माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। राजा जनक की पुत्री होने के कारण उन्हें जानकी और जनकसुता कहा जाता है, जबकि मिथिला की राजकुमारी होने के कारण वह मैथिली के नाम से भी प्रसिद्ध हैं।
माता सीता का विवाह भगवान श्रीराम से हुआ और उन्होंने अपने पति के साथ 14 वर्षों का वनवास सहन किया। माता सीता के नाम के स्मरण मात्र से सुख-शांति प्राप्त होती है, और इसीलिए आज भी कई भक्त भगवान राम से पहले माता सीता का नाम लेते हैं।
1.सीता गायत्री मंत्र
ॐ जनकनन्दिंयै विद्महे, भूमिजयै धीमहि, तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।
2.सीता गायत्री मंत्र
ॐ जनक जाय विद्महे, राम प्रिया धीमहि, तन्नो सीता प्रचोदयात
सीता मंत्र जाप के नियम (Rules for chanting the Sita Mantra)
सीता मंत्र का जाप करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना चाहिए:
- शुद्ध उच्चारण: मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध रूप में करना आवश्यक है।
- स्नान के बाद जाप: बिना स्नान किए मंत्र जाप करने से बचना चाहिए।
- स्थान की शुद्धता: जाप करने का स्थान स्वच्छ और शांत होना चाहिए।
- शुद्ध आहार: तामसिक भोजन (मांस, लहसुन, प्याज आदि) से परहेज करना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य का पालन: मंत्र जाप के दौरान संयम और पवित्रता बनाए रखना चाहिए।


