“सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना” हनुमान चालीसा की 27वीं चौपाई है। इसमें बहुत ही सुंदर भाव छिपा है। आइए इसका विस्तार से अर्थ, भाव और महत्व समझते हैं:
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सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना.
भावार्थ (भाव और अर्थ) (Bhavartha (sense and meaning):):
जो व्यक्ति हनुमान जी की शरण में आता है, उसे जीवन में हर प्रकार का सुख प्राप्त होता है – मानसिक शांति, स्वास्थ्य, सुरक्षा, और आत्मविश्वास।
हनुमान जी जब रक्षक बन जाते हैं, तो फिर उसे किसी शत्रु, कष्ट या भय से डरने की ज़रूरत नहीं होती। उनका आशीर्वाद इतना बलशाली है कि सभी संकट अपने आप दूर हो जाते हैं।
ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (Rinharta Ganesh Stotra)
महत्व (Importance:):
- भक्ति का बल – यह पंक्ति सिखाती है कि सच्चे मन से यदि कोई हनुमान जी की भक्ति करे, तो उसे संसार में कोई दुख या भय छू नहीं सकता।
- आत्मिक सुरक्षा – जीवन के अनिश्चित और कठिन समय में यह विश्वास दिलाती है कि हम अकेले नहीं हैं; हनुमान जी हमारे साथ हैं।
- साहस और आत्मबल – भक्त को भीतर से शक्ति और साहस मिलता है, जिससे वह जीवन की किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है।
Shree Lalitha Sahasranama (श्रीललितासहस्रनामस्तोत्रम्)


