भगवद् गीता की आरती का गायन व्यक्ति को भगवान की भक्ति में लीन करता है और उसे आध्यात्मिक शांति और आत्मज्ञान प्राप्त करने में सहायता करता है।
ॐ नमो हनुमते भय भंजनाय मंत्र (Om Namo Hanumate Bhaybhanjanaya Mantra)
श्री भगवद् गीता की महिमा (Glory of Shri Bhagavad Gita)
श्रीमद् भगवद् गीता सम्पूर्ण मानव जाति के उद्धार और मार्गदर्शन के लिए है। यह केवल किसी एक वर्ग, आश्रम या देश के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी शास्त्र है। जो भी श्रद्धा और भक्ति के साथ गीता का अध्ययन और स्मरण करता है, वह परम सिद्धि और आत्मकल्याण को प्राप्त कर सकता है।
33 कोटि का वास्तविक अर्थ और पौराणिक दृष्टिकोण
भगवद् गीता आरती का महत्व (Importance of Bhagavad Geeta Aarti)
- कल्याण की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भगवद् गीता का पाठ करना चाहिए।
- दूसरों को भी गीता पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित करें।
- प्रतिदिन श्रद्धा के साथ गीता की आरती करें, जिससे जीवन में शांति, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो।
गणपति अथर्वशीर्षम (Ganapathy Atharvaseersham)
गीता की आरती करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में धर्म, भक्ति और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।
गणेश गायत्री मंत्र (Ganesh Gayatri Mantra)
भगवद् गीता जी की आरती (Prayer of Bhagavad Gita:):
जय भगवद् गीते,
जय जय भगवद् गीते।
हरि-हिय-कमल-विहारिणी,
सुन्दर सुपुनीते॥
जय जय भगवद् गीते।
कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,
कामासक्ति हरा।
तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,
विद्या ब्रह्म परा॥
जय जय भगवद् गीते।
निश्चल-भक्ति-विधायिनी,
निर्मल मल्हारी।
शरण-सहस्य-प्रदायिनि,
सब विधि सुख कारी॥
जय जय भगवद् गीते।
राग-द्वेष-विदारिणी,
कारिणि मोद सदा।
भव-भय-हारिणि तारिणी,
परमानंद प्रदा॥
जय जय भगवद् गीते।
आसुर-भाव-विनाशिनि,
नाशिनी तम रजनी।
दैवी सद् गुणदायिनि,
हरि-रसिका सजनी॥
जय जय भगवद् गीते।
समता, त्याग सिखावनि,
हरि-मुख की बानी।
सकल शास्त्र की स्वामिनी,
श्रुतियों की रानी॥
जय जय भगवद् गीते।
दया-सुधा बरसावनि,
मातु! कृपा कीजै।
हरिपद-प्रेम दान कर,
अपनो कर लीजै॥
जय जय भगवद् गीते।
जय भगवद् गीते,
जय जय भगवद् गीते।
हरि-हिय-कमल-विहारिणी,
सुन्दर सुपुनीते॥
जय जय भगवद् गीते।
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