवाद (Hindi translation of “Shri Vinayak Stotra”)
मूषिकवाहन मोदकहस्त चामरकर्ण विलम्बितसूत्र
वामनरूप महेश्वरपुत्र विघ्नविनायक पाद नमस्ते
हे मूषक वाहन वाले, हाथ में मोदक रखने वाले, बड़े कान वाले, और लंबा सूत्र पहनने वाले!
हे वामन रूपधारी, भगवान शिव के पुत्र, विघ्नहर्ता विनायक! आपके चरणों में प्रणाम।
देवदेवसुतं देवं जगद्विघ्नविनायकम्
हस्तिरूपं महाकायं सूर्यकोटिसमप्रभम्
देवों के देवपुत्र, जगत के विघ्नविनायक, हाथीमुखी, विशालकाय और करोड़ों सूर्य जैसे प्रकाशवान को प्रणाम।
वामनं जटिलं कान्तं ह्रस्वग्रीवं महोदरम्
धूम्रसिन्दूरयुग्गण्डं विकटं प्रकटोत्कटम्
वामन शरीर वाले, जटाजूट धारी, सुंदर, छोटी गर्दन और बड़े पेट वाले, धूम्रवर्णी गालों से युक्त विकट रूपधारी को नमन।
एकदन्तं प्रलम्बोष्ठं नागयज्ञोपवीतिनम्
त्र्यक्षं गजमुखं कृष्णं सुकृतं रक्तवाससम्
एक दांत वाले, लटके होंठ वाले, नाग से यज्ञोपवीत धारण करने वाले, तीन नेत्रों वाले, गजमुख और कृष्ण वर्ण वाले, पुण्यस्वरूप और लाल वस्त्रधारी को नमन।
दन्तपाणिं च वरदं ब्रह्मण्यं ब्रह्मचारिणम्
पुण्यं गणपतिं दिव्यं विघ्नराजं नमाम्यहम्
दांत धारण करने वाले, वरदानी, ब्राह्मणों के प्रिय, ब्रह्मचारी, पुण्यस्वरूप, दिव्य गणपति और विघ्नों के राजा को मैं नमस्कार करता हूँ।
देवं गणपतिं नाथं विश्वस्याग्रेतुगामिनम्
देवानामधिकं श्रेष्ठं नायकं सुविनायकम्
जो गणपति देव, जगत के नायक, देवों में श्रेष्ठ और अग्रगामी हैं — उन्हें मैं नमस्कार करता हूँ।
नमामि भगवं देवं अद्भुतं गणनायकम्
वक्रतुण्ड प्रचण्डाय उग्रतुण्डाय ते नमः
मैं भगवान गणनायक को प्रणाम करता हूँ जो अद्भुत हैं।
वक्रतुण्ड और प्रचंड रूप वाले उग्रतुण्ड को नमस्कार।
चण्डाय गुरुचण्डाय चण्डचण्डाय ते नमः
मत्तोन्मत्त प्रमत्ताय नित्यमत्ताय ते नमः
चंड, गुरुचंड, अत्यंत चंड रूपधारी, और नित्य मत्त अवस्था में रहने वाले को नमस्कार।
उमासुतं नमस्यामि गङ्गापुत्राय ते नमः
ओङ्काराय वषट्कार स्वाहाकाराय ते नमः
मैं उमादेवी के पुत्र, गंगा पुत्र, ओंकार स्वरूप, वषट और स्वाहा रूपधारी को नमन करता हूँ।
मन्त्रमूर्ते महायोगिन जातवेदे नमो नमः
परशुपाशकहस्ताय गजहस्ताय ते नमः
मंत्रस्वरूप, महान योगी, अग्निरूप, फरसा और पाश धारण करने वाले, गजहस्तधारी को नमन।
मेघाय मेघवर्णाय मेघेश्वर नमो नमः
घोराय घोररूपाय घोरघोराय ते नमः
मेघ के समान वर्ण वाले, मेघों के स्वामी, घोर रूप और अत्यंत भयानक स्वरूप को प्रणाम।
पुराणपूर्वपूज्याय पुरुषाय नमो नमः
मदोत्कट नमस्तेऽस्तु नमस्ते चण्डविक्रम
पुराणों से पूजित, श्रेष्ठ पुरुष, मदोन्मत्त और चंडविक्रम को नमस्कार।
विनायक नमस्तेऽस्तु नमस्ते भक्तवत्सल
