ॐ मारुती नंदन नमो नमः, कष्ट भंजन नमो नमः।
असुर निकंदन नमो नमः, श्री राम दूतं नमो नमः ॥
कुबेर जी की आरती (Kuber ji ki aarti)
मंत्र का अर्थ (Meaning of Mantra:):
हे पवनपुत्र हनुमान जी! आपको बारंबार नमन। आप कष्टों का नाश करने वाले हैं, आपको बारंबार नमन। असुरों का संहार करने वाले वीर, आपको बारंबार नमन। श्रीराम के प्रिय दूत, आपको बारंबार नमन।
श्री विश्वकर्मा आरती (Shri Vishwakarma Aarti)
इस मंत्र के लाभ (Benefits of this mantra):
● संकट और बाधाओं का नाश: यह मंत्र सभी कष्टों को दूर करता है।
● नकारात्मक ऊर्जा और भय से रक्षा: बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
● आत्मविश्वास और शक्ति में वृद्धि: साहस और आत्मबल प्राप्त होता है।
● ग्रह दोष और शनि पीड़ा से मुक्ति: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में लाभदायक।
● स्वास्थ्य और रोग नाश: मानसिक तनाव और बीमारियों से मुक्ति।
● शत्रु बाधा से मुक्ति: शत्रुओं से बचाव और सफलता में सहायक।
अहोई माता जी की आरती (Ahoi Mata Ji ki Aarti)
जप विधि (Chanting Method):
● सर्वश्रेष्ठ दिन: मंगलवार और शनिवार।
● समय: प्रातःकाल (सुबह) या संध्या समय।
● मंत्र जप की संख्या: कम से कम 108 बार जप करें।
● आसन: कुश या लाल रंग का आसन।
● माला: तुलसी, रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला।
● स्नान और स्वच्छ वस्त्र: लाल या भगवा वस्त्र पहनें।
● हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।
● गुड़ और चने का भोग अर्पित करें।
सिद्धिविनायक जी की आरती (Siddhivinayak ji ki aarti)
विशेष दिन और अवसर (Special days and occasions):
● मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर जप करें।
● हनुमान जयंती और श्रीराम नवमी पर जप करने से विशेष फल मिलता है।
● शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, या ग्रह दोष के निवारण के लिए जप करें।
● संकट और बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए 21 दिनों तक रोज 108 बार जप करें।
गोरखनाथ जी की आरती (Gorakhnath ji ki aarti)
जानकीनाथ जी की आरती (Jankinath ji ki aarti)
संकटा जी की आरती (Sankata ji ki aarti)
ललिता जी की आरती (Lalita ji ki aarti)
धर्मराज जी की आरती (Dharamraj ji ki aarti)


