देवी वाराही हिंदू धर्म की सप्तमातृकाओं में से एक हैं और देवी लक्ष्मी का एक उग्र रूप मानी जाती हैं। वे भगवान विष्णु के वराह अवतार की शक्ति स्वरूपा हैं। उनका मुख वराह (सूअर) का होता है और शरीर मानवीय होता है। तांत्रिक साधनाओं में उनका विशेष महत्व है। देवी वाराही रात्रि की देवी मानी जाती हैं और उन्हें रक्षा, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति की अधिष्ठात्री माना गया है।
माँ शैलपुत्री: नवरात्रि के प्रथम दिवस की अधिष्ठात्री देवी (Maa Shailputri Mantra)
🕉️ वाराही गायत्री मंत्र (Varahi Gayatri Mantra)
ॐ महिषध्वजयै विद्महे
दण्डहस्तायै धीमहि
तन्नो वाराही प्रचोदयात्॥
अनादी कल्पेश्वर स्तोत्र (Anadikalpeshvara Stotram)
✨ मंत्र का अर्थ (Meaning of the Mantra)
ॐ – ईश्वर का प्रतीक और ब्रह्मांडीय ध्वनि
महिषध्वजयै विद्महे – हम उस देवी को जानें जिनका ध्वज महिष (भैंस) है
दण्डहस्तायै धीमहि – हम उस देवी का ध्यान करें जिनके हाथ में दण्ड (गदा) है
तन्नो वाराही प्रचोदयात् – वे देवी वाराही हमारी बुद्धि को प्रेरित करें
यह मंत्र देवी वाराही की शक्ति, मार्गदर्शन और बुद्धि के लिए प्रार्थना है
🌟 मंत्र के लाभ (Benefits of the Mantra)
- शत्रुओं और तांत्रिक प्रभावों से सुरक्षा
- मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति
- आध्यात्मिक जागरण और साधना में सफलता
- धन, सुख और आयु में वृद्धि
- जीवन की समस्याओं से समाधान
आवाहनं न जानामि – क्षमा याचना मंत्र (avahanam na janami – kshama yachna mantra)
🧘 जाप विधि (Chanting Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) या रात को
- स्थान: शांत और पवित्र जगह
- आसन: कुशा या ऊन का आसन
- माला: रुद्राक्ष, रक्तचंदन या कमलगट्टा की माला
- संख्या: प्रतिदिन कम से कम 108 बार जाप करें
- ध्यान: देवी वाराही की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर मंत्र जाप करें
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः (Namo devai maha devai)
🔥 विशेष साधना विधि (Special Sadhana Method)
- मंगलवार या शनिवार से आरंभ करें
- हर दिन रात्रि में एक माला जाप करें
- पीतल के दीपक में गाय के घी का दीप जलाएं
- प्रसाद में कच्चे आलू, दूध और केले रखें
- अगले दिन सुबह आलू सुअर को खिलाएं और दूध-केले का प्रसाद स्वयं ग्रहण करें
- यह प्रक्रिया 21 दिनों तक करें
- साधना पूर्ण होने पर यज्ञ या हवन करें (यदि संभव हो तो)
गजाननं भूत गणादि सेवितं – गजानन मंत्र (Gajananam Bhoota Ganadhi Sevitam – Gajanan Mantra)
📍 देवी वाराही के प्रमुख मंदिर (Famous Temples of Devi Varahi)
- देवीधुरा, उत्तराखंड
- पंचसागर शक्तिपीठ, वाराणसी
- वाराही देवी मंदिर, कांचीपुरम (तमिलनाडु)
आदिदेव नमस्तुभ्यं – सूर्य अष्टकम ( Aadidev Namastubhyam -Shri Surya Ashtakam)


