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कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa)

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कैला देवी चालीसा का पाठ करने से भक्तों को शत्रुओं, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार की बाधाओं से सुरक्षा मिलती है। यह चालीसा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

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कैला देवी कौन हैं? (Who is Kaila Devi?)

श्रीमद्भागवत कथा के अनुसार, जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब उनके पिता वासुदेव जी उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ने गए थे। उसी समय, वासुदेव और देवकी के घर भी एक कन्या का जन्म हुआ था। जब कंस को इस बात की सूचना मिली, तो वह नवजात कन्या को मारने के लिए दौड़ा। लेकिन जैसे ही उसने कन्या को पत्थर पर पटकने का प्रयास किया, वह तुरंत आकाश में उड़ गई और देवी रूप में प्रकट होकर कंस से बोली – “तुझे मारने वाला इस धरती पर जन्म ले चुका है।”

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कालांतर में यही देवी भक्तों के बीच कैला देवी के रूप में विख्यात हुईं। उनकी पूजा विशेष रूप से कलियुग में संकटमोचक के रूप में की जाती है। कैला देवी चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

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कैला देवी चालीसा पढ़ने के लाभ (Benefits of reading Kaila Devi Chalisa)

कैला देवी अपनी कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। वे अपने भक्तों की जाने-अनजाने में हुई गलतियों को भी क्षमा कर देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति से कैला देवी चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी कार्य सफल होते हैं और मार्ग की समस्त बाधाएँ दूर हो जाती हैं।

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नियमित रूप से माँ कैला देवी की चालीसा पढ़ने से व्यक्ति को धन, बल, विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है, जिससे वह जीवन में उन्नति करता है। साथ ही, यदि भक्त सुबह-शाम कैला देवी चालीसा का पाठ करता है, तो उसे नकारात्मक शक्तियों, भूत-प्रेत बाधाओं से सुरक्षा मिलती है और उसके जीवन से दरिद्रता एवं दुःखों का नाश होता है।

आइए, माँ कैला देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए उनके चालीसा पाठ का संकल्प लें और सरल भाषा में इसका पाठ करें।

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कैला देवी चालीसा दोहा (Kaila Devi Chalisa Doha)

जय जय कैला मात हे तुम्हे नमाउ माथ।

शरण पडूं में चरण में जोडूं दोनों हाथ॥

आप जानी जान हो मैं माता अंजान।

क्षमा भूल मेरी करो करूँ तेरा गुणगान॥

कैला देवी चालीसा चौपाई (Kaila Devi Chalisa Chaupai)

जय जय जय कैला महारानी, नमो नमो जगदम्ब भवानी।

सब जग की हो भाग्य विधाता, आदि शक्ति तू सबकी माता।

दोनों बहिना सबसे न्यारी, महिमा अपरम्पार तुम्हारी।

शोभा सदन सकल गुणखानी, वैद पुराणन माँही बखानी।

जय हो मात करौली वाली, शत प्रणाम कालीसिल वाली।

ज्वालाजी में ज्योति तुम्हारी, हिंगलाज में तू महतारी।

तू ही नई सैमरी वाली, तू चामुंडा तू कंकाली।

नगर कोट में तू ही विराजे, विंध्यांचल में तू ही राजै।

धौलागढ़ बेलौन तू माता, वैष्णवदेवी जग विख्याता।

नव दुर्गा तू मात भवानी, चामुंडा मंशा कल्याणी।

जय जय सूये चोले वाली, जय काली कलकत्ते वाली।

तू ही लक्ष्मी तू ही ब्रम्हाणी, पार्वती तू ही इन्द्राणी।

सरस्वती तू विद्या दाता, तू ही है संतोषी माता।

अन्नपुर्णा तू जग पालक, मात पिता तू ही हम बालक।

तू राधा तू सावित्री, तारा मतंग्डिंग गायत्री।

तू ही आदि सुंदरी अम्बा, मात चर्चिका हे जगदम्बा।

एक हाथ में खप्पर राजै, दूजे हाथ त्रिशूल विराजै।

कालीसिल पै दानव मारे, राजा नल के कारज सारे।

शुम्भ निशुम्भ नसावनि हारी, महिषासुर को मारनवारी।

रक्तबीज रण बीच पछारो, शंखासुर तैने संहारो।

ऊँचे नीचे पर्वत वारी, करती माता सिंह सवारी।

ध्वजा तेरी ऊपर फहरावे, तीन लोक में यश फैलावे।

अष्ट प्रहर माँ नौबत बाजै, चाँदी के चौतरा विराजै।

लांगुर घटूअन चलै भवन में, मात राज तेरौ त्रिभुवन में।

घनन-घनन घन घंटा बाजत, ब्रह्मा विष्णु देव सब ध्यावत।

अगनित दीप जले मंदिर में, ज्योति जले तेरी घर-घर में।

चौसठ जोगिन आंगन नाचत, बामन भैरों अस्तुति गावत।

देव दनुज गन्धर्व व किन्नर, भूत पिशाच नाग नारी नर।

सब मिल माता तोय मनावे, रात दिन तेरे गुण गावे।

जो तेरा बोले जयकारा, होय मात उसका निस्तारा।

मना मनौती आकर घर सै, जात लगा जो तोंकू परसै।

ध्वजा नारियल भेंट चढ़ावे, गुंगर लौंग सो ज्योति जलावै।

हलुआ पूरी भोग लगावै, रोली मेहंदी फूल चढ़ावे।

जो लांगुरिया गोद खिलावै, धन बल विद्या बुद्धि पावै।

जो माँ को जागरण करावै, चाँदी को सिर छत्र धरावै।

जीवन भर सारे सुख पावै, यश गौरव दुनिया में छावै।

जो भभूत मस्तक पै लगावे, भूत-प्रेत न वाय सतावै।

जो कैला चालीसा पढ़ता, नित्य नियम से इसे सुमरता।

मन वांछित वह फल को पाता, दुःख दारिद्र नष्ट हो जाता।

गोविन्द शिशु है शरण तुम्हारी, रक्षा कर कैला महतारी।

कैला देवी चालीसा दोहा (Kaila Devi Chalisa Doha)

संवत तत्व गुण नभ भुज सुन्दर रविवार।

पौष सुदी दौज शुभ पूर्ण भयो यह कार॥

ॐ श्री लक्ष्मी सहोदराय नमः (Om Shree Laxmi Sahodaraya Namah)

ॐ अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः।।

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः (Om Hreem Shreem Lakshmi Bhyo Namaha)

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ऊँ लक्ष्मी नारायणाभ्यां नमः (Om Lakshmi Narayanabhyam Namah)

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