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बंदी मोचन स्तोत्र (Bandi Mochan Hanuman Stotra)

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बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र’ एक अत्यंत प्रभावशाली और श्रद्धा से युक्त स्तोत्र है, जिसका पाठ विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो किसी न्यायिक संकट, झूठे आरोप, या जेल जैसी परिस्थिति में फँस गए हों। यह स्तोत्र देवी शक्ति के स्वरूप “बंदी देवी” की स्तुति है, जो लौह-बंधनों को काटने Read More

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पार्श्वनाथ सहस्रनाम स्तोत्रं (Parshvanatha Sahasranama Stotram)

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पार्श्वनाथ सहस्रनाम स्तोत्र एक अत्यन्त पवित्र स्तोत्र है जिसमें भगवान पार्श्वनाथ — जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर — के कुल 1008 दिव्य नामों का स्तवन किया गया है। यह स्तोत्र भक्त को आध्यात्मिक शांति, मानसिक संतुलन, एवं सद्गुण विकास की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है । इस स्तोत्र के नियमित पाठ से: पार्श्वनाथ सहस्रनाम स्तोत्रं Read More

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प्रातः स्मरणम् (Pratah Smaranam)

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“प्रातः स्मरणम्” एक अत्यंत पवित्र और शुभ स्तोत्र है जिसे प्राचीन भारतीय ऋषियों ने विशेष रूप से प्रातःकाल (सुबह) के समय जपने के लिए रचा है। इसका उद्देश्य है—दिन की शुरुआत आत्मचिंतन, ईश्वर-चिन्तन और परमात्मा के विविध रूपों की स्तुति से करना, ताकि मनुष्य का मन, वचन और कर्म शुद्ध हों और सम्पूर्ण दिन दिव्यता Read More

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प्रह्लादकृत नृसिंह स्तोत्रम् (Prahladkrit Narsimha Stotra)

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प्रहलादकृत नृसिंह स्तोत्र श्रीहरि विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना भक्त प्रह्लाद द्वारा स्वयं भगवान नृसिंहदेव की स्तुति करते समय की गई थी। यह स्तोत्र श्रीमद्भागवतम् के सातवें स्कंध में वर्णित है और कुल 48 श्लोकों में संपूर्ण है। जब हिरण्यकशिपु जैसे अत्याचारी असुर का वध कर भगवान Read More

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प्रत्यंगिरा महाविधा स्तोत्र (Pratyangira Mahavidya Stotra)

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किसी भी शत्रु की प्रबलतम तांत्रिक क्रियाओं को वापिस लौटने वाली एवं रक्षा करने वाली ये महा दिव्यशक्ति है। इस तंत्र का प्रयोग शत्रु को नाश करने के लिए, शत्रुओं के किये-करायों को नाश करने के लिए किया जाता है। कोई भी सिद्ध तन्त्र क्रियाओं को जानने वाला तांत्रिक इस विद्या का प्रयोग कर सकता Read More

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प्रग्य्ना विवर्धना कार्तिकेय (Pragnya Vivardhana Karthikeya Stotram)

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“प्रज्ञा विवर्धन कार्तिकेय स्तोत्र” एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद, कुमारस्वामी) को समर्पित है। यह स्तोत्र रुद्रयामल तंत्र से लिया गया है और मुख्य रूप से बुद्धि, वाक्पटुता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र में भगवान कार्तिकेय के 28 पवित्र नामों का वर्णन किया गया है, जो उनके Read More

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पित्र देव स्तोत्रं (Pitra Dev Stotram)

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पितृ देव स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से युक्त स्तोत्र है, जो हमारे पूर्वजों (पितरों) की स्तुति, सम्मान और तृप्ति के लिए विशेष रूप से गाया या पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है, जिसमें रुचि मुनि द्वारा ध्यान और तप के माध्यम से पितरों को प्रसन्न करने के लिए Read More

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पितृ दोष स्तोत्र (Pitra Stotra)

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“पितृ स्तोत्र” एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जो पितरों की स्तुति, स्मरण और तृप्ति के लिए रचा गया है। यह स्तोत्र उन दिव्य आत्माओं के सम्मान में गाया जाता है जिन्होंने इस धरती पर जन्म लिया और फिर शरीर त्याग कर पितृलोक को प्राप्त हुए। श्राद्ध, तर्पण और पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर Read More

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पशुपतास्त्रेय स्तोत्र (Pashuptastrey Stotra)

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शनि स्वयं फल नहीं देते, वे केवल कर्मों का फल देते हैं। यदि कुंडली में शनि प्रतिकूल है, तो शिव की उपासना विशेष रूप से लाभकारी होती है। यह स्तोत्र अग्नि पुराण के 322वें अध्याय से लिया गया है और अत्यंत प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी माना गया है। यह प्रयोग शनि दोष, विवाह में देरी, Read More

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परा पूजा स्तोत्रम् (Para Puja Stotra)

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परा पूजा स्तोत्र कथिततः श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है और इसे “निर्गुण मानस पूजा” या “ब्रह्म-वित्तमय पूजा” कहा जाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम परमात्मा की पूजा को बाह्य सामग्री से परे, दृष्टिबोध और कर्मभेद से मुक्त होकर करें — जहाँ हमारा मन, प्राणी और शरीर ईश्वर की पूजा का माध्यम बन Read More