भक्तप्रियाय शान्ताय महातेजस्विने नमः
हे विनायक! हे भक्तवत्सल! हे शांत और महातेजस्वी! आपको नमस्कार।
यज्ञाय यज्ञहोत्रे च यज्ञेशाय नमो नमः
नमस्ते शुक्लभस्माङ्ग शुक्लमालाधराय च
यज्ञरूप, यज्ञकर्ता, यज्ञेश्वर को नमस्कार।
शुक्लभस्म और श्वेत माला धारण करने वाले को प्रणाम।
मदक्लिन्न कपोलाय गणाधिपतये नमः
रक्तपुष्पप्रियाय च रक्तचन्दन भूषित
मद से गीले गालों वाले गणों के अधिपति को नमन, रक्त पुष्प और रक्त चंदन प्रिय भगवान को नमन।
अग्निहोत्राय शान्ताय अपराजय्य ते नमः
आखुवाहन देवेश एकदन्ताय ते नमः
अग्निहोत्ररूप, शांत स्वभाव, अपराजेय देवता और मूषकवाहन, एकदंत गणेश को प्रणाम।
शूर्पकर्णाय शूराय दीर्घदन्ताय ते नमः
विघ्नं हरतु देवेश शिवपुत्रो विनायकः
बड़े कानों वाले, शूरवीर, लंबे दांतों वाले शिवपुत्र विनायक सभी विघ्नों का नाश करें।
॥ इति श्री विनायक स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
लाभ (Benefits)
श्री विनायक स्तोत्र का नियमित पाठ करने से साधक को अनेक अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं —
- विघ्नों का नाश – यह स्तोत्र विघ्नहर्ता भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कराने वाला है, जिससे जीवन की बाधाएँ समाप्त होती हैं।
- सफलता और समृद्धि – व्यापार, शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन में सफलता व समृद्धि मिलती है।
- मन की शांति व एकाग्रता – इसका पाठ मानसिक तनाव को दूर करता है और साधक को आत्मबल प्रदान करता है।
- रक्षा कवच के समान – यह स्तोत्र साधक के चारों ओर एक शक्तिशाली सुरक्षाचक्र बनाता है।
- भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति – भगवान गणेश की उपासना से भक्ति मार्ग पर दृढ़ता आती है और साधक का चित्त शुद्ध होता है।
विधि (Pāṭh Vidhi)
श्री विनायक स्तोत्र का पाठ करते समय निम्न विधि अपनाना श्रेष्ठ माना गया है:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश की मूर्ति/चित्र के समक्ष दीपक जलाएं और अक्षत, फूल, दूर्वा अर्पित करें।
- विनायक स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करें।
- मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
- अंत में प्रार्थना करें: “हे विघ्नहर्ता! मेरे सभी कार्यों को सफलता दें, और जीवन के कष्टों को दूर करें।”
जाप का उत्तम समय (Best Time for Jaap)
- प्रातःकाल (सुबह 5 से 7 बजे के बीच) – सबसे शुभ समय माना जाता है।
- सायंकाल (शाम 6 से 8 बजे के बीच) – यदि प्रातः न हो पाए तो यह भी उपयुक्त है।
- विशेष दिन –
- चतुर्थी तिथि (गणेश चतुर्थी)
- मंगलवार और शुक्रवार
- संकट चतुर्थी पर विशेष लाभकारी होता है।


