यह आरती मानसिक और शारीरिक कष्टों को दूर करने में सहायक होती है। साथ ही, यह भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति की ओर मार्गदर्शन करती है।
सत्यनारायण जी की आरती (Satyanarayan ji ki aarti)
दत्ताची आरती का महत्व (Importance of Dattachi Aarti)
भगवान दत्तात्रेय की आरती करने से भक्तों को शीघ्र शुभ फल की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है और वे अपने भक्तों पर सदा अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यदि भक्त सच्चे मन से प्रतिदिन प्रातः और संध्या के समय दत्ताची आरती का पाठ करें, तो परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है, साथ ही पाप, रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है। आइए, श्रद्धा और भक्ति के साथ दत्ताची आरती का पाठ करें।
गायत्री माता आरती (Gayatri Mata Aarti)
दत्तात्रेय जी की आरती (Dattatreya ji ki aarti)
त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।
त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।
नेती नेती शब्द न ये अनुमाना
॥ सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।
आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥
सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।
अभाग्यासी कैची कळेल हि मात
॥ पराही परतली तेथे कैचा हेत ।
जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥
दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।
भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला
॥ प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।
जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥
दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।
हरपले मन झाले उन्मन
॥ मी तू पणाची झाली बोळवण ।
एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥
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