यह पंक्तियाँ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा का हिस्सा हैं। हनुमान चालीसा एक 40 चौपाइयों वाला स्तोत्र है जो भगवान हनुमान जी की महिमा का गुणगान करता है। यह विशेष दोहा बाल हनुमान जी की असीम शक्ति, साहस और भक्ति को दर्शाता है।
इसमें वर्णन है कि जब हनुमान जी छोटे थे, उन्होंने चमकते हुए सूर्य को एक मीठा फल समझ लिया और उसे निगलने के लिए आकाश की ओर उड़ पड़े। यह उनकी दिव्य शक्ति और आत्मबल का प्रतीक है।
“जुग सहस्त्र जोजन पर भानु,
लील्यो ताहि मधुर फल जानु।”
अर्थ:
- जुग सहस्त्र जोजन पर भानु: “जुग” (युग) का अर्थ यहाँ एक विशेष माप से है — 1 युग = 12,000 योजन, और सहस्त्र = 1000। इसका संकेत यह है कि सूर्य बहुत दूर था (संकेत 800,000 योजन की दूरी का है)।
- लील्यो ताहि मधुर फल जानु: हनुमान जी ने सूर्य को यह सोचकर निगल लिया कि वह कोई मीठा फल है।
भावार्थ:
बालक हनुमान जी ने बचपन में सूर्य को बहुत दूर चमकता हुआ देख, उसे एक मीठा फल समझ लिया और आकाश में उड़कर उसे निगल लिया। यह उनकी अपार शक्ति और साहस का प्रतीक है।
लाभ (Benefits)
- भय और बाधाओं से रक्षा: इस पंक्ति को पढ़ने से व्यक्ति के मन से डर, भ्रम और मानसिक कमजोरी दूर होती है।
- आत्मबल में वृद्धि: यह दोहा साहस, आत्मविश्वास और शक्ति की प्रेरणा देता है।
- संकट में साहस का संचार: जीवन में जब भी कठिनाइयाँ आएं, यह दोहा हमें याद दिलाता है कि अंदर अपार शक्ति छिपी है।
- बच्चों में सकारात्मकता: बच्चों को यह कथा सुनाने से उनमें आत्मविश्वास और शक्ति की भावना आती है।
- भक्ति की भावना: हनुमान जी के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ती है।
महत्व (Importance)
- यह दोहा बताता है कि सीमा से परे कुछ भी असंभव नहीं, अगर इच्छाशक्ति हो।
- हनुमान जी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, भक्ति, साहस और सेवा के भी प्रतीक हैं।
- यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि बाल अवस्था में भी परमात्मा की कृपा से कोई भी कार्य किया जा सकता है।
- इस दोहे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह मान्यता है कि योजन एक प्राचीन दूरी माप है, जिससे हनुमान जी की उड़ान की कल्पना को गणितीय रूप से समझा जा सकता है।


