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अंजनीगर्भ संभूत – हनुमान जी की शरणागति और रक्षा-प्रार्थना मंत्र (Anjani-garbh sambhoot – Hanuman ji ki sharanagati aur raksha-prarthana mantra)

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हनुमान जी को संकटमोचक, बल-बुद्धि के दाता और श्रीराम के परम भक्त के रूप में जाना जाता है। जब जीवन में भय, बाधाएँ या मानसिक अशांति घेर लेती हैं, तब हनुमान जी की शरण सबसे सशक्त सहारा बनती है। “अंजनीगर्भ संभूत कपिन्द्र सचिवोत्तम” यह मंत्र हनुमान जी के उसी दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है, Read More

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श्री नवनाथ स्तोत्र (Navnath Stotra)

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श्री नवनाथ स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और भक्तिपूर्ण प्रार्थना है, जिसमें नौ नाथ गुरुओं — जैसे कि मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षनाथ, जालंधरनाथ, कानिफनाथ, चर्पटीनाथ, नागनाथ, भर्तृहरिनाथ, रेवणसिद्ध, गहिनीनाथ — को नमन किया गया है।यह स्तोत्र इन महान योगी गुरुओं के आध्यात्मिक महत्व, योगसिद्धियों और दिव्य गुणों का वर्णन करता है।इसका पाठ पापों का नाश करने, गुरु कृपा Read More

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नवनाग स्तुति (Navanaga Stuti)

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नवनागस्तुति एक प्राचीन स्तोत्र है जिसमें नौ महान नागों (सर्पों) की स्तुति की गई है। इन नागों के नाम हैं — अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय।यह स्तुति विशेष रूप से सर्पदंश (साँप के काटने) से रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस Read More

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एकाक्षी दुर्गा (Ekakshi Durga)

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एकाक्षी दुर्गा देवी दुर्गा का एक अत्यंत दुर्लभ और रहस्यमयी रूप है। यह स्तोत्र माता की असीम शक्ति और उनके विभिन्न रूपों की स्तुति करता है। इसमें देवी के उन स्वरूपों का स्मरण है जिन्होंने असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की। इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के सभी संकट, भय और Read More

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तुलसीस्तुति: (Tulsi Stuti)

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तुलसी माता को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां भगवान विष्णु का वास होता है। तुलसी स्तुति के इन श्लोकों के माध्यम से हम तुलसी माता को प्रणाम करते हैं और उनसे पापों का नाश व पवित्रता की Read More

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पिप्पलस्तुति (Pippal Stuti)

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हिंदू धर्म में वृक्षों की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हें जीवन, ऊर्जा और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना गया है।इनमें से सबसे पवित्र और पूजनीय वृक्ष है पीपल (अश्वत्थ) — जिसे स्वयं त्रिदेवों का निवास स्थान कहा गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल के मूल में भगवान ब्रह्मा, छाल में Read More

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दीपस्तुति: (Deep Stuti)

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हिंदू संस्कृति में दीपक को केवल प्रकाश का स्रोत नहीं, बल्कि ज्ञान, शुद्धता और ईश्वरीय ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। जब भी संध्या या पूजा का समय आता है, तो सबसे पहले दीप प्रज्वलित किया जाता है — क्योंकि माना जाता है कि जहाँ दीपक जलता है, वहाँ अंधकार, नकारात्मकता और पाप दूर भाग Read More

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श्री चण्डी ध्वज स्तोत्रम् (Shri Chandi Dhwaj Stotram)

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“श्री चण्डी ध्वज स्तोत्र” अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो देवी महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती — त्रिदेवी की संयुक्त उपासना का रूप है।इस स्तोत्र का वर्णन मार्कण्डेय ऋषि ने किया है, और इसमें चण्डी स्वरूपा देवी को सर्वब्रह्ममयी, त्रिगुणात्मक और सर्वशक्ति की अधिष्ठात्री बताया गया है।इसका मुख्य उद्देश्य साधक को राज्य, धन, ऐश्वर्य, विजय और सर्वकाम-सिद्धि Read More

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मीनाक्षी स्तोत्रम् (Meenakshi Stotram)

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यह स्तोत्र “मीनाक्षी स्तोत्रम्” कहलाता है, जिसे आदि शंकराचार्य (श्रीमच्छङ्करभगवत्पाद) ने रचा था। यह देवी मीनाक्षी अंबा — जो भगवान शिव की अर्धांगिनी और मदुरै की अधिष्ठात्री देवी हैं — की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें देवी की दिव्य लीलाओं, स्वरूप, करुणा और कल्याणकारी शक्तियों का वर्णन किया गया है। मीनाक्षी Read More

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पंचायुध स्तोत्रम (Panchayudha Stotram)

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विष्णु पंचायुध स्तोत्रम् एक दिव्य और शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान विष्णु के पाँच पवित्र आयुधों — सुदर्शन चक्र, पंचजन्य शंख, कौमोधकी गदा, नंदक तलवार और सारंग धनुष — की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्त को भय, दुख, पाप और संकटों से मुक्त करके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता Read More