Categories
Chalisa

अहल्याक्रुता श्रीराम स्तोत्रं (Ahalya Kruta Sri Rama Stotram)

हिंदी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

अहल्या कृत श्रीराम स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जो महर्षि गौतम की पत्नी अहल्या द्वारा भगवान श्रीराम की स्तुति में रचा गया है। यह स्तोत्र “अध्यात्म रामायण” के बालकांड के पंचम सर्ग में मिलता है।

पौराणिक संदर्भ (Mythological references):

  • अहल्या, जो महर्षि गौतम की पत्नी थीं, इंद्र के छल के कारण श्रापवश पत्थर बन गईं।
  • श्रीराम जब विश्वामित्र के साथ मिथिला जाते समय उनके आश्रम पहुंचे, तो उनके चरणों के स्पर्श से अहल्या पुनः अपने स्वरूप में आ गईं।
  • यह देखकर अहल्या अत्यंत भावविभोर हुईं और हर्षित होकर इस स्तोत्र की रचना की।

स्तोत्र की विशेषताएँ (Features of the Stotra):

  • इसमें अहल्या ने श्रीराम के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा, उनकी लीलाओं और उनके परब्रह्म स्वरूप का वर्णन किया है।
  • यह स्तोत्र भगवान राम के गुणगान के साथ ही संसार के मोह और माया को समझने की सीख देता है।
  • इसमें श्रीराम को ओंकारस्वरूप, परब्रह्म, सर्वव्यापी और मायापति बताया गया है।

स्तोत्र के लाभ (Benefits of Stotra):

  • इस स्तोत्र के पाठ से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • जो भक्त पुत्र सुख चाहते हैं, वे श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करें तो संतान सुख प्राप्त होता है।
  • श्रीराम की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • जो व्यक्ति निष्कपट भाव से इसका नित्य पाठ करता है, वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर भगवान की भक्ति प्राप्त करता है।

अहल्याक्रुता श्रीराम स्तोत्रं (Ahalya Kruta Sri Rama Stotram):

अहल्या उवाच:
अहो कृतार्थाऽस्मि जगन्निवास ते
पादाब्जसंलग्नरजःकणादहम् ।
स्पृशामि यत्पद्मजशङ्करादिभि-
-र्विमृग्यते रन्धितमानसैः सदा ॥ १ ॥

अहो विचित्रं तव राम चेष्टितं
मनुष्यभावेन विमोहितं जगत् ।
चलस्यजस्रं चरणादिवर्जितः
सम्पूर्ण आनन्दमयोऽतिमायिकः ॥ २ ॥

यत्पादपङ्कजपरागपवित्रगात्रा
भागीरथी भवविरिञ्चिमुखान्पुनाति ।
साक्षात्स एव मम दृग्विषयो यदास्ते
किं वर्ण्यते मम पुराकृतभागधेयम् ॥ ३ ॥

मर्त्यावतारे मनुजाकृतिं हरिं
रामाभिधेयं रमणीयदेहिनम् ।
धनुर्धरं पद्मविशाललोचनं
भजामि नित्यं न परान्भजिष्ये ॥ ४ ॥

यत्पादपङ्कजरजः श्रुतिभिर्विमृग्यं
यन्नाभिपङ्कजभवः कमलासनश्च ।
यन्नामसाररसिको भगवान्पुरारि-
-स्तं रामचन्द्रमनिशं हृदि भावयामि ॥ ५ ॥

यस्यावतारचरितानि विरिञ्चिलोके
गायन्ति नारदमुखा भवपद्मजाद्याः ।
आनन्दजाश्रुपरिषिक्तकुचाग्रसीमा
वागीश्वरी च तमहं शरणं प्रपद्ये ॥ ६ ॥

सोऽयं परात्मा पुरुषः पुराणः
एषः स्वयञ्ज्योतिरनन्त आद्यः ।
मायातनुं लोकविमोहनीयां
धत्ते परानुग्रह एष रामः ॥ ७ ॥

अयं हि विश्वोद्भवसम्यमाना-
-मेकः स्वमायागुणबिम्बितो यः ।
विरिञ्चिविष्ण्वीश्वरनामभेदान्
धत्ते स्वतन्त्रः परिपूर्ण आत्मा ॥ ८ ॥

नमोऽस्तु ते राम तवाङ्घ्रिपङ्कजं
श्रिया धृतं वक्षसि लालितं प्रियात् ।
आक्रान्तमेकेन जगत्त्रयं पुरा
ध्येयं मुनीन्द्रैरभिमानवर्जितैः ॥ ९ ॥

जगतामादिभूतस्त्वं जगत्त्वं जगदाश्रयः ।
सर्वभूतेष्वसम्युक्त एको भाति भवान्परः ॥ १० ॥

ओङ्कारवाच्यस्त्वं राम वाचामविषयः पुमान् ।
वाच्यवाचकभेदेन भवानेव जगन्मयः ॥ ११ ॥

कार्यकारणकर्तृत्वफलसाधनभेदतः ।
एको विभासि राम त्वं मायया बहुरूपया ॥ १२ ॥

त्वन्मायामोहितधियस्त्वां न जानन्ति तत्त्वतः ।
मानुषं त्वाऽभिमन्यन्ते मायिनं परमेश्वरम् ॥ १३ ॥

