कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। वर्ष 2025 में, यह उत्सव शनिवार, 16 अगस्त को मनाया जाएगा।
तिथि और पूजा मुहूर्त (Date and Puja Muhurta)
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025 को दोपहर 1:19 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025 को सुबह 11:04 बजे
- निशीथ पूजा समय (दिल्ली में): 16 अगस्त को रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक
- रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 16 अगस्त 2025 को शाम 6:08 बजे
- रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 17 अगस्त 2025 को शाम 4:47 बजे
कुछ परंपराओं के अनुसार, ISKCON द्वारा जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी, जिसमें निशीथ पूजा का समय रात 1:17 बजे से 2:00 बजे तक होगा।
पूजा विधि और उपवास (Rituals of worship and fasting)
- उपवास: भक्तजन सूर्योदय से लेकर मध्यरात्रि तक उपवास रखते हैं।
- पूजा: रात के समय भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से किया जाता है।
- भजन-कीर्तन: पूरे दिन और विशेषकर रात में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
- झूलन उत्सव: बाल गोपाल को झूले पर बैठाकर झुलाया जाता है।
- अष्टोत्तर शतनाम: भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों का जाप किया जाता है।
सांस्कृतिक आयोजन: दही हांडी (Cultural Event: Dahi Handi)
महाराष्ट्र और गोवा में जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का आयोजन होता है। इसमें युवक मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर लटकी मटकी को फोड़ते हैं, जो भगवान कृष्ण की माखन चोरी लीला का प्रतीक है।
वैश्विक उत्सव (Global festival)
जन्माष्टमी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में धूमधाम से मनाई जाती है। ISKCON मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और प्रवचनों का आयोजन होता है। विदेशों में भी भारतीय समुदाय इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाता है।
प्रसाद और भोग (Prasad and bhog)
भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, पंचामृत, फल, सूखे मेवे, साबूदाना खिचड़ी, गोपलकला आदि का भोग अर्पित किया जाता है। भक्तजन उपवास के बाद इन प्रसादों का सेवन करते हैं।
पौराणिक कथा (Mythology)
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में माता देवकी और पिता वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में हुआ था। उनका जन्म कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था।
निष्कर्ष (Conclusion)
कृष्ण जन्माष्टमी 2025 आध्यात्मिकता, भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव का संगम है। इस दिन उपवास, पूजा, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। यह पर्व हमें भगवान के उपदेशों और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करता है।


