कांशीपञ्चकम् (Kashi Panchakam) श्रीमद् आदिशंकराचार्य द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण संस्कृत स्तोत्र है, जिसमें काशी नगरी के आध्यात्मिक महत्व और आत्मज्ञान की प्राप्ति के मार्ग को दर्शाया गया है।
दक्षिणा काली ध्यान मंत्र (Dakshina Kali Dhyana Mantra)
कांशीपञ्चकम् में पांच श्लोक हैं, जिनमें काशी नगरी को आत्मज्ञान, शांति और ब्रह्मस्वरूप के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शंकराचार्य ने इसे एक प्रकार से आत्मा के साक्षात्कार का मार्ग बताया है, जिसमें बाहरी तीर्थयात्रा की आवश्यकता नहीं, बल्कि आंतरिक साधना की आवश्यकता है। प्रत्येक श्लोक में काशी के विभिन्न पहलुओं को आत्मा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जैसे कि मणिकर्णिका घाट को मन की शांति का प्रतीक, ज्ञानप्रवाहा को विमलादिगंगा के रूप में, और काशी को निजबोधरूपा के रूप में।
ॐ श्री महा कलिकायै नमः – महा काली मंत्र (Om Sri Maha Kalikayai Namah – Maha Kali Mantra)
कांशीपंचकम स्तोत्र हिंदी पाठ (Kashi Panchakam Stotra Hindi)
मनोनिवृत्तिः परमोपशान्तिः सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च।
ज्ञानप्रवाहा विमलादिगङ्गा सा काशिकाहं निजबोधरूपा।। 1
यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्।
सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा काशिकाहं निजबोधरूपा।। 2
कोशेषु पञ्चस्वधिराजमाना बुद्धिर्भवानी प्रतिदेहगेहम्।
साक्षी शिवः सर्वगतोऽन्तरात्मा सा काशिकाहं निजबोधरूपा।। 3
काश्यां हि काश्यते काशी काशी सर्वप्रकाशिका।
सा काशी विदिता येन तेन प्राप्ता हि काशिका।। 4
काशीक्षेत्रं शरीरं त्रिभुवन-जननी व्यापिनी ज्ञानगङ्गा भक्तिः श्रद्धा गयेयं निजगुरु-चरणध्यानयोगः प्रयागः।
विश्वेशोऽयं तुरीयः सकलजन-मनःसाक्षिभूतोऽन्तरात्मा देहे सर्वं मदीये यदि वसति पुनस्तीर्थमन्यत्किमस्ति।। 5
कालिका-येई मंत्र (Kalika yei mantra)
।। इति कांशीपंचकम स्तोत्र सम्पूर्णम्।।
विधि (Vidhi)
कांशीपञ्चकम् का पाठ नियमित रूप से करना चाहिए, विशेषकर प्रातःकाल या संध्याकाल में, जब वातावरण शांत और ध्यान के लिए उपयुक्त हो। पाठ से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और एकाग्रचित्त होकर काशी के आध्यात्मिक महत्व पर मनन करें। पाठ के समय “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ काशिकेश्वराय नमः” जैसे मंत्रों का उच्चारण भी किया जा सकता है।
ॐ क्रीं कालिकायै नमः – माँ काली मंत्र (Om Kreem Kalikayai Namah)
लाभ (Benefits)
- आध्यात्मिक उन्नति: कांशीपञ्चकम् का नियमित पाठ आत्मा के स्वरूप की पहचान कराता है और आत्मज्ञान की प्राप्ति में सहायक होता है।
- मानसिक शांति: यह स्तोत्र मानसिक विकारों को शांत करता है और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: पाठ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।
- कर्मों का नाश: यह स्तोत्र पापों के नाश और पुण्य की प्राप्ति में सहायक होता है।
- आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक: कांशीपञ्चकम् काशी नगरी को आत्मा के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे व्यक्ति की आंतरिक यात्रा की प्रेरणा मिलती है।
कालिका-येई मंत्र (Kalika yei mantra)


