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श्री पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम् (Shri Purushottam Sahasranama Stotram)

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सनातन धर्म के विशाल ग्रंथों में “सहस्त्रनाम स्तोत्र” परंपरा का विशेष स्थान है। जैसे भगवान शिव के लिए शिव सहस्त्रनाम, देवी के लिए ललिता सहस्त्रनाम, उसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य पुरुषोत्तम स्वरूप के लिए यह है — “श्री पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्”। यह स्तोत्र भगवान श्रीविष्णु के पुरुषोत्तम रूप की महिमा का गान करता है Read More

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श्री पुण्डरीकाक्ष स्तोत्रम् (Sri Pundarikaksha Stotram)

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श्री पुण्डरीकाक्ष स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र वैष्णव स्तोत्र है, जिसका उल्लेख श्री वराह पुराण के षष्ठ अध्याय में मिलता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के पुण्डरीकाक्ष (कमलनयन) रूप की स्तुति करता है। “पुण्डरीकाक्ष” नाम का अर्थ है — वह जिनकी नेत्र कमल के समान सुंदर, कोमल और शुद्ध हैं। इस स्तोत्र में भगवान विष्णु को Read More

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द्वादश आर्य स्तुति (Dwadash Arya Stuti)

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“द्वादश आर्य स्तुति” एक अत्यंत पवित्र और महत्त्वपूर्ण वैदिक स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य देव की आराधना में रचा गया है। “द्वादश” का अर्थ होता है बारह, और “आर्य स्तुति” का अर्थ है उत्तम या दिव्य गुणों की स्तुति। अतः “द्वादश आर्य स्तुति” का आशय है — सूर्य भगवान के बारह रूपों या नामों की Read More

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श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली (108 Names of Goddess Gayatri)

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“श्री गायत्र्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्” (Shri Gayatri Ashtottara Shata Nama Stotram) माता गायत्री देवी के 108 पवित्र नामों का दिव्य संग्रह है। यह स्तोत्र वेदों की जननी, त्रिमूर्तियों की अधिष्ठात्री, और संपूर्ण सृष्टि की आधारशक्ति माँ गायत्री की महिमा का बखान करता है। इन नामों में माता के स्वरूप, गुण, तेज, करुणा, ज्ञान और ब्रह्मांडव्यापी शक्ति का Read More

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सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र (Sarvadosh Nashak Shri Navagraheshwari Lakshmi Stotra)

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सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो नवग्रहों की नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने में मदद करता है। सर्वदोष नाशक श्रीनवग्रहेश्वरी लक्ष्मी स्तोत्र (Sarvadosh Nashak Shri Navagraheshwari Lakshmi Stotra) सूर्य लक्ष्मी (स्वर्ण लक्ष्मी)स्वर्णाभां प्रभया समुल्लसितां देवानुतां योगविद्याविशिष्टाम्।ह्रौं दीप्तिमार्गे रविमण्डलस्थां नमाम्यहं स्वर्णलक्ष्मीमन्याम्॥सूर्यलक्ष्मी नमस्तुभ्यं ज्वालामालिन्यरूपिणि।रक्तवर्णे Read More

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एकात्मता स्तोत्रम् (Ekatmata Stotram)

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यह “एकात्मता स्तोत्रम्” भारत माता की अखंडता, गौरव और संस्कृति को समर्पित एक अद्भुत वंदना है। इसमें भारतीय भूमि, नदियाँ, पर्वत, तीर्थ, महापुरुष, संत, ऋषि, कवि, वीर, वैज्ञानिक और राष्ट्रनायकों का भावपूर्ण स्मरण किया गया है। यह स्तोत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष की विविधता में एकता, “एकात्मता” के दिव्य संदेश को प्रकट करता है। प्रत्येक श्लोक भारत Read More

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श्री देवी खड्गमाला स्तोत्रम् (Devi Khadgamala Stotram)

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“श्री शुद्ध शक्ति माला महा मन्त्र” जिसे देवी खड्गमाला स्तोत्र भी कहा जाता है, श्रीविद्या साधना का अत्यंत गूढ़ और दिव्य स्तोत्र है। यह श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी के नवावरण — अर्थात् श्रीचक्र के नौ मंडलों — में स्थित देवी शक्तियों की स्तुति है। प्रत्येक शक्ति दिव्य सामर्थ्य, ज्ञान और सिद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती है। Read More

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श्री चामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रं (Shri Chamundeshwari Ashtottara Shatanama Stotram)

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“श्री चामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्” देवी चामुण्डा के 108 दिव्य नामों का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है।यह स्तोत्र देवी चामुण्डेश्वरी (महाकाली का उग्र रूप) को समर्पित है, जो महिषासुर, शुंभ, निशुंभ, मधु–कैटभ जैसे असुरों का संहार करने वाली शक्ति हैं।इनके नामों में देवी के सभी रूपों का वर्णन है —महाकाली, महालक्ष्मी, महावाणी, दुर्गा, पार्वती, अन्नपूर्णा, भैरवी, ललिता Read More

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चण्डी स्तोत्र Chandi Stotram

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चण्डी स्तोत्र देवी महामाया चण्डिका को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली एवं दुर्लभ तांत्रिक स्तोत्र है।इसमें देवी दुर्गा, काली, गौरी, त्रिपुरासुंदरी, बगलामुखी, भैरवी, नीलसुंदरी आदि शक्ति के विविध स्वरूपों की स्तुति की गई है।यह स्तोत्र साधक को यह सिखाता है कि देवी के प्रसाद से वह सब प्राप्त किया जा सकता है जो संसार में दुर्लभ Read More

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चन्द्रशेखर अष्टक स्तोत्र (Chandrashekhara Ashtakam)

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“चन्द्रशेखराष्टकम्” एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रसिद्ध शिव स्तोत्र है, जिसकी रचना मार्कण्डेय ऋषि ने की थी।यह स्तोत्र भगवान चन्द्रशेखर शिव (जिनके जटाओं में चन्द्र विराजमान हैं) की स्तुति में रचा गया है। कथा के अनुसार —जब बालक मार्कण्डेय को अपने अल्पायु (१६ वर्ष) का ज्ञान हुआ और मृत्यु समीप आई, तब उसने महायोगी भाव से Read More