ये राम चरित मानस की पंक्तियां हैं. इन पंक्तियों में जामवंत श्री हनुमान जी सोई हुई शक्तियों को जगाने का प्रयास करते हैं।
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।
पंक्तियों का हिन्दी में अनुवाद:-
इस पंक्ति में जामवंत हनुमान जी से कहते हैं कि ऐसा कोई भी काम नहीं करता जो तुम नहीं कर सकते हो और जामवंत जी की इस बात को सुनकर हनुमान जी सभी शक्तियां जागृत हो गई थीं। और हनुमान जी ने विशाला आकर ले लिया और लंका की तरह चल पड़े माता सीता की खोज में।
अगर कोई इन पंक्तियों को 108 बार सच्चे हार्ट से पढता है तो हनुमान जी खुद उसकी हेल्प करने आते हैं.