आकाशवत्त्वं सर्वत्र बहिरन्तर्गतोऽमलः ।
असङ्गो ह्यचलो नित्यः शुद्धो बुद्धः सदव्ययः ॥ १४ ॥

योषिन्मूढाऽहमज्ञा ते तत्त्वं जाने कथं विभो ।
तस्मात्ते शतशो राम नमस्कुर्यामनन्यधीः ॥ १५ ॥

देव मे यत्र कुत्रापि स्थिताया अपि सर्वदा ।
त्वत्पादकमले सक्ता भक्तिरेव सदाऽस्तु मे ॥ १६ ॥

नमस्ते पुरुषाध्यक्ष नमस्ते भक्तवत्सल ।
नमस्तेऽस्तु हृषीकेश नारायण नमोऽस्तु ते ॥ १७ ॥

भवभयहरमेकं भानुकोटिप्रकाशं
करधृतशरचापं कालमेघावभासम् ।
कनकरुचिरवस्त्रं रत्नवत्कुण्डलाढ्यं
कमलविशदनेत्रं सानुजं राममीडे ॥ १८ ॥

स्तुत्वैवं पुरुषं साक्षाद्राघवं पुरतः स्थितम् ।
परिक्रम्य प्रणम्याशु साऽनुज्ञाता ययौ पतिम् ॥ १९ ॥

फलश्रुति:
अहल्यया कृतं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिसम्युतः ।
स मुच्यतेऽखिलैः पापैः परं ब्रह्माधिगच्छति ॥ २० ॥

पुत्राद्यर्थे पठेद्भक्त्या रामं हृदि निधाय च ।
संवत्सरेण लभते वन्ध्या अपि सुपुत्रकम् ॥ २१ ॥

सर्वान्कामानवाप्नोति रामचन्द्रप्रसादतः ॥ २२ ॥

ब्रह्मघ्नो गुरुतल्पगोऽपि पुरुषः स्तेयी सुरापोऽपि वा
मातृभ्रातृविहिंसकोऽपि सततं भोगैकबद्धातुरः ।
नित्यं स्तोत्रमिदं जपन् रघुपतिं भक्त्या हृदिस्थं स्मरन्
ध्यायन्मुक्तिमुपैति किं पुनरसौ स्वाचारयुक्तो नरः ॥ २३ ॥

इति श्रीमदध्यात्मरामायणे बालकाण्डे पञ्चमसर्गे अहल्या कृत श्री राम स्तोत्रम्।

Please follow and like us:
error2
fb-share-icon20
Tweet 20

Oh hi there 👋 It’s nice to meet you.

Sign up to receive awesome content in your inbox, every month.

Tourist places

Panchdeheriya Mahadev Mandir, Agar Malwa

Nestled in the lap of the Vindhya mountain ranges lies a divine shrine where the tranquility of nature blends with...
Read More
Tourist places

Chausath Yogini Mata Temple, Agar Malwa – Mysticism, Legends, and Spiritual Energy

Introduction – An Open Sky and a Circle of Goddesses The Chausth Yogini Temple in Agar Malwa is one of...
Read More
Tourist places

Badi Mata Pacheti Temple: A Spiritual Treasure of Agar-Malwa

In Agar-Malwa district of Madhya Pradesh, there is a temple where the devotion of the devotees and the blessings of...
Read More
Tourist places

Maa Tulja Bhavani Mandir, Agar Malwa

In the Malwa region of Madhya Pradesh, near Agar-Malwa district, lies an ancient temple — Maa Tulja Bhavani Mandir. This...
Read More
Tourist places

Kewda Swami Bhairavnath Temple, Agar Malwa (Madhya Pradesh)

Kewda Swami Bhairavnath Temple is an ancient and famous temple located in the Agar-Malwa district of Madhya Pradesh. The temple...
Read More
Katni tourist places Tourist places

Nandchand Shiva Temple, Rithi – Katni: A Unique Blend of Devotion and Ancient Heritage

Located a few kilometers away from Rithi in Katni district, Madhya Pradesh, the Nandchand Shiva Temple beautifully combines devotion and...
Read More
Tourist places

Nohleshwar Mahadev Temple, Nohta – A Living Example of History, Culture, and Architecture

Located in the small village of Nohta in Jabera Tehsil of Damoh district, Madhya Pradesh, Nohleshwar Mahadev Temple is not...
Read More
Tourist places Uncategorized

Nohata Jain Temple – A Confluence of Faith, History and Miracles

Shri Digambar Jain Atishay Kshetra, Adishwargiri (Nohata), located in Jabera tehsil of Damoh district, Madhya Pradesh, is not only a...
Read More
1 2 3 12

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए https://newandolder.com/ उत्तरदायी नहीं है।

Disclaimer: This news is based on public beliefs. https://newandolder.com/ is not responsible for the accuracy, completeness of the information and facts included in this news.