अंगारक स्तोत्रम (Angaraka Stotram) एक पवित्र स्तोत्र है जो अंगारक ग्रह यानी मंगल (भौम) देव की स्तुति के लिए रचा गया है। इसे नियमित रूप से पाठ करने से मंगल ग्रह से संबंधित दोष, ऋण, रोग, दुर्भाग्य और दरिद्रता का नाश होता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस स्तोत्र में मंगल ग्रह के विभिन्न नामों, स्वरूपों और प्रभावों का वर्णन किया गया है।
अन्गारका (मंगल) स्तोत्र का महत्त्व (Importance of Angarak (Mangal) Stotra)
इस स्तोत्र का पाठ करने से:
- ऋण का नाश होता है।
- दुर्भाग्य और दरिद्रता समाप्त होती है।
- धन, संतान और इच्छाओं की पूर्ति होती है।
- ग्रह पीड़ा, रोग और मानसिक अशांति समाप्त होती है।
अन्गारका स्तोत्रम (Angaraka Stotram):
अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥१॥
ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः।
विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥२॥
सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥३॥
रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः॥४॥
ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥५॥
वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः, योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः।
सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥६॥
विशेष पूजा विधि (Special worship method)
- मंगलवार के दिन लाल वस्त्र पहनकर, लाल पुष्प, चंदन, और गुड़ का भोग अर्पित करें।
- मंगल ग्रह के इस स्तोत्र का पाठ करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
- मंगल यंत्र और मूंगा रत्न धारण करने से भी लाभ मिलता है।


