चंद्र गायत्री मंत्र के विभिन्न रूपों का प्रयोग चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने, मानसिक शांति, चित्त की स्थिरता और चंद्र दोष निवारण के लिए किया जाता है। यहाँ सभी प्रमुख चंद्र गायत्री मंत्र, उनके महत्व, लाभ, और जप विधि दी गई है।
- ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।
- ॐ क्षीर पुत्राय विद्महे अमृततत्वाय धीमहि ! तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात !
- ॐ पद्मद्वाजय विद्महे हेम रूपायै धीमहि ! तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात !
लाभ और जप विधि:
- यदि सुखी दांपत्य जीवन की इच्छा हो, तो “ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय…” मंत्र जपें।
- यदि चंद्र दोष निवारण करना है, तो “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे…” मंत्र श्रेष्ठ है।
- यदि सुंदरता और आभा बढ़ानी हो, तो “ॐ पद्मद्वाजाय विद्महे…” मंत्र सर्वोत्तम है।
सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa)
सारांश
| मंत्र | महत्व | लाभ | जप विधि |
|---|---|---|---|
| ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे… | चंद्रमा की शीतलता और सौम्यता | मानसिक शांति, चंद्र दोष निवारण | पूर्णिमा को जल में प्रतिबिंब देखकर जप करें |
| ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय… | 16 कलाओं का जागरण | रिश्तों में प्रेम, तनाव मुक्ति | सोमवार रात 12 बजे जप करें |
| ॐ पद्मद्वाजाय विद्महे… | सौंदर्य और आकर्षण बढ़ाने वाला | रूप और आभा में वृद्धि | चांदी के पात्र में जल रखकर करें |
इन मंत्रों का नियमित जप चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है और जीवन में मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता, और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
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