होलिका दहन भारतीय संस्कृति और धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की भक्ति, भगवान नृसिंह के दिव्य स्वरूप और होलिका के अंत की कथा से जुड़ा हुआ है। इस शुभ अवसर पर सही विधि और मंत्रों के उच्चारण से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, दुर्भाग्य दूर होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
होलिका दहन के पावन पूजन के समय इन मंत्रों का जाप करना चाहिए:
‘ओं होलिकायै नम:‘ बोलकर गंध-अक्षत इत्यादि चढ़ाएं।
‘ओं प्रहलादाय नम:’ बोलकर गंध-अक्षत चढ़ाएं।
होलिका दहन के समय इन मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है (These mantras can also be chanted at the time of Holika Dahan):
1.अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।
2.ॐ होलिकायै नमः
3.ॐ प्रह्लादाय नमः
4.ॐ नृसिंहाय नमः
5.ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
6.उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
होलिका दहन के समय यह उपाय करें (Take these measures at the time of Holika Dahan):
- गंध-अक्षत चढ़ाना।
- सूत को सात बार होलिका पर लपेटना।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अभिषेक करना।
- ‘ओं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना।
- बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाना।
- मिठाई का भोग लगाना।
- हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना।
- भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करना।
- ‘कृं कृष्णाय नम:’ मंत्र का जाप करना।
- किसी गोशाला में गायों के लिए धन और हरी घास का दान करना।


