यह मंत्र भगवान जगन्नाथ की स्तुति करने वाला एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली मंत्र है। यह भगवान जगन्नाथ की महिमा का वर्णन करता है और उनकी दिव्य उपस्थिति को नमन करता है।
भगवान जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) के नीलांचल क्षेत्र में विराजमान हैं, जहां उनका विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर स्थित है। इस मंत्र में भगवान जगन्नाथ को संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी (परमात्मा) के रूप में स्वीकार किया गया है, जो अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों को कृपा प्रदान करते हैं।
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने – भगवान जगन्नाथ मंत्र
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः।।
मंत्र का महत्व (Importance of the mantra):
● यह मंत्र भगवान जगन्नाथ की अखंड भक्ति और श्रद्धा को दर्शाता है।
● इसे जपने से मन को शांति, आध्यात्मिक जागृति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
● यह मंत्र पुरी की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान विशेष रूप से उच्चारित किया जाता है।
● भगवान जगन्नाथ, जो श्रीकृष्ण का ही एक रूप माने जाते हैं, इस मंत्र के जाप से अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
यह मंत्र न केवल भगवान जगन्नाथ की महिमा गाने का एक माध्यम है, बल्कि भक्ति, प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक भी है। श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है।


