श्री आदिमाता शुभंकरा स्तवनम् एक दिव्य संस्कृत स्तोत्र है, जो आदिमाता श्री गायत्री देवी की महिमा और कृपा का वर्णन करता है। इसमें देवी को वेदमाता, सर्वशक्ति स्वरूपिणी और भक्तों की रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह स्तोत्र देवी की वात्सल्य शक्ति, उनकी बुराइयों का नाश करने की क्षमता और महिषासुरमर्दिनी के रूप में उनकी विजय का गुणगान करता है।
श्री आदिमाता शुभंकरा स्तवनम् (Shri Adimata Shubhankara Stavanam):
आदिमाते वेदमाते भक्तानुग्रहकारिणी |
सर्वत्रव्यापिकेSनन्ते श्रीगायत्री नमोSस्तु ते || १ ||
तालुस्था त्वं सदाधारा बिन्दुस्था बिन्दुमालिनी |
परात्परे वात्सल्यशक्ति: अनसूये नमोSस्तु ते || २ ||
कुकर्म-कुसंग-कुबुद्धि-कुदृष्टिविनाशिनी |
चामुण्डे चण्डमुण्डमथने महिषासुरमर्दिनी नमोSस्तु ते || ३ ||
प्रातर्बाला च मध्यान्हे यौवनस्था भवेत् पुनः |
वृद्धा सायं भगवति महादेव्यै नमो नमः || ४ ||
या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः || ५ ||
श्री आदिमाता शुभंकरा स्तवनम् के लाभ (Benefits of Shri Aadimata Subhankara Stavanam)
- आध्यात्मिक शांति – इस स्तोत्र का नित्य जाप करने से मन शांत रहता है और आत्मबल की वृद्धि होती है।
- संकटों का नाश – इसे श्रद्धा और भक्ति से पढ़ने पर जीवन के समस्त संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा – यह स्तोत्र मानसिक और भावनात्मक शक्ति प्रदान करता है, जिससे मन में सकारात्मकता बनी रहती है।
- दुर्भाग्य का नाश – यह स्तोत्र जीवन से दुर्भाग्य और नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।
- मनोकामना पूर्ति – सच्चे हृदय से इस स्तोत्र का पाठ करने से इच्छाओं की पूर्ति होती है।
- रोग निवारण – इसे पढ़ने से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
- सुरक्षा कवच – यह स्तोत्र एक दिव्य कवच की तरह कार्य करता है, जो नकारात्मक ऊर्जा और दुष्ट प्रभावों से रक्षा करता है।
यदि आप इस स्तोत्र को सुनना या पढ़ना चाहते हैं, तो इसे नियमित रूप से करने से मानसिक और भौतिक स्तर पर लाभ होगा।


