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नवरत्न स्तोत्र (Navratna Stotra)

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नवरत्न स्तोत्र का अर्थ है “नौ रत्नों के समान अमूल्य श्लोकों वाला स्तोत्र”। यह स्तोत्र श्रीवल्लभाचार्य जी द्वारा रचित माना जाता है और यह पुष्टिमार्ग (भक्ति मार्ग) का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें कुल नौ श्लोक हैं — प्रत्येक श्लोक भक्ति, समर्पण और विश्वास का एक रत्न है। यह स्तोत्र सिखाता है कि जब भक्त Read More

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श्री नवनाग स्तोत्र (Shri Navnag Stotra)

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श्री नवनाग स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें नौ प्रमुख नाग देवताओं — अनन्त, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय — का स्मरण किया गया है। यह स्तोत्र भगवान श्री गणेश के आशीर्वाद से प्रारंभ होता है और नाग देवताओं की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। Read More

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श्री चण्डी ध्वज स्तोत्रम् (Shri Chandi Dhwaj Stotram)

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श्री चण्डी ध्वज स्तोत्रम् एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावकारी स्तोत्र है, जिसका पाठ सभी प्रकार की बाधाओं, कष्टों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, राज्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति का दिव्य साधन माना गया है। इसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती सहित देवी के विभिन्न स्वरूपों की Read More

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श्री नारायण कवच स्तोत्र (Shree Narayan Kavach)

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“नारायण कवच” श्रीमद्भागवत महापुराण के षष्ठ स्कंध (छठे स्कंध) के आठवें अध्याय में वर्णित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है। यह कवच भगवान श्रीहरि विष्णु के दिव्य नामों और स्वरूपों से निर्मित एक आध्यात्मिक रक्षा कवच है, जो भक्त को हर प्रकार के भय, संकट, रोग, शत्रु और अदृश्य शक्तियों से सुरक्षित रखता है। Read More

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श्री पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम् (Shri Purushottam Sahasranama Stotram)

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सनातन धर्म के विशाल ग्रंथों में “सहस्त्रनाम स्तोत्र” परंपरा का विशेष स्थान है। जैसे भगवान शिव के लिए शिव सहस्त्रनाम, देवी के लिए ललिता सहस्त्रनाम, उसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य पुरुषोत्तम स्वरूप के लिए यह है — “श्री पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्”। यह स्तोत्र भगवान श्रीविष्णु के पुरुषोत्तम रूप की महिमा का गान करता है Read More

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श्री पुण्डरीकाक्ष स्तोत्रम् (Sri Pundarikaksha Stotram)

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श्री पुण्डरीकाक्ष स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र वैष्णव स्तोत्र है, जिसका उल्लेख श्री वराह पुराण के षष्ठ अध्याय में मिलता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के पुण्डरीकाक्ष (कमलनयन) रूप की स्तुति करता है। “पुण्डरीकाक्ष” नाम का अर्थ है — वह जिनकी नेत्र कमल के समान सुंदर, कोमल और शुद्ध हैं। इस स्तोत्र में भगवान विष्णु को Read More

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द्वादश आर्य स्तुति (Dwadash Arya Stuti)

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“द्वादश आर्य स्तुति” एक अत्यंत पवित्र और महत्त्वपूर्ण वैदिक स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य देव की आराधना में रचा गया है। “द्वादश” का अर्थ होता है बारह, और “आर्य स्तुति” का अर्थ है उत्तम या दिव्य गुणों की स्तुति। अतः “द्वादश आर्य स्तुति” का आशय है — सूर्य भगवान के बारह रूपों या नामों की Read More

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श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली (Gayatri Ashtottara Sata Namavali )

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“श्री गायत्र्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्” (Shri Gayatri Ashtottara Shata Nama Stotram) माता गायत्री देवी के 108 पवित्र नामों का दिव्य संग्रह है। यह स्तोत्र वेदों की जननी, त्रिमूर्तियों की अधिष्ठात्री, और संपूर्ण सृष्टि की आधारशक्ति माँ गायत्री की महिमा का बखान करता है। इन नामों में माता के स्वरूप, गुण, तेज, करुणा, ज्ञान और ब्रह्मांडव्यापी शक्ति का Read More

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सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र (Sarvadosh Nashak Shri Navagraheshwari Lakshmi Stotra)

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सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो नवग्रहों की नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने में मदद करता है। सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र (Sarvadosh Nashak Shri Navagraheshwari Lakshmi Stotra) सूर्य लक्ष्मी (स्वर्ण लक्ष्मी)स्वर्णाभां प्रभया समुल्लसितां देवानुतां योगविद्याविशिष्टाम्।ह्रौं दीप्तिमार्गे रविमण्डलस्थां नमाम्यहं स्वर्णलक्ष्मीमन्याम्॥सूर्यलक्ष्मी नमस्तुभ्यं ज्वालामालिन्यरूपिणि।रक्तवर्णे Read More

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एकात्मता स्तोत्रम् (Ekatmata Stotram)

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यह “एकात्मता स्तोत्रम्” भारत माता की अखंडता, गौरव और संस्कृति को समर्पित एक अद्भुत वंदना है। इसमें भारतीय भूमि, नदियाँ, पर्वत, तीर्थ, महापुरुष, संत, ऋषि, कवि, वीर, वैज्ञानिक और राष्ट्रनायकों का भावपूर्ण स्मरण किया गया है। यह स्तोत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष की विविधता में एकता, “एकात्मता” के दिव्य संदेश को प्रकट करता है। प्रत्येक श्लोक भारत Read